Govt Advisory: टीवी चैनलों पर सख्ती, एडवाइजरी में इन चीजों को नहीं दिखाने की हिदायत

Govt Advisory: सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सभी टेलीविजन चैनलों को एक एडवाइजरी जारी कर बताया है कि ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग न करें जो 'गुड टेस्ट और शालीनता' से समझौता करती हों। जानें मंत्रालय के निर्देश...
Govt Advisory: टीवी चैनलों पर सख्ती, एडवाइजरी में इन चीजों को नहीं दिखाने की हिदायत

Govt Advisory: केंद्र सरकार ने टीवी चैनलों को चेतावनी देते हुए कहा है कि हिंसक वीडियो बिना एडिट किए प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनका गलत प्रभाव पड़ रहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज (9 जनवरी) सभी टेलीविजन चैनलों को इस संबंध में एक एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में टीवी चैनलों को हिदायत दी है कि वे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ हिंसा, एक्सीडेंट और मौत की ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग न करें जो 'गुड टेस्ट और शालीनता' से पूरी तरह समझौता करती हों।

मंत्रालय द्वारा टेलीविजन चैनलों द्वारा विवेक की कमी के कई मामलों पर ध्यान दिए जाने के बाद यह सलाह जारी की गई है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने चैनलों को सख्त सलाह दी है कि वे अपनी प्रणाली को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) कानून के तहत निर्धारित कार्यक्रम संहिता के अनुरूप मजबूत करें।

'बच्चों पर पड़ सकता है गलत प्रभाव'

मंत्रालय ने कहा है कि बहुत से टेलीविजन चैनलों ने लोगों के शवों और घायल व्यक्तियों के फोटो और वीडियो को चारों ओर खून के छींटों के साथ दिखाया है। बहुत करीबी शॉट्स में दिखाया गया है कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित लोगों को बेरहमी से पीटा जा रहा है। एक टीचर द्वारा एक बच्चे को लगातार पीटा जा रहा है और वो रो रहा है, इस शॉट को कई बार दिखाया गया और ब्लर भी नहीं किया गया। इसमें कहा गया है कि इस तरह की घटनाओं की रिपोर्टिंग का तरीका दर्शकों के लिए रुचि पैदा नहीं करता और ये परेशान करने वाला भी है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि इस तरह की रिपोर्टिंग का बच्चों पर उल्टा मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ सकता है। इसके अलावा ये प्राइवेसी के हनन का एक महत्वपूर्ण मुद्दा भी है जो संभावित रूप से निंदा और मानहानि वाला हो सकता है। इसमें ये भी कहा गया है कि टेलीविजन, एक ऐसा मंच है, जिसे घर के सभी लोग देखते हैं, जोकि ब्रॉडकास्टर्स के लिए जिम्मेदारी और अनुशासन की एक निश्चित भावना पैदा करता है।

ऋषभ पंत सड़क हादसे का जिक्र

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने क्रिकेटर ऋषभ पंत की सड़क दुर्घटना समेत कुछ अन्य आपराधिक खबरों के टेलीविजन समाचार कवरेज को 'दिल दहलाने वाला' करार दिया है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि 'टीवी चैनलों ने व्यक्तियों के शवों और चारों और खून के छींटे, घायल व्यक्तियों के चित्र/वीडियो दिखाए हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित लोगों को करीबी शॉट्स में बेरहमी से पीटा जा रहा दिखाया है। ऐसे छवियों को धुंधला किए बिना या उन्हें लंबे शॉट्स से दिखाना और कई मिनटों तक बार-बार रिपीट करना, भयानक हो जाता है।'

मंत्रालय ने दिए कुछ उदाहरण

  • 30.12.2022: दुर्घटना में घायल हुए क्रिकेटर की दर्दनाक तस्वीरें और वीडियो बिना धुंधला किए दिखाया गया।

  • 28.08.2022: शव को घसीटते हुए एक आदमी का परेशान करने वाला फुटेज दिखाया गया, जिसके चारों ओर खून के छींटे पड़े हुए हैं।

  • 06-07-202: बिहार की राजधानी पटना के एक कोचिंग क्लासरूप में एक शिक्षक को 5 साल के बच्चे को बेरहमी से पिटाई करते तब तक दिखाया गया, जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गया। क्लिप को म्यूट किए बिना चलाया गया था, जिसमें दया की भीख मांगते बच्चे की दर्दनाक चीखें सुनी जा सकती हैं। इसे 09 मिनट से अधिक समय तक दिखाया गया था।

  • 04-06-2022: बिना धुंधला किए एक पंजाबी गायक के शव की दर्दनाक तस्वीरों को दिखाया गया।

  • इस तरह के प्रसारण पर चिंता जताते हुए और इसमें शामिल व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए और बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों सहित टेलीविजन चैनलों के दर्शकों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने सभी निजी टेलीविजन चैनलों को दृढ़ता से सलाह दी है कि वे अपने सिस्टम और रिपोर्टिंग घटनाओं की प्रथाओं को ध्यान में रखें।

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