Kuno National Park MP : जन्मदिन पर PM का देश को तोहफा, 70 साल बाद भारत की धरती पर चीते

पीएम मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में छोड़कर देश को अपने जन्मदिन पर का अनोखा तोहफा दिया। इसी के साथ भारत से विलुप्त हो चुका यह तेज धावक अब कूनो पार्क में अपना आशीयाना बनाएगा। देशवासी अब फिर से इन जीव के दीदार कर सकेंगे।
Kuno National Park MP : जन्मदिन पर PM का देश को तोहफा, 70 साल बाद भारत की धरती पर चीते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को अपने जन्मदिन पर नामीबिया से लाए गए चीतों को मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला स्थित कूनो नेशनल पार्क में रिलीज कर दिया। अब 748 वर्ग किलोमीटर में फैला कूनो पालपुर नेशनल पार्क 8 अफ्रीकी चीतों का नया घर बन जाएगा। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के कोरिया के साल जंगलों से मिलता जुलता है। गौरतलब है कि कोरिया में लगभग 70 साल पहले मूल एशियाई चीते को आखिरी बार देखा गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कूनो नेशनल पार्क में बॉक्स खोलकर तीन चीतों को क्वारंटीन बाड़े में छोड़ा। बाद में मोदी ने इनकी तस्वीरें भी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी साथ थे।

जैव-विविधता की सदियों पुरानी टूटी कड़ी को जोड़ा : नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क में नीमीबिया से आए चीतों को छोड़ने के बाद देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा, दशकों पहले जैव-विविधता की सदियों पुरानी जो कड़ी टूट गई थी, आज हमें उसे फिर से जोड़ने का मौका मिला है। पीएम ने कहा, आज भारत की धरती पर चीता लौट आए हैं और इन चीतों के साथ ही भारत की प्रकृतिप्रेमी चेतना भी पूरी शक्ति से जागृत हो उठी है।

पीएम ने कहा, मैं हमारे मित्र देश नामीबिया और वहां की सरकार का भी धन्यवाद करता हूं, जिनके सहयोग से दशकों बाद चीते भारत की धरती पर वापस लौटे हैं। उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्य रहा कि हमने 1952 में चीतों को देश से विलुप्त तो घोषित कर दिया, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए दशकों तक कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ।

मोदीजी ने मध्यप्रदेश को दी बड़ी सौगात : शिवराज सिंह

मुख्य़मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन पर मध्यप्रदेश को इससे बड़ी सौगात हो नहीं मिल सकती कि चीते नामीबिया से भारत, भारत में भी मध्यप्रदेश, मध्यप्रदेश में भी कूनो पालपुर आ रहे हैं। भारत में चीते समाप्त हो गए थे। चीता पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक काम हो रहा है। इस सदी की वाइल्डलाइफ की सबसे बड़ी घटना है। इससे मध्य प्रदेश में, बल्कि उस अंचल में टूरिज्म बहुत तेजी से बढ़ेगा। उस क्षेत्र के लिए तो चीता वरदान हो गया।

ग्वालियर अंचल से निकलेगी चीतों की दहाड़ : ज्योतिरादित्य सिंधिया

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि देश के लिए ही नहीं बल्कि विश्व के लिए बहुत बड़ी सौगात दी जा रही है। विश्व में पहली बार चीतों का विस्थापन हो रहा है। देश की धरती पर ऐसे आविष्कार किए जा रहे हैं जो विश्व में कही नहीं रहा और ऐसा ही उदाहरण कूनो पालपुर है। अब पूरे देशभर में चीतों की दहाड़ इस ग्वालियर चंबल अंचल से निकलेगी।

नामीबिया से विमान से लाए गए चीते

पांच मादा और तीन नर चीतों को लेकर विमान ने नामीबिया से उड़ान भरी थी। नामीबिया से भारत लाने के लिए विमान में विशेष माप वाले पिंजरे बनाए गए थे। करीब 11 घंटे की यात्रा करके ये चीते शनिवार सुबह ग्वालियर में उतरे। ग्वालियर से इन्हें विशेष चिनूक हेलीकॉप्टर से मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाया गया।

8 चीतों में 2 सगे भाई भी

भारत पहुंचे आठ चीतों में तीन नर और पांच मादा चीते हैं। दो नर चीतों की उम्र साढ़े पांच साल है। दोनों भाई हैं। दोनों नामीबिया के ओटजीवारोंगो स्थिति निजि रिजर्व से लाए गए हैं। तीसरे नर चीते की उम्र साढ़े चार साल है। इसे एरिंडी प्राइवेट गेम रिजर्व से लाया गया है। पांच मादा चीतों में एक दो साल, एक ढाई साल, एक तीन से चार साल तो दो पांच-पांच साल की हैं।

