जम्मू कश्मीर: श्रीनगर में कई स्थानों पर टेरर फंडिंग मामले में NIA का धावा, अज्ञात दानदाताओं से मिल रहा था फंड

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने टेरर फंडिंग केस के सिलसिले में आज जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के कार्यालयों सहित कई जगहों पर छापेमारी की।
जम्मू कश्मीर: श्रीनगर में कई स्थानों पर टेरर फंडिंग मामले में NIA का धावा, अज्ञात दानदाताओं से मिल रहा था फंड
Image Credit: TV9 Bharatvarsh

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने टेरर फंडिंग केस के सिलसिले में आज जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के कार्यालयों सहित कई जगहों पर छापेमारी की। एनआईए ने मीडिया को दिए अपने बयानों में बार-बार दावा किया है कि विभिन्न संगठनों को अज्ञात दानदाताओं से फंड मिल रहा था, जिसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कर रहे थे।

कई स्थानों पर हुई छापेमारी

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमीरा कदल लाल चौक और सोनवाड़ा शहर में छापेमारी की गई है। पिछले साल भी, एनआईए ने श्रीनगर और कश्मीर के अन्य हिस्सों में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न व्यक्तियों के आवासों और कार्यालयों पर छापे मारे थे। जानकारी के अनुसार आज की छापेमारी में स्थानीय पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी की मदद की। अर्धसैनिक बलों और पुलिस के जवानों ने कार्यालयों की गहन तलाशी ली।

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क्या होती है टेरर फंडिंग?

टेरर फंडिंग में आतंकी गतिविधियों के लिए फंड उपलब्ध कराया जाता है। इसमें वैध स्रोतों से जुटाई गई धनराशि भी शामिल है, जैसे व्यक्तिगत दान और व्यवसायों और धर्मार्थ संगठनों से लाभ। टेरर फंडिंग में इसके साथ ही क्रिमिनल सोर्स से भी पैसा मिलता है। जैसे नशीली दवाओं का व्यापार, हथियारों और अन्य सामानों की तस्करी, धोखाधड़ी, अपहरण और जबरन वसूली। जब आतंकवादी वैध स्रोतों से धन जुटाते हैं, तो इन निधियों का पता लगाना और उन्हें ट्रैक करना अधिक कठिन हो जाता है।

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