Supreme Court : मकान बनाने के लिए पैसे मांगना भी 'दहेज की मांग' है

न्यायाधीश एन.वी. रमण की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना और हिमा कोहली की पीठ ने कहा'दहेज' शब्द को व्यापक अर्थ में लिया जाना चाहिए ताकि एक महिला से की गई किसी भी मांग को शामिल किया जा सके, चाहे संपत्ति के संबंध में या किसी भी तरह की मूल्यवान सुरक्षा के संबंध में।
Supreme Court : मकान बनाने के लिए पैसे मांगना भी 'दहेज की मांग' है

दहेज़ की सीधे मांग ना करके किसी और कारण वश मांगना भी अपराध है।

भारतीय समाज के लिए दहेज एक अभिशाप है हर एक घंटे में दहेज प्रताड़ना से महिला की मौत होती है। दहेज ने स्त्रियों के जीवन को दूभर कर दिया है। दहेज की प्रथा के खिलाफ संपूर्ण भारतवर्ष में समय-समय पर आंदोलन होते रहे हैं। नवाचार की क्रांति के माध्यम से दहेज का उन्मूलन करने तथा समाज से दहेज के समूल को नष्ट करने के प्रयास किए जाते रहे हैं। दहेज की मांग, दहेज संबंधित कई अपराधों को जन्म देती है।

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज़ के एक मामले में मंगलवार को कहा कि घर बनाने के लिए पैसे की मांग दहेज की मांग है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी के तहत दंडनीय है। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमण की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना और हिमा कोहली की पीठ ने कहा, "मौजूदा मामले के तथ्यों में, हमारी राय है कि निचली अदालत ने मृतक पर घर के निर्माण के लिए प्रतिवादियों द्वारा की गई पैसे की मांग की परिभाषा के तहत 'दहेज' शब्द के जरिए सही ढंग से व्याख्या की है। दहेज़ की सीधे मांग ना करके किसी और कारण वश मांगना भी अपराध है।

<div class="paragraphs"><p>बेंच की ओर से फैसला लिखने वाले जस्टिस कोहली ने कहा कि यह नजर नहीं आ सकती कि आरोपी लगातार महिला को प्रताड़ित कर रहा था</p></div>

बेंच की ओर से फैसला लिखने वाले जस्टिस कोहली ने कहा कि यह नजर नहीं आ सकती कि आरोपी लगातार महिला को प्रताड़ित कर रहा था

मृतका के पति जोगेंद्र और ससुर बद्री प्रसाद को आईपीसी की धारा 304-बी, 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 498-ए के तहत दोषी ठहराया

वही बेंच की ओर से फैसला लिखने वाले जस्टिस कोहली ने कहा कि यह नजर नहीं आ सकती कि आरोपी लगातार महिला को प्रताड़ित कर रहा था, जिसने अप्रैल 2002 में खुद को आग लगा ली थी और मर गया था। इसके बाद महिला को अपने मायके से संपर्क कर घर बनाने के लिए पैसे मांगकर लाने के लिए मजबूर किया गया।

उन्होंने आगे कहा कि इस संदर्भ में 'दहेज' शब्द को व्यापक अर्थ में लिया जाना चाहिए ताकि एक महिला से की गई किसी भी मांग को शामिल किया जा सके, चाहे संपत्ति के संबंध में या किसी भी तरह की मूल्यवान सुरक्षा के संबंध में।

इस मामले में निचली अदालत ने मृतका के पति जोगेंद्र और ससुर बद्री प्रसाद को आईपीसी की धारा 304-बी, 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 498-ए के तहत दोषी ठहराया।

एक नजर हम दहेज़ प्रताड़ना से मौत के आकड़ो पर डाले तो

हत्याएँ देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है और वर्ष 2007 से 2011 के बीच इस प्रकार के मामलों में काफी वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि विभिन्न राज्यों से वर्ष 2012 में दहेज हत्या के 8,233 मामले सामने आए।

वही केंद्र सरकार की ओर से जुलाई 2015 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते तीन सालों में देश में दहेज संबंधी कारणों से मौत का आंकड़ा 24,771 था. जिनमें से 7,048 मामले सिर्फ उत्तर प्रदेश से थे. इसके बाद बिहार और मध्य प्रदेश में क्रमश: 3,830 और 2,252 मौतों का आंकड़ा सामने आया।

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