अब अफ्रीका के अलग-अलग देशों से और लाए जाएंगे चीते

अभी ये चीते नामीबिया से लाए गए। दक्षिण अफ्रीका से भी चीता लाने के लिए सरकार की बात लगभग पूरी हो चुकी है। जल्द ही यहां से भी चीते लाए जाएंगे। सरकार की योजना अगले पांच साल तक अफ्रीका के अलग-अलग देशों से चीते लाकर हिन्दुस्तान में बसाने की है।

कूनो नेशनल पार्क को चुनने के पीछे ये है वजह

नामीबिया के इन चीतों को लाने से पहले भारत के कई इलाकों पर विचार किया जा रहा था कि इन्हें कहां रखा जाए? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऊंचाई वाले स्थानों, तटीय और पूर्वोत्तर क्षेत्र को छोड़कर, भारत का मैदानी इलाका चीतों के रहने के लिए सही माना जाता है।

  • - 2010 और 2012 के बीच मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में दस साइट्स का सर्वेक्षण किया गया। बाद में यह पाया गया कि मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में बना कूनो राष्ट्रीय उद्यान ही चीतों के लिए सबसे सही और सुरक्षित जगह है।

  • - यह भारतीय वन्यजीव संस्थान और भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट (WTI) की ओर से जलवायु चर, शिकार घनत्व, प्रतिस्पर्धी शिकारियों की आबादी और ऐतिहासिक सीमा के आधार पर किए गए आकलन के आधार पर चीतों के लिए सबसे सही स्थान माना गया।

  • - चीता यूं तो खूंखार जानवर है। लेकिन माना जाता है कि चीते मनुष्य को कम ही नुकसान पहुंचाते हैं। मनुष्य और बड़े पशुओं पर बहुत ही कम हमला करते हैं। वे छोटे जानवरों का शिकार करना ज्यादा पसंद करते हैं।

  • - बता दें कि चीता धरती पर सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर है। कूनो नेशनल पार्क में कोई इंसानी बस्ती या गांव नहीं है और न ही खेती-बाड़ी। चीतों के लिए शिकार करने लायक बहुत कुछ है। यानी चीता जमीन पर हो या पहाड़ी पर, घास में हो या फिर पेड़ पर, उसे खाने की कमी किसी भी हालत में नहीं होगी।

  • - कूनो नेशनल पार्क में सबसे ज्यादा चीतल मिलते हैं, जिनका शिकार करना चीतों को पसंद आएगा। चीतल, हिरण की प्रजाति चीता, बाघ और शेरों के लिए बेस्ट प्रे बेस माना जाता है।

  • - कूनो नेशनल पार्क में पहले करीब 24 गांव थे, जिन्हें समय रहते दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया। इन्हें कूनो नेशनल पार्क के 748 वर्ग किलोमीटर के पूर्ण संरक्षित इलाके की सीमा से बाहर भेज दिया गया।

  • - एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कूनो नेशनल पार्क में 21 चीतों के रहने की जगह है। अगर 3,200 वर्ग किलोमीटर में सही मैनेजमेंट किया जाए तो यहां पर 36 चीते रह सकते हैं और पूरे आनंद के साथ शिकार कर सकते हैं।

  • - कूनो पार्क में चीता के साथ-साथ बाघ, शेर और तेंदुए के लिए भी रहने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है। इस जंगल में तेंदुओं की आबादी काफी है। यहां प्रति 100 वर्ग किलोमीटर में लगभग 9 तेंदुए पाए जाते हैं।

  • - चीता भले ही सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर है, लेकिन तेंदुए की तुलना में चीता कमजोर होता है। तेंदुआ चीते से ज्यादा ताकतवर माना जाता है। कभी-कभी तेंदुए, चीतों पर हमला भी कर देते हैं। इसलिए इस बात का खास ध्यान रखा जाएगा कि चीते सुरक्षित रहें।

वन विभाग की तैयारी, 24 घंटे की जाएगी निगरानी

वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि बाड़े आसपास मचान बनाए गए हैं। यहां पर रोस्टर के हिसाब से ड्यूटी लगाई जाएगी। जो 24 घंटे चीतों की मॉनीटरिंग करेंगे। इसमें फारेस्ट गार्डन, रेंज अफसर, वेटनरी डॉक्टर की अलग-अलग ड्यूटी है। वेटनरी डॉक्टर उसकी हेल्थ को देखेगा। चीतों नॉर्मल खाना-खा रहा है या नहीं। उनकी डेली रूटिन को बीट गार्ड देखते रहेंगे। चौहान ने बताया कि शिकारियों से बचाने के लिए 8-10 वर्ग किमी पर एक पेट्रोलिंग कैम्प है। जिसमें गार्ड और उनके सहायक रहते हैं। एक्स आर्मी के जवानों को भी लिया हुआ है।

