‘गजवा-ए-हिंद’ वाया सेक्युलरिज्म, PFI के डॉक्यूमेंटस से बड़ी साजिश का खुलासा

दस्तावेज में लिखा है कि PFI को उम्मीद है कि कम से कम 10% मुस्लिम भी उसके साथ आ जाएं तो वह कायर बहुसंख्यक समुदाय को उनके घुटनों के बल ला देगा
‘गजवा-ए-हिंद’ वाया सेक्युलरिज्म, PFI के डॉक्यूमेंटस से बड़ी साजिश का खुलासा
  • 2047 तक गजवा ए हिंद की तैयारी

  • हर घर में PFI सदस्यों की भर्ती की रणनीति

  • RSS और SC/ST/OBC के बीच दरार पैदा करने का प्लान

  • हर घर से एक व्यक्ति को संगठन में भर्ती करेगा PFI

  • हिंदू/संघ परिवार के नेताओं के खिलाफ सूचना का संग्रहन करने का भी खुलासा

पटना पुलिस द्वारा बेनकाब किए गए आतंकियों का नेटवर्क न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बल्कि पूरे देश की व्यवस्था पर था। भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने की साजिश के लिए सात पन्नों का एक्शन प्लान तैयार किया था, जिसमें लिखा था कि अगर 10 फीसदी मुसलमान समर्थन करते हैं तो बहुसंख्यक उनके घुटनों पर आ जाएगा। उनकी योजना दलित-ओबीसी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से अलग करने की भी थी।

भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने के लिए 'मिशन 2047'
पुलिस के मुताबिक इस नए संगठन का गठन सिमी के पूर्व सदस्यों की मदद से किया जा रहा था। इसमें पीएफआई और एसडीपीआई से जुड़े लोग शामिल थे। यह नेटवर्क भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने के 'मिशन 2047' के एजेंडे पर काम कर रहा था। इसके लिए नेटवर्क ने पटना को अपना आधार बनाया। यहां 26 लोग आकर युवाओं को ट्रेनिंग देते थे। इन संदिग्ध आतंकियों के पास से अंग्रेजी में लिखे हुए 7 पन्नों के दस्तावेज मिले हैं, जिसमें कई जगहों पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का जिक्र है।

वर्ष 2009 में स्थापित, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) मजहबी कट्टरपंथी संगठन, पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) का राजनीतिक संगठन है। PFI का नाम 2006 के मुंबई ब्लास्ट और 2008 के अहमदाबाद ब्लास्ट में सामने आया था। सीएए के विरोध और हिजाब विवाद में पीएफआई और इसकी छात्र शाखा सीएफआई की सक्रिय भागीदारी देखी गई।

एसडीपीआई देश भर में विभिन्न नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध के आयोजन में बहुत सक्रिय भूमिका में था। पीएफआई पर दिल्ली जैसे दंगों के लिए फंडिंग और दंगों की योजना बनाने के आरोप लगे। जब पूरे देश में सीएए के खिलाफ दंगे हुए तो पीएफआई का नाम सबसे ऊपर आया। असम हो या उत्तर प्रदेश, इन राज्यों से PFI के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। चाहे वह शाहीन बाग में अराजकता फैलाना हो, या पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगा भड़काना हो, इनमें PFI की भूमिका संदिग्ध थी।

पीएफआई पर हिंसक और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप लगा है। केरल पुलिस ने काबुल स्थित गुरुद्वारे पर आत्मघाती हमला करने वाले आतंकियों की जानकारी देते हुए कहा था कि आत्मघाती हमले में शामिल हमलावरों में से एक न सिर्फ केरल से जुड़ा था बल्कि पीएफआई का भी हिस्सा था।

बहुत कुछ कहते हैं साजिश के सात पन्नें...

पहला पन्ना

पहला पन्ना जिसका टाइटल India 2047 है। साथ ही इसे इंटरनल दस्तावेज बताते हुए लिखा है- 'भारत में मजहबी शासन की ओर।'

दूसरा पन्ना

पुलिस को मिले डॉक्यूमेंट के दूसरे पन्ने में देश के मुस्लिमों को गुमराह करने के लिए मुस्लिमों की स्थिति बदतर बताई गई है। मुस्लिम समुदाय की वर्तमान स्थिति बताते हुए डॉक्यूमेंट में PFI ने 9 जिलों में 75% मुस्लिम आबादी की बात कही है। जिसमें लिखा है कि 'देश में 9 जिलों को छोड़कर मुस्लिमों की स्थिति बदतर है। जब हम कारण को देखेंगे तो हमें ब्रिटिश राज से शुरू करना होगा। शुरू से वे हिंदुओं से सहानुभूति रखते थे और मुस्लिमों को प्रताड़ित करते थे।

