​फिर खुला चौटाला के कर्मों का ताला: हरियाणा के पूर्व CM को 4 साल की सजा और 50 लाख रुपए का जुर्माना भी‚ CBI कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति में सुनाई सजा

Om Prakash Chautala Case: चौटाला को सीबीआई कोर्ट ने आय से अधिक मामले में चार साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने चौटाला पर 50 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। स्पेशल जज विकास धुल ने उन्हें 21 मई को प्रिवेन्शन ऑफ करप्शन एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी करार दिया था।
​फिर खुला चौटाला के कर्मों का ताला: हरियाणा के पूर्व CM को 4 साल की सजा और 50 लाख रुपए का जुर्माना भी‚ CBI कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति में सुनाई सजा

Om Prakash Chautala Case: हरियाणा के पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला को सीबीआई कोर्ट ने आय से अधिक मामले में चार साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने चौटाला पर 50 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। स्पेशल जज विकास धुल ने उन्हें 21 मई को प्रिवेन्शन ऑफ करप्शन एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी करार दिया था। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने ओम प्रकाश चौटाला की 4 संपत्तियां जब्त करने का भी आदेश दिया है। ये संपत्तियां हेली रोड, पंचकूला, गुरुग्राम और असोला में हैं।

CBI ने चौटाला की बीमारी और विकलांगता का विरोध कर ज्यादा सजा की मांग की

इससे पहले गुरुवार को ओम प्रकाश चौटाला की सजा पर बहस हुई थी। इस दौरान CBI के वकील ने चौटाला की बीमारी और विकलांगता की दलीलों का विरोध करते हुए कहा था कि खराब स्वास्थ्य का इलाज कराया जाना चाहिए, लेकिन अधिकतम सजा दी जानी चाहिए।
CBI ने कहा था कि आम लोगों में उचित संदेश देने के लिए अधिकतम सजा जरूरी है। सीबीआई के वकील ने कहा था, भ्रष्टाचार समाज के लिए कैंसर के समान है, भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट को ऐसी सजा देनी चाहिए जिससे समाज में मिसाल दिया जा सके।

कोर्ट रूम से ही चौटाला को हिरासत में लेने का आदेश

चौटाला 5 लाख रुपए अलग से CBI को देने होंगे। 5 लाख न देने पर 6 महीने की और सजा होगी। अदालत ने कोर्ट रूम से ही चौटाला को हिरासत में लेने का आदेश दिया। चौटाला की तरफ से इस मामले में अपील फाइल करने के लिए 10 दिन का समय मांगा गया। इस पर जज ने कहा कि आप हाई कोर्ट जाइए।

आय से ज्यादा संपत्ति का मामला क्या है?

26 मार्च 2010 को सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में बताया था कि 24 मई 1993 से 31 मई 2006 तक अपने पद पह रहते हुए आय से ज्यादा संपत्ति कमाई। सीबीआई के मुताबिक, उनके पास 6.09 करोड़ रुपये की संपत्ति ऐसी थी, जिसके सोर्स का उनके पास कोई सबूत नहीं था। चौटाला के पास आय से 189.11% संपत्ति ज्यादा थी।
चौटाला के खिलाफ प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच शुरू की थी। ED ने बताया था कि पद पर रहते हुए चौटाला ने आय से ज्यादा कमाई की और उसका इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने में किया।
2019 में ED ने चौटाला की 3.68 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली थी। उनका नई दिल्ली, पंचकूला और सिरसा में स्थित फ्लैट, एक प्लॉट और जमीन को जब्त कर लिया गया था। जनवरी 2021 में स्पेशल जज विकास धुल ने उनके खिलाफ आरोप तय किए थे।

भ्रष्टाचार के मामले में पहले भी काट चुके जेल की हवा

इससे पहले चौटाला को 22 जनवरी 2013 को जेबीटी टीचर्स भर्ती घोटाले में सजा हो चुकी है। इस घोटाले के मामले में उन्हें करप्शन और आपराधिक साजिश के तहत दोषी करार दिया गया था।
भर्ती घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें 7 साल और आपराधिक साजिश के मामले में 10 साल की सजा हुई र्थी।
इस मामले ओम प्रकाश चौटाला के अलावा उनके बड़े अजय चौटाला और 53 अन्य लोगों को दोषी करार दिया गया था। कुल 55 लोग दोषी साबित हुए थे।
जेबीटी टीचर्स भर्ती घोटाला 2000 में आया था। ये मामला 3,206 टीचर्स की गैर-कानूनी तरीके से हुई भर्ती से जुड़ा था। पिछले साल 2 जुलाई को सजा पूरी होने के बाद चौटाला रिहा हुए थे।

ऐसा रहा चौटाला का राजनीति सफर

चौटाला हरियाणा के 7 बार विधायक और 4 बार सीएम रहे। वो 2 दिसंबर 1989 से 22 मई 1990, 12 जुलाई 1990 से 17 जुलाई 1990, 22 मार्च 1991 से 6 अप्रैल 1991 और 24 जुलाई 1999 से 5 मार्च 2005 तक मुख्यमंत्री रहे हैं।

1999 में BJP के समर्थन से चौटाला ने बंसी लाल की सरकार गिराई और मुख्यमंत्री बन गए

1996 में जस्टिस केएन सैकिया आयोग ने चौटाला को अमीर सिंह की हत्या के मामले में दोषी पाया था, जिसके बाद ओपी चौटाला के बजाय बनारसी दास गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि, दो महीने बाद चौटाला फिर मुख्यमंत्री बन गए। लेकिन पार्टी के दबाव के चलते 5 दिन में ही उन्हें पद से हटना पड़ा। 8 महीने बाद चौटाला फिर से मुख्यमंत्री बन गए। 1999 में बीजेपी के समर्थन से चौटाला ने बंसी लाल की सरकार को गिरा दिया और मुख्यमंत्री बन गए।

ओपी चौटाला के पिता चौ. देवी लाल की सरकार में उप प्रधानमंत्री रहे

उनके पिता देवी लाल जनता दल की सरकार में उप प्रधानमंत्री थे। उनके बाद ही चौटाला पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे। उन्हें पद पर बने रहने के लिए चुनाव जीतना जरूरी था और इसके लिए उन्होंने तीन बार उपचुनाव लड़ा।
पहली बार उपचुनाव बूथ कैप्चरिंग के आरोपों के चलते रद्द कर दिए गए थे। दूसरी बार निर्दलीय उम्मीदवार अमीर सिंह की मौत के कारण रद्द करना पड़ा था। तीसरी बार उपचुनाव में चौटाला जीत गए थे।
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