नामीबिया से ऐसे भारत लाए गए चीते

पांच मादा और तीन नर चीतों को लेकर विमान ने नामीबिया की राजधानी होसिया से उड़ान भरी। मॉडिफाइड बोइंग 747 विमान से लाए गए इन चीतों में रेडियो कॉलर लगे हुए हैं। नामीबिया से भारत लाने के लिए विमान में 114 सेमी X 118 सेमी X 84 सेमी माप वाले पिंजरे बनाए गए थे। करीब आठ हजार किलोमीटर की यात्रा करके ये चीते शनिवार सुबह ग्वालियर में उतरे। ग्वालियर से इन्हें विशेष चिनूक हेलिकॉप्टर से मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाया गया।

1948 में आखिरी बार देखा गया था चीता

भारत में आखिरी बार चीता 1948 में देखा गया था। इसी वर्ष कोरिया राजा रामनुज सिंहदेव ने तीन चीतों का शिकार किया था। इसके बाद भारत में चीतों को नहीं देखा गया। इसके बाद 1952 में भारत में चीता प्रजाति की भारत में समाप्ति मानी गई। कूनो नेशनल पार्क में चीते को बसाने के लिए 25 गांवों के ग्रामीणों और 5 तेंदुए को अपना 'घर' छोड़ना पड़ा है।

1970 में एशियन चीते लाने की हुई कोशिश

भारत सरकार ने 1970 में एशियन चीतों को ईरान से लाने का प्रयास किया गया था। इसके लिए ईरान की सरकार से बातचीत भी की गई, लेकिन यह पहल सफल नहीं हो सकी। केंद्र सरकार की वर्तमान योजना के अनुसार पांच साल में 50 चीते लाए जाएंगे।

खासियत : 120 की रफ्तार, 23 फीट की छलांग, एक मिनट में शिकार

  1. चीता हर सेकेंड में चार छलांग लगाता है। चीते की अधिकतम रफ्तार 120 किमी प्रति घंटे की हो सकती है। सबसे तेज रफ्तार के दौरान चीता 23 फीट यानी करीब सात मीटर लंबी छलांग लगा सकता है।

  2. चीते की रिकॉर्ड रफ्तार अधिकतम एक मिनट के लिए रह सकती है। यह अपनी फुल स्पीड से सिर्फ 450 मीटर दूर तक ही दौड़ सकता है।

  3. चीते की आंख सीधी दिशा में होती है। इसकी वजह से वह कई मील दूर तक आसानी से देख सकता है। इससे चीते को अंदाजा हो जाता है कि उसका शिकार कितनी दूरी पर है। इसकी आंखों में इमेज स्टेबिलाइजेशन सिस्टम होता है। इसकी वजह से वह तेज रफ्तार में दौड़ते वक्त भी अपने शिकार पर फोकस बनाए रखता है।

  4. चीते के पंजे घुमावदार और ग्रिप वाले होते हैं। दौड़ते वक्त चीता पंजे की मदद से जमीन पर ग्रिप बनाता है और आगे की ओर आसानी से जंप कर पाता है। इतना ही नहीं अपने पंजे की वजह से ही वो शिकार को कसकर जकड़े रख पाता है। चीते की पूंछ 31 इंच यानी 80 सेंटीमीटर तक लंबी होती है। यह चीते के लिए रडार का काम करती है। अचानक मुड़ने पर बैलेंस बनाने के काम आती है।

  5. चीते का दिल शेर के मुकाबले साढ़े तीन गुना बड़ा होता है। यही वजह है कि दौड़ते वक्त इसे भरपूर ऑक्सीजन मिलती है। यह तेजी से पूरे शरीर में ब्लड को पंप करता है और इसकी मांसपेशियों तक ऑक्सीजन पहुंचाता है।

  6. चीता अपने शिकार का पीछा अक्सर 200-230 फीट यानी 60-70 मीटर के दायरे में ही करता है। एक मिनट तक ही वह अपने शिकार का पीछा करता है। अगर इस दौरान वो उसे नहीं मार पाता तो उसका पीछा करना छोड़ देता है। वो अपने पंजे का इस्तेमाल कर शिकार की पूंछ पकड़कर लटक जाता है। या तो पंजे के जरिए शिकार की हडि्डया तोड़ देता है।

  7. अपने शिकार को पकड़ने के बाद चीता तकरीबन पांच मिनट तक उसकी गर्दन को काटता है ताकि वो मर जाए। हालांकि छोटे शिकार पहली बार में ही मर जाते हैं।

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