उच्चतम न्यायालय का बडा आदेश,घरेलू हिंसा से शिकार महिलाओं को देवर से भी मिलेगा मुआवजा…

घरेलू हिंसा कानून पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही बताया...घरेलू हिंसा कानून पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही बताया...
उच्चतम न्यायालय का बडा आदेश,घरेलू हिंसा से शिकार महिलाओं को देवर से भी मिलेगा मुआवजा…

नई दिल्ली  – पति की मौत के बाद घरेलू हिंसा से शिकार महिला को देवर से मुआवजा मिलेगा, घरेलू हिंसा कानून के तहत् ये सभंव है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि घरेलू हिंसा कानून के तहत अदालत देवर को पीडिता महिला को गुजारा भत्ता देने का आदेश दे सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि किसी भी महिला के साथ घरेलू हिंसा होने पर उस परिवार को राहत नही दी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में देवर से गुजारा भत्ता दिलाने कीमांग करने वाली औरत की मौत हो चुकी है। यह महिला हरियाणा के पानीपत की रहने वाली है।महिला ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कहा था कि उसकी शादी एक साझा परिवार में हुईथी। उसका पति और देवर साझा दुकान करते थे। पति की मौत के बाद पालन पोषण के लिए ससुरालपक्ष ने गुजारा भत्ता देने से मना कर दिया। सारी दलीलें सुनने के बाद पंजाब एवं हरियाणाहाईकोर्ट ने आदेश दिया कि वह पीडि़ता को 4 हजार रुपये प्रति महिने और बेटी को दो हजाररुपये प्रति महिने बतौर गुजारा भत्ता दे। फैसले के खिलाफ देवर ने सुप्रीम कोर्ट मेंअपील की। कोर्ट ने उसकी अपील खारिज करते हुए कहा कि कानून के सेक्शन 12 के तहत मैजिस्ट्रेटको पूरा अधिकार है कि वह पीडि़त महिला को गुजारा भत्ता दिलवाने का आदेश दे। इस केसमें पीडि़त महिला ने गुजारा भत्ता दिलाए जाने के कई आधार भी दिए।

घरेलू हिंसा कानून का दायरा काफी व्यापक है और इसमेंपरिवार का हर वयस्क पुरुष आता है। इसके तहत पीडि़त पत्नी या शादी जैसे रिश्ते में रहरही कोई भी महिला पति/पुरुष साथी के रिश्तेदार के खिलाफ भी शिकायत दर्ज करा सकती है।  कोर्ट ने कहा कि कानून के सेक्शन 2(एफ) में घरेलूरिश्तेदारी  को व्यापक ढंग से समझाया गया है।घरेलू रिश्तेदारी वह रिश्तेदारी है जिसमें कोई युगल शादी के बाद संयुक्त परिवार मेंरहता है या ऐसे घर में रहता है जहां परिवार के अन्य सदस्य भी रहते हैं।   

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