तीसरा पन्ना

इस पन्ने में भारत को 2047 तक मुस्लिम समुदाय की मदद से मजहबी सरकार बनाने के सपने को लिखा गया है। लिखा है, 'हम 2047 का सपना देख रहे हैं जहां मुस्लिम समुदाय के पास राजनीतिक सत्ता होगी। इसके लिए पहला कदम मुस्लिम समुदाय सामाजिक और आर्थिक तौर पर मजबूत करना होगा।

इसके लिए एक अलग से रोडमैप Empower India Foundation के तहत शुरू हो चुका है आगे दस्तावेज में लिखा है कि PFI को उम्मीद है कि कम से कम 10% मुस्लिम भी उसके साथ आ जाएं तो वह कायर बहुसंख्यक समुदाय को उनके घुटनों के बल ला देगा।

चौथा पन्ना

इस पन्ने में इस्लामी शासन की ओर बढ़ने के चार चरण हैं-

पहला चरण: मुसलमानों को एकजुट करें। तलवार, रॉड और कई तरह के हथियारों को चलाने का प्रशिक्षण दें।

दूसरा चरण: अपने नैरेटिव को मजबूत करने के लिए PFI के नेतृत्व में मोबिलाइजेशन करना होगा। यही नहीं हिंसा का सिलेक्टिविली इस्तेमाल अपनी ताकत दिखाने और विपक्षी (बहुसंख्यक) को टेरराइज करने के लिए करना होगा। कैडर में जो अच्छा करेंगे उन्हें फायर आर्म्स और एक्सप्लोसिव की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही इस्लामी शासन स्थापित करने के इरादे को छुपाने के लिए राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और आंबेडकर का इस्तेमाल करने की बात कही गई।

तीसरा चरण: चुनाव जीतने के लिए SC/ST/OBC के साथ गठजोड़ करें। राजनीतिक जीत से अपने संगठन को मजबूत करें। साथ ही RSS और SC/ST/OBC के बीच दरार पैदा करें। उन्हें सिर्फ अपर कास्ट हिंदुओं के पक्षधर के रूप में दिखाएं। सेक्युलर पार्टियों को भी डिसक्रेडिट करना होगा और मुस्लिमों के साथ SC/ST/OBC का अपना पार्टी बनाना होगा। इसी स्टेज में हथियार और गोला बारूद के स्टॉक भी बढ़ाने की बात लिखी गई है।

चौथा चरण: डॉक्यूमेंट लिखा है- इस स्टेज में PFI अपने आप को मुस्लिमों का निर्विवाद रूप से एकमात्र संगठन के रूप में पेश करेगा। अन्य मजहबी संगठनों को साइड लाइन किया जाएगा। साथ ही 50 प्रतिशत SC/ST/OBC का भी विश्वास हासिल करेगा और उनका प्रतिनिधि बनेगा। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता हासिल करना आसान होगा। एक बार सत्ता में आ गए तो एग्जीक्यूटिव, जुडीशियरी, पुलिस और आर्मी में अपने वफादारों को बैठा दिया जाएगा।

5वां पन्ना

इस पन्ने में लिखा है कि कैसे सभी 4 चरणों के पूरा होने के बाद, बाहरी ताकतों की मदद से इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नया संविधान घोषित किया जाएगा। लिखा है- जो भी खिलाफ होंगे उन्हें एलिमिनेट कर दिया जाएगा। मुस्लिम युवाओं में कट्टरपंथ बढ़ाने के लिए बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुई मुस्लिमों की लिंचिंग का इस्तेमाल करें। इसके लिए मास प्राथमिकता होनी चाहिए।

छठा पन्ना

इस पन्ने में PFI ने हर घर अपनी पहुंच बढ़ाने की बात की है। लिखा है- हर घर से एक व्यक्ति को संगठन में भर्ती किया जाएगा, नहीं कर पाए तो एक को पार्टी में शामिल करना या फिर उन्हें अपने मैगजीन या आर्टिकल का पाठक बनाना। यानी हर घर को किसी भी तरीके से अपने टच में रखना है और PFI के प्रोग्राम से उन्हें जोड़ना होगा।

7वां पन्ना

इसमें हिंदू/संघ परिवार के नेताओं के खिलाफ सूचना का संग्रह के साथ बाहरी मदद की बात कही गई है। साथ ही ऑफिस का लोकेशन भी डेटाबेस में शामिल किया जाए, ताकि उन्हें ट्रैक किया जा सके। डॉक्युमेंट में लिखा है कि आगे फ्रेंडली मजहबी देशों के मदद की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए PFI ने तुर्की के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित किए हैं। कुछ अन्य इस्लामी देशों में विश्वसनीय मित्रता विकसित करने के प्रयास जारी है।

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