Farmers Day: हे अन्नदाता तेरा शुक्रगुजार, सलामत रहे तू हम हैं तेरे कर्जदार

किसान की औसत आय 10,000 रुपए से भी कम है, फिर भी इतनी समस्याओं के बावजूद किसान यानि अन्नदाता ये कोशिश करता है कि देश में अनाज के भंडार भरे रहे और वो इस कोशिश पर खरा उतरता है।
Farmers Day: हे अन्नदाता तेरा शुक्रगुजार, सलामत रहे तू हम हैं तेरे कर्जदार

PHOTO- AFP

“खेतों में 3 फसल उगाई है सब बर्बाद हो गई, जब फसल उगाई तो DAP नहीं मिला, फिर बादल हो गए तो धुप ढंग से नहीं निकली सारे दाने नहीं उगे, जो उगी उसको ये शीतलहर मार गई और पाला पड़ 50 बीघा सरसों और 20 बीघा मेथी सब खत्म, सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया”
-सुमेर सिंह, किसान

ये एक सुमेर सिंह की कहानी नहीं ये हर गांव, हर खेत में धान उगने वाले किसान की कहानी है, अब सवाल ये है की हर अन्नदाता इतना परेशान क्यों है ?

जब आंदोलन होता है तो सरकार घुटने पर आती है लेकिन सिर्फ अपने चुनाव रंगमंच को सजाने के लिए, सरकार जब भी चुनाव आते है तो बड़ी-बड़ी घोषणा करती है योजनाएँ लेकर आती है,

लेकिन सुमेर सिंह का कहना है उन्हें DAP तक नहीं मिला, तो क्या किसान ऐसे ही तकलीफ में रहेगा, एक रिपोर्ट आई है जिसमें पिछले 15 साल में धान का उत्पादन 50% तक बढ़ा है,

लेकिन इसके बावजूद किसान की औसत आय 10,000 रुपए से भी कम है, फिर भी इतनी समस्याओं के बावजूद किसान रूपी अन्नदाता ये कोशिश करता है कि देश में अनाज के भंडार भरे रहे और वो इस कोशिश पर खरा उतरता है।

अन्नदाता का फसल उगाने से लेकर ककतें तक का सफर
आज किसान दिवस के अवसर पर जयपुर से 150 किलोमीटर दूर परसरामपुरा के रहने वाले किसान सुमेर सिंह से बात हुई, अपने परिवार के साथ मिलकर अनाज उगा रहे है, लेकिन जब किसान के समस्या की बात आती है तो किसान-किसान नहीं रहता चाहत ये उसके अपने कारण है, क्यों की किसान अन्नदाता है, धान उगाता है धान बेचता है, देश का पेट भरता हैं और इसी से अपना परिवार चलता हैं, लेकिन फसल उगाने के बाद उसकी उम्मीद इसी पर आकर रूकती है की धान कब बड़ा हो और फिर उसे बेचे लेकिन इससे पहले ही कई समस्याओं से लड़ता है जिसके बाद फसल बाजार में आती है।

100 बीघा जमीन पर खेती करने वाले किसान सुमेर सिंह क्या बोले

सुमेर सिंह ने 100 बीघा जमीन पर 50 बीघा गेहूं, 30 बीघा सरसों, और 20 बीघा मेथी उगाई थी, लेकिन ठण्ड की वजह से फसल खराब हो गई

क्या सुमेर जैसे किसानो का निकलेगा समाधान

अब सवाल ये है क्या अन्नदाता ऐसे ही परेशान होते रहेंगे? एक्सपर्ट्स का कहना है कृषि में सुधार के लिए नीदरलैंड निति के आधार पर काम किया जाए तो कृषि में सुधार हो सकता है,

नीदरलैंड मूल्य आधारित निर्यातक देशों में आज दुनिया में दूसरे नंबर पर है और पहले नंबर पर अमेरिका है, नीदरलैंड के कृषि में तरक्की का मुख्य कारण ग्रीनहाउस है,

और पशुपालन के मामले में भी नीदरलैंड दुनिया के अग्रणी देशो में से एक है, साथ ही सर्वोच्च खाद्य और पेय कंपनियां नीदरलैंड में है तो इसका मतलब ये है की ये ही निति अगर भारत में चलाई जाए तो बड़े बदलाव आ सकते है।

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