कारगिल विजय दिवसः भारतीय जवानों की शौर्यगाथा, कैसे पाकिस्तान को चटाई धूल..

किस्सा कारगिल काः आज के ही दिन 23 साल पहले भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को कारगिल से बाहर खदेड़ा था और अपनी चौकियों पर कब्जा किया था।
किस्सा कारगिल का
किस्सा कारगिल का

किस्सा कारगिल काः 26 जुलाई 1999, वो तारीख जिसे भारत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। कारगिल विजय दिवस, ये तीन शब्द सुनते ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ जाता है।

आज ही के दिन 23 साल पहले हमारे शूरवीरों ने दुनिया की सबसे मुश्किल परिस्थितियों में जंग कर पाकिस्तान को धूल चटाई थी और उस मन्सूबों पर पानी फेर दिया था।

सीधे ऊंचे पहाड़, दोनो तरफ खाई, ऊपर से धुआंधार फायरिंग और सबसे ज्यादा खतरनाक हाड़ गला देने वाली सर्दी, लेकिन ये सब कुछ भारतीय जाबांजों के मनोबल को गिराने में नाकाम रहा था।

पाकिस्तान ने धोखे से की थी घुसपैठ

20 जून 1999: टाइगर हिल के पास महत्वपूर्ण ठिकानों पर भारतीय सेना ने फिर से कब्जा किया था।
20 जून 1999: टाइगर हिल के पास महत्वपूर्ण ठिकानों पर भारतीय सेना ने फिर से कब्जा किया था।

एक समझौते के अनुसार भारत और पाकिस्तान की सेनाएं ठंड के दिनों में कारगिल और द्रास के सेक्टर से अपने सेनाएं हटा लेते थे क्योंकि वहां ठंड बहुत ज्यादा होती है।

लेकिन पाकिस्तान तो ठहरा दगाबाज, उसने एक बार फिर हमको धोखा दिया और जब हमारे जवान वहां से हट गए थे तो कारगिल सेक्टर में घुसपैठ करके भारतीय चौकियों पर कब्जा कर लिया।

पाकिस्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया था कि वो किसी का सगा नहीं हो सकता था।

ऊंचाई पर होने के बावजूद पाकिस्तान ने मुंह की खाई

किस्सा कारगिल काः ऊंचाई पर होने के बावजूद पाकिस्तान ने मुंह की खाई
किस्सा कारगिल काः ऊंचाई पर होने के बावजूद पाकिस्तान ने मुंह की खाई

पाकिस्तानी घुसपैठ की बात जब भारतीय सेना को पता चली तो तुरंत उनको खदेड़ने के लिए हमारे जवानों ने प्लानिंग शुरू कर दी थी।

अब हमारे सामने कुछ समस्याएं थी पहली तो दुश्मन हमसे ज्यादा ऊंचाई पर बैठा था। दूसरी हमारे पास ठंड में लड़ने के लिए पर्याप्त कपड़े भी नहीं थे।

लेकिन जो था उसी को लेकर सेना चल पड़ी और ऑपरेशन विजय शुरू कर दिया गया। हड्डियां गला देने वाली सर्दी में भारत के जाबांजो ने डटकर इन पाकिस्तानियों का सामना किया और उनको यहां से खदेड़ किया।

भले ही टाइगर हिल हो, या प्वाइंट 4875 हर जगह पाकिस्तानियों ने मुंह की खाई।

2 महीने चला था युद्ध

26 जुलाई 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने युद्ध में विजय की घोषणा की थी।
26 जुलाई 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने युद्ध में विजय की घोषणा की थी।

भारतीय जांबांजो ने जमकर इनका मुकाबला किया और हमसे अच्छी पोजिशन में होने के बावजूद 2 महीने तक युद्ध चलने के बाद पाकिस्तान को हार का मुंह देखना पड़ा।

भारतीय सेना टाइगर हिल और अन्य पहाडियो पर कब्जा कर लिया और पाकिस्तान की कमर तोड़ कर दी।

भारतीय जवानों ने दुनिया भर को ये अहसास करा दिया कि अगर हिन्दुस्तान की तरफ किसी ने आंख उठाने की कोशिश भी की तो ये जवान उनकी आंखे तक नोंच लेंगे।

हमारे 527 जवान हुए थे शहीद

कैप्टन सौरभ कालिया, कैप्टन विक्रम बत्रा
कैप्टन सौरभ कालिया, कैप्टन विक्रम बत्रा

हमने अपने 527 जवान गँवाए। उनकी शहादत से ही आज कारगिल भारत का हिस्सा है। कारगिल युद्ध को दुनिया की सबसे ज्यादा ऊंचाईयों पर लड़े गए युद्ध में एक गिना जाता है।

कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन सौरभ कालिया सहित कई जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। इनके बलिदान को याद करने के लिए और कारगिल की विजय को मनाने के लिए ही हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।

सिन्स इंडिपेंडेस की तरफ से आप सबको कारगिल विजय दिवस की शुभकामनाएँ और गर्व कीजिए कि आप हिंदुस्तानी हैं।

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