3 राज्यों में AFSPA का दायरा सीमित:असम, नागालैंड, मणिपुर के हिस्सों से सेना को खास शक्‍तियां देने वाला कानून हटा
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3 राज्यों में AFSPA का दायरा सीमित:असम, नागालैंड, मणिपुर के हिस्सों से सेना को खास शक्‍तियां देने वाला कानून हटा

पिछले साल दिसंबर में, नागालैंड में सेना द्वारा 13 नागरिकों के मारे जाने और एक अन्य घटना में एक व्यक्ति के मारे जाने के बाद असम में AFSPA (Armed Forces Special Powers Act) को हटाने की मांग ने जोर पकड़ा था।

कर्द सालों के बाद, भारत सरकार ने नागालैंड, असम और मणिपुर राज्यों में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम यानि Armed Forces Special Powers Act (AFSPA) के तहत अशांत क्षेत्रों के दायरे को कम करने का निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक ट्वीट कर यह जानकारी दी।

शाह ने लिखा- AFSPA के क्षेत्रों का दायरा कम करने में सरकार द्वारा शांति लाने के जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे मददगार रहे हैं। इन इलाकों में आतंकवाद भी बढ़ा है। कई समझौतों के कारण सुरक्षा की स्थिति और घटनाक्रम ने भी कानून को हटाने में मदद की।

नागालैंड से उठी थी AFSPA हटाने की मांग

पिछले साल दिसंबर में, नागालैंड में सेना द्वारा 13 नागरिकों के मारे जाने और एक अन्य घटना में एक व्यक्ति के मारे जाने के बाद असम में AFSPA को हटाने की मांग ने जोर पकड़ लिया था। यह अधिनियम मणिपुर (इंफाल नगर परिषद क्षेत्र को छोड़कर), अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग, लोंगडिंग और तिरप जिलों, नागालैंड और असम के अलावा असम की सीमा से लगे जिलों के आठ पुलिस थाना क्षेत्रों में लागू है। केंद्र सरकार ने जनवरी की शुरुआत में नागालैंड में इसे छह महीने के लिए बढ़ा दिया था।
गृह मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक, पूर्वोत्तर में उग्रवाद की घटनाएं 2021 में घटकर 209 रह गई हैं, जो 1999 में 1749 थी। 2019 से 2022 तक 6900 से अधिक उग्रवादियों ने 4800 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है।
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विरोध में हुई थी घटनाएं

32 वर्षीय थंगजाम मनोरमा का 10-11 जुलाई 2004 की दरमियानी रात को सेना के जवानों ने कथित तौर पर बलात्कार और हत्या कर दी थी। मनोरमा का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला था। इस घटना के बाद 15 जुलाई 2004 को करीब 30 मणिपुरी महिलाओं ने नग्न होकर प्रदर्शन किया था।
यदि AFSPA के विरोध की बात की जाए तो सबसे पहले मणिपुर की आयरन लेडी के नाम से मशहूर हुई इरोम शर्मिला का जिक्र आता है। नवंबर 2000 में, एक बस स्टैंड के पास सैन्य बलों द्वारा दस लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के वक्त इरोम शर्मिला वहां मौजूद थीं। घटना का विरोध करते हुए 29 वर्षीय इरोम ने भूख हड़ताल शुरू की, जो 16 साल तक चली। अगस्त 2016 में भूख हड़ताल खत्म करने के बाद उन्होंने चुनाव भी लड़ा था, लेकिन हैरानी की बात ये है कि वहीं के लोगों की सेफ्टी के लिए भूख हड़ताल करने वाली इरोम को नोटा से कम वोट मिले थे।
AFSPA आखिर क्या है?
AFSPA केवल अशांत क्षेत्रों में लागू किया गया है। इन जगहों पर सुरक्षा बल बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार कर सकते हैं. कुछ मामलों में बल का प्रयोग भी किया जा सकता है। यह कानून 11 सितंबर 1958 को पूर्वोत्तर में सुरक्षा बलों की सुविधा के लिए पारित किया गया था। 1989 में जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ा तो 1990 में यहां AFSPA लागू किया गया। अशांत क्षेत्र कौन से होंगे, यह भी केंद्र सरकार तय करती है।

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