नहीं रहे संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा: हार्ट अटैक से निधन, पिछले छह महीनों से किडनी की समस्या से थे पीड़ित

Pandit Shivkumar Sharma Passed Away: भारतीय संगीतकार और संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का मुंबई में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे।
नहीं रहे संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा: हार्ट अटैक से निधन, पिछले छह महीनों से किडनी की समस्या से थे पीड़ित

Pandit Shivkumar Sharma Passed Away: भारतीय संगीतकार और संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का मुंबई में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। वह पिछले छह महीने से किडनी संबंधी समस्याओं से पीड़ित थे और डायलिसिस पर थे।

गौरतलब है कि पंडित शिव कुमार शर्मा का सिनेमा जगह में अहम योगदान रहा। बॉलीवुड में 'शिव-हरी' नाम से मशहूर शिव कुमार शर्मा और हरि प्रसाद चौरसिया की जोड़ी ने कई सुपरहिट गानों में संगीत दिया था। इसमें से सबसे प्रसिद्ध गाना फिल्म 'चांदनी' का 'मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां' रहा, जो दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी पर फिल्माया गया था।

पंडित शिव कुमार शर्मा और हरि प्रसाद चौरसिया की जुगलबंदी कमाल की होती थी। 13 जनवरी, 1938 को कश्मीर में जन्मे शिवकुमार शर्मा ने बनारस घराने से संगीत शिक्षा हासिल की और उनका पहला सोलो एलबम 1960 में ही रिलीज किया गया था।

संतूर को लोक संगीत के वाद्य से निकाल शास्त्रीय संगीत के वाद्य के तौर पर स्थापित किया

संतूर को लोकसंगीत के वाद्य की छवि से निकालकर शास्त्रीय संगीत के वाद्य के रूप में स्थापित करने में शिवकुमार शर्मा का बड़ा योगदान है। नए तकनीकों से 'मींड' का प्रभाव तथा गायकी और लयकारी का चरित्र संतूर को उन्होंने ही दिया। बांसुरी जैसे तंतुविहीन वाद्य को भी नियंत्रित करने की कला में सिद्धहस्त चौरसिया और संतूर जैसे मुश्किल वाद्य को हर तरह से बजाने वाले शर्मा का बृजभूषण काबरा के गिटार के साथ 'कॉल आफ द वैली' एलबम काफी लोकप्रिय रहा है। चौरसिया ने 'हरिप्रिया' और 'मंगल ध्वनि' जैसे नए रागों को भी अपनी बांसुरी से स्थापित किया।

सिलसिला, लम्हे और चांदनी जैसी फिल्मों दिया संगीत

संतूर वादक शिव कुमार शर्मा ने वाद्य यंत्र संतूर को विश्व प्रसिद्ध बनाने में अहम योगदान दिया। संतूर वाद्य यंत्र कभी कभी जम्मू-कश्मीर का एक अल्पज्ञात वाद्य था, लेकिन पंडित शर्मा के योगदान के संतूर को एक शास्त्रीय संगीत वाद्य यंत्रदर्जा दिया और इसे अन्य पारंपरिक और प्रसिद्ध वाद्ययंत्रों जैसे सितार और सरोद के साथ ऊंचाई पर पहुंचा दिया। पंडित शिवकुमार शर्मा ने सिलसिला, लम्हे और चांदनी जैसी फिल्मों के लिए बांसुरीवादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के साथ संगीत तैयार किया।
फ़िल्मों में पंडित शिव कुमार शर्मा और हरि प्रसाद चौरसिया को लाने का श्रेय यश चोपड़ा को जाता है। अमिताभबच्चन, जया भादूड़ी और रेखा को एक साथ अपनी चर्चित फ़िल्म 'सिलसिला' (1981) में लानेवाले यश चोपड़ा ने संगीत के लिए खय्याम को न चुनकर शिव हरि की जोड़ी को चुना। यश चोपड़ा की फिल्मों में पंजाबी, पहाड़ी संगीत की हवा हेमशा से रही और इस जोड़ी के साथ भी उन्होंने अपनी शैली को कायम रखा। 'सिलसिला' फ़िल्म के गीत काफी हिट रहे।

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