Bihar Cabinet : नीतीश के तरकश में अब 31 'तीर'... दागी, बाहुबली को मंत्री पद; मुस्लिमों के 'पीर'

सुशासन बाबू के नाम से विख्यात नीतीश कुमार की बिहार कैबिनेट में आज 31 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इसमें विशेष्कर दलित और मुस्लिम वर्ग को अधिक तवज्जो दी गई है। 5 दलित और 5 मुस्लिमों को मंत्री पद दिया गया है, वहीं मंत्रिमंडल में दागी और बाबुबली को भी जगह मिली है।
Bihar Cabinet : नीतीश के तरकश में अब 31 'तीर'... दागी, बाहुबली को मंत्री पद; मुस्लिमों के 'पीर'

बिहार में नीतीश कैबिनेट का आज मंगलवार को विस्तार हुआ। राजभवन में कुल 31 मंत्रियों ने शपथ दिलाई गई। इसमें बड़ी बात यह है कि महागठबंधन की नई सरकार में सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर मंत्री बनाए गए हैं। ओबीसी-ईबीसी से सबसे ज्यादा 17, दलित- 5 और 5 मुस्लिम शामिल हैं। NDA गठबंधन के मुकाबले अगड़ी जातियों का प्रतिनिधित्व इस बार घटा है। पिछली बार अपर कास्ट के 11 मंत्री थे, जो इस बार घटकर 6 हो गए हैं। वहीं पिछली बार OBC-EBC से 13 मंत्री थे, जबकि मात्र 2 मुस्लिम मंत्रिमंडल में शामिल थे। इसी प्रकार नीतीश सरकार में दागी मंत्री, RJD के दबंग सुरेंद्र यादव और JDU के बाहुबली ज़मा खान भी मंत्री बनाए गए हैं। इसी प्रकार पिछली बार की बजाया इस बार मुस्लिम समुदाय से 3 अधिक मंत्री बनाकर नीतीश बाबू ने तुष्टीकरण का भी प्रयास किया है। इससे सुशासन बाबू नीतीश कुमार के शासन में कैसे सुशासन होगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

RJD के दबंग सुरेंद्र यादव, JDU के बाहुबली ज़मा खान को मिला मंत्री पद

राजभवन में राज्यपाल फागु चौहान ने कुल 31 मंत्रियों को शपथ दिलाई। नीतीश कैबिनेट में आरजेडी के दबंग सुरेंद्र यादव और जेडीयू के बाहुबली जमा खान ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। राज्यपाल ने 5-5 के बैच में मंत्रियों को शपथ दिलाई। शपथ लेने वालों में आरजेडी कोटे से 16, जेडीयू से 11, कांग्रेस से 2, हम से एक और निर्दलीय से एक शामिल हैं। राजद सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने भी मंत्री पद की शपथ ली है।

जानें कौन हैं सुरेंद्र यादव और जमा खान

नीतीश कैबिनेट में आरजेडी के दबंग सुरेंद्र यादव और जेडीयू के बाहुबली जमा खान ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। सुरेंद्र यादव बेलागंज से विधायक हैं। पिछले 30 साल से बेलागंज के विधायक सुरेंद्र यादव की पहचान एक दबंग विधायक और बिहार राजनीति के ताकतवर चेहरे के रूप में की जाती है। अब तक सुरेंद्र यादव 2 बार जनता दल और 5 बार आरजेडी से विधायक रहे हैं। सुरेंद्र प्रसाद यादव राजद प्रमुख लालू यादव और उनके बेटे तेजस्वी के करीबी माने जाते हैं। वहीं जेडीयू कोटे से मंत्री बने जमा खान की छवि भी दबंग नेता के रूप में हैं। जमा खान पर 24 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। 2020 में जमा खान ने बीएसपी से चुनाव लड़ा और जीतने के बाद विधायक बने। बाद में बीएसपी को छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए।

जेडीयू-आरजेडी ने कैसे साधा जातीय समीकरण

आपको बताते हैं कि आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस ने अपने नेताओं के साथ कैसे जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है. पहले बात आरजेडी की। आरजेडी ने 7 यादव विधायकों को मंत्री बनाया है। इसके अलावा 3 मुस्लिम (1 ईबीसी, 1 ओबीसी और एक अन्य), 2 अतिपिछड़ा, 2 अनुसूचित जाति, 1 कुशवाहा, 1 भूमिहार, 1 राजपूत और एक वैश्य आरजेडी कोटे से नीतीश कुमार की कैबिनेट में शामिल हुए हैं।

जेडीयू ने भी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जातीय समीकरण बैठने की पूरी कोशिश की है। इसके लिए 2 कु्र्मी, 1 यादव, 1 मुस्लिम, 2 अतिपिछड़ा, 2 अनुसूचित जाति, 1 कुशवाहा, 1 भूमिहार, 1 ब्राह्मण और एक राजपूत को कैबिनेट में जगह दी है. कांग्रेस कोटे से एक मुस्लिम और एक अनुसूचित जाति का विधायक मंत्री बना है। जीतन राम मांझी की पार्टी हम से एक अनुसूचित जाति का नेता महागठबंधन सरकार में मंत्री बना है. वहीं एक निर्दलीय राजपूत भी नीतीश कैबिनेट में नजर आएगा।

