जबलपुर में ‘ईद-मिलाद-उन-नबी’ पर दंगा भड़काने की रची गई साजिश! पुलिस को मिले वीडियो फुटेज से हुआ खुलासा

मध्य प्रदेश के जबलपुर में ईद-मिलाद-उन-नबी के जुलूस में विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, ईद के मौके पर पुलिस और खास समुदाय के बीच झड़प हो गई। कुछ लोगों ने पुलिस पर पटाखे फोड़े।
जबलपुर में ‘ईद-मिलाद-उन-नबी’ पर दंगा भड़काने की रची गई साजिश! पुलिस को मिले वीडियो फुटेज से हुआ खुलासा
Image Credit: TV9 Bharatvarsh

मध्य प्रदेश के जबलपुर में ईद-मिलाद-उन-नबी के जुलूस में विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, ईद के मौके पर पुलिस और खास समुदाय के बीच झड़प हो गई। कुछ लोगों ने पुलिस पर पटाखे फोड़े। जिसके बाद 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अब जबलपुर पुलिस को कुछ ऐसे वीडियो फुटेज मिले है, जिससे पता चलता है कि यह बवाल अचानक नहीं हुआ था, बल्कि यह एक सोची समझी साजिश थी। पुलिस द्वारा खींची गई फुटेज में देखा जा सकता है कि कुछ लोग भीड़ को भड़का रहे हैं। पुलिस ने खुलासा किया है कि इस हंगामे से दो दिन पहले आनंदनगर में हुई एक गुप्त बैठक में इस झड़प की पटकथा लिखी गई थी।

इस हंगामे में शामिल लोग सीएए दंगों में भी थे शामिल

पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि इस हंगामे में शामिल लोग सीएए दंगों में भी शामिल थे। गोहलपुर पुलिस को कई ऐसे सबूत मिले हैं, जो इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। पुलिस अब उन लोगों की पहचान कर रही है जिन्होंने गुपचुप बैठक कर झड़प की पटकथा लिखी थी। ईद-मिलाद-उन-नबी जुलूस में बगावत के सिलसिले में पुलिस अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि 19 अक्टूबर को जबलपुर में ईद-मिलाद-उन-नबी के जुलूस में हंगामा करने वाले लोग भी सीएए और एनआरसी के दौरान हुए हंगामे में शामिल थे।

ओमती टीआई कर रही है मामलों की जांच

अब इन मामलों की जांच ओमती टीआई कर रही है। बताया जा रहा है कि इन दंगों में नामजद लोग इस समय के हंगामे में आरोपी बताए जा रहे हैं। इन लोगों पर दंगा कराने की साजिश का आरोप है। पुलिस ने 13 अक्टूबर को ही मुस्लिम समाज की कलह को देखा था। मछली बाजार में हंगामे के 6 दिन पहले प्रशासन ने बारात को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों के साथ बैठक की थी। इस दौरान समाज के लोगों ने सख्त लहजे में पुलिस से कहा था कि इस बार मुफ्ती-ए-आजम लोगों के साथ है। उन्होंने कहा था कि इस बार चाहे लाठी का इस्तेमाल हो या फिर गोलियां… जुलूस जरूर निकाला जाएगा। उन्होंने आवाज उठाते हुए कहा कि अगर शहर में शांति व्यवस्था बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

50 हजार पटाखे फोड़ने के लिए की गई थी फंडिंग

दरअसल प्रशासन ने मुफ्ती-ए-आजम मौलाना हजरत मोहम्मद हामिद से कोरोना गाइड लाइन का पालन कराने के लिए सहयोग मांगा था। जिसके बाद मुफ्ती-ए-आजम ने प्रशासन का साथ देते हुए लोगों से सौहार्दपूर्ण तरीके से त्योहार मनाने की अपील की। साथ ही लोगों से पटाखे न फोड़ने की अपील भी की। इसके बावजूद 17 अक्टूबर को आनंदनगर में गुप्त बैठक बुलाई गई। ये मुलाकात एक मौलाना के घर पर हुई थी। जिसमें 50 हजार पटाखे फोड़ने के लिए फंडिंग की गई थी।

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