किस दल को कितना प्रतिनिधित्व

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पास गृह, सामान्य प्रशासन समेत 5 विभाग रखे हैं। वहीं तेजस्वी के पास स्वास्थ्य, पथ निर्माण, नगर विकास और ग्रामीण कार्य का जिम्मा मिला है। लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मिला है। राजभवन में राज्यपाल फागू चौहान 31 मंत्रियों को शपथ दिलाई। मंत्रियों ने पांच-पांच के बैच में शपथ ली। मंत्री बनने वाले कुल 31 विधायकों में RJD से सबसे ज्यादा 16, JDU से 11, कांग्रेस से 2, हम से एक और एक निर्दलीय शामिल है। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप शपथ लेने वाले पहले 5 विधायकों में शामिल रहे। मंत्रिमंडल में सभी जातियों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। हालांकि सबसे ज्यादा फोकस ओबीसी और ईबीसी पर किया गया है। जाति की बात करें तो सबसे ज्यादा यादव जाति के 8 विधायक इस बार मंत्रिमंडल में शामिल हैं। आरजेडी की तरफ से 7 और जदयू की तरफ से एक यादव विधायक मंत्री बने हैं। पिछले मंत्रिमंडल में इस जाति से सिर्फ 2 मंत्री थे।

नीतीश कैबिनेट में ये 31 बने मंत्री

विजय चौधरी, बिजेंद्र यादव, आलोक मेहता, तेजप्रताप यादव, अफाक अहमद, अशोक चौधरी, श्रवण कुमार, लेसी सिंह, सुरेन्द्र यादव, रामानन्द यादव, कुमार सर्वजीत, मदन साहनी, ललित यादव, संतोष सुमन, संजय झा, शीला कुमारी, समीर महासेठ, चंद्र शेख, सुमित कुमार सिंह, सुनील कुमार, अनीता देवी, जितेंद्र राय, जयंत राज, सुधाकर सिंह, जमा खान, मुरारी प्रसाद गौतम, शाहनवाज़, सुरेन्द्र राम, MD इज़राइल मंसूरी, शमीम अहमद और कार्तिकेय कुमार।

सुशील मोदी ने नाम गिनाकर नीतीश कुमार से पूछा सवाल, किस मजबूरी में इन अपराधियों को बनाया मंत्री

महागठबंधन की सरकार में मंत्रियों के शपथ लेते ही मंगलवार को बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री व राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार पर हमला किया। आपराधिक छवि के मंत्रियों को तरजीह देने का आरोप लगाते हुए सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि ऐसे लोगों को कुर्सी देने की क्या मजबूरी थी? ट्विटर पर बयान जारी कर भाजपा सांसद ने कहा कि जो वित्त विभाग राजद के पास होना चाहिए था वह भी जदयू ने उनसे छीन लिया। कैबिनेट में दो वर्गों के 33 प्रतिशत स्थान देने की बात करते हुए मोदी ने कहा कि यह संतुलित मंत्रिपरिषद नहीं है। इसका देश में सकारात्मक संदेश नहीं जाएगा।

जिनसे जनता डरती है उन्हें बनाया मंत्री

भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया। उन्होंने कहा कि राज्य कैबिनेट में अपराधिक छवि के लोगों की भरमार है। मंत्रियों में सामाजिक संतुलन नहीं है। राजद की ओर से ललित यादव, रामानंद यावद, सुरेंद्र यादव और कार्तिक कुमार जैसे दागदार छवि के लोग हैं। सुशील मोदी ने कहा कि ललित यादव वहीं हैं जिन्होंने ट्रक ड्राइवर के पांव के नाखुन उखाड़ लिए थे। आरोप में ललित को लालू यादव ने अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। उन्होंने कहा कि सुरेंद्र यादव पर यौन शोषण समेत नौ मुकदमे चल रहे हैं। रामानंद और कार्तिक कुमार की भी वही स्थिति है। उन्होंने कहा कि ये ऐसे नेता हैं जो अपने इलाके में चलते हैं तो लोग डर जाते हैं।

मंत्रिपरिषद में आपराधिक छवि वालों की भरमार

सुशील मोदी ने कहा कि मंत्रिमंडल में दो वर्ग के लोगों को 33 प्रतिशत स्थान दिया गया। तेली समाज का एक मंत्री नहीं बनाया गया। कान्यकुब्ज और कायस्थ समाज से किसी को तरजीह नहीं दी गई। मंत्रियों में राजपूतों की संख्या घटा दी गई। उन्होंने कहा कि यह संतुलित मंत्रिपरिषद नहीं है। सुशील मोदी ने याद दिलाया कि एनडीए सरकार में अतिपिछड़ा समाज से आने वाली रेणु देवी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। वैश्य समाज के तारकिशोर प्रसाद डिप्टी सीएम थे। वित्त विभाग राजद के पास होना चाहिए था। जदयू ने दोनों प्रमुख विभाग अपने पास रख लिया। उन्होंने कहा कि असंतुलित और आपराधिक छवि वालों की मंत्रिपरिषद में भरमार है।

अति पिछड़ों की उपेक्षा: डॉ. प्रमोद चंदवंशी

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और विधान पार्षद डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने बिहार मंत्रिमंडल गठन में अति पिछड़ों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य की आबादी के हिसाब से अति पिछड़ों की जो हिस्सेदारी होनी चाहिए, उससे उन्हें वंचित रखा गया। जबकि महागठबंधन की सरकार खुद को अतिपिछड़ों का मसीहा होने का दावा करती है। उन्होंने कहा कि अति पिछड़ा समाज से महज एक विधायक को ही मंत्री बनाकर इस समाज की घोर अवहेलना की है। चंद्रवंशी ने कहा कि राज्य में अति पिछड़ों की करीब 33 फीसदी आबादी है, इस हिसाब से मंत्रिमंडल में कम से कम उनकी संख्या 9 से 10 होनी चाहिए।

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