Lumpy Virus: बीमारी बनी महामारी... घरेलू उपाय कारगर; जानें लक्षण और बचाव के तरीके

राजस्थान और गुजरात सहित देश के करीब 17 राज्‍यों में पशुओं में फैल चुकी यह लंबी बीमारी महामारी का रूप ले चुकी है। विशेषकर इसका असर गाय, भैंसों पर अधिक हो रहा है। अब तक लाखों पशुओं की जान ले चुकी यह बीमारी एक संक्रामक त्वचा रोग है, जिसका की कोई कारगर इलाज अभी तक ढूंढा नहीं जा सका है।
Lumpy Virus: बीमारी बनी महामारी... घरेलू उपाय कारगर; जानें लक्षण और बचाव के तरीके

पशुओं में तेजी से फैल रही लंपी स्किन बीमारी सबसे पहले अफ्रीका में फैली और बाद में पाकिस्तान के रास्ते भारत में आई। राजस्थान और गुजरात सहित देश के करीब 17 राज्‍यों में पशुओं में फैल चुकी यह बीमारी महामारी का रूप ले चुकी है। इस बीमारी का असर विशेषकर गाय, भैंसों पर अधिक हो रहा है। अब तक इस बीमारी से लाखों की तादाद में पशुओं की मौत हो चुकी है। यह एक संक्रामक रोग है, जिसका की कोई कारगर इलाज अभी तक ढूंढा नहीं जा सका है। हालांकि इसके लक्षण पता चलते ही यदि कुछ सावधानियां बरतते हुए बचाव के देशी प्रयास किए जाएं तो कुछ हद तक इसे फैसलने से रोका जा सकता है। हालांकि सरकार ने एक स्वदेशी वैक्सीन (लम्पी-प्रो वैक-इंड) भी लांच की है, जिसे भी कारगर बताया जा रहा है। फिर भी यह रोग दिन प्रतिदिन पैर पसार रहा है, जिससे पशुपालकों की नींद उड़ी हुई है। आओ बताते हैं इसके लक्षण और बचाव के कुछ पारंपरिक उपाय...

पशु चिकित्‍सा विशेषज्ञ डॉ. ठाकुर ने सुझाए परंपरागत उपाय

कृषि विश्‍वविद्यालय पालमपुर, हिमाचल प्रदेश के पशु चिकित्‍सा विशेषज्ञ डॉ. ठाकुर ने बताया कि गायों और भेंसों में चल रहा यह गांठदार त्‍वचा रोग काफी तेजी से फैल रहा है। अभी तक देश के करीब 17 राज्‍यों में फैल चुकी यह बीमारी महामारी का रूप ले चुकी है। यह एक संक्रामक रोग है, इसका कोई इलाज भी नहीं है लेकिन अगर कोई गाय इससे संक्रमित होती है तो कुछ परंपरागत उपचार किए जा सकते हैं। डॉ. देवेश कहते हैं कि देश के राष्‍ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की ओर से लंपी स्किन रोग के लिए परंपरागत उपचार की विधि बताई गई है। गाय के संक्रमित होने पर अगर इन परंपरागत उपायों को किया जाए तो काफी राहत मिल सकती है। हालांकि इस दौरान ध्‍यान रखें कि बीमारी पशु को स्‍वस्‍थ पशुओं से पूरी तरह दूर रखें। बीमार पशु के पास अन्‍य पशुओं को न जाने दें और न ही इसका जूठा पानी या चारा अन्‍य पशुओं को खाने दें।

ये है परंपरागत उपचार की विधि

पहली विधि

सामग्री- 10 पान के पत्‍ते, 10 ग्राम कालीमिर्च, 10 ग्राम नमक और गुड़ आवश्‍यकतानुसार

  • . इस पूरी सामग्री को पीसकर एक पेस्‍ट बना लें और इसमें आवश्‍यकतानुसार गुड़ मिला लें।

  • . इस मिश्रण को पशु को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पशु को खिलाएं।

  • . पहले दिन इसकी एक खुराक हर तीन घंटे पर पशु को दें।

  • . दूसरे दिन से दूसरे सप्‍ताह तक दिन में 3 खुराक ही खिलाएं।

  • . प्रत्‍येक खुराक ताजा तैयार करें।

दूसरी विधि

घाव पर लगाए जाने वाला मिश्रण ऐसे तैयार करें-

सामग्री- कुम्‍पी का पत्‍ता 1 मुठ्ठी, लहसुन 10 कली, नीम का पत्‍ता 1 मुठ्ठी, मेहंदी का पत्‍ता 1 मुठ्ठी, नारियल या तिल का तेज 500 मिलीलीटर, हल्‍दी पाउडर 20 ग्राम, तुलसी के पत्‍ते 1 मुठ्ठी

बनाने की विधि

पूरी सामग्री को पीसकर इसका पेस्‍ट बना लें। इसके बाद इसमें नारियल या तिल का तेल मिलाकर उबाल लें और ठंडा कर लें।

ऐसे करें उपयोग- अब गाय के घाव को अच्‍छी तरह साफ करने के बाद इस ठंडे मिश्रण को सीधे घाव पर लगाएं। वहीं अगर घाव में कीड़े दिखाई दें तो सबसे पहले नारियल के तेल में कपूर मिलाकर लगाएं या फिर सीताफल की पत्तियों को पीसकर उसका पेस्‍ट बना लें और घाव पर लगा दें।

पशुओं को लगवाएं स्वदेशी वैक्सीन

लंपी स्किन से बचाव के लिए देसी वैक्सीन तैयार की गई है। पशुपालकों को अपने पशुओं को इस बीमारी से बचाव के लिए इसे लगवाना चाहिए। हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पशुओं को लंपी स्किन रोग से बचाव हेतु स्वदेशी वैक्सीन (लम्पी-प्रो वैक-इंड) लांच की है। यह वैक्सीन राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार (हरियाणा) ने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर (बरेली) के सहयोग से बनाई है। बताया जा रहा है कि यह वैक्सीन लंपी स्किन रोग पर शत-प्रतिशत कारगर है। इस वैक्सीन को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत विकसित किया गया है। बता दें कि 2019 में जब से यह बीमारी भारत में आई थी, तब से ही संस्थान के वैज्ञानिक वैक्सीन विकसित करने में जुटे हुए थे।

लंपी का असर गाय, भैंसों पर अधिक

इन दिनों पशुओं में लंपी स्किन बीमारी फैल रही है। इससे अब तक हजारों-लाखों की तादाद में पशुओं की मौत हो चुकी है। राजस्थान और गुजरात सहित देश के 10 राज्यों में पशुओं में ये बीमारी पाई गई है। इस बीमारी का असर विशेषकर गाय, भैंसों पर अधिक हो रहा है। बता दें कि लंपी स्किन इस बीमारी का वायरस संक्रमण तेजी से फैलता है। यदि समय पर इसकी रोकथाम के उपाय नहीं किए जाएं तो इससे पशु की मौत हो सकती है। हालांकि सरकार ने इस बीमारी के लिए एक देसी वैक्सीन भी लांन्च कर दी है। इसके बाद भी पशुपालकों को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि इस बीमारी के संक्रमण को बढऩे से रोका जा सके।

मक्खी, मच्छर के कारण फैलता है संक्रमण

लंपी त्वचा रोग कैप्रीपोक्स वायरस के कारण होता है, जो गायों और भैंसों को संक्रमित करता है। यह बीमारी मुख्य रूप से मक्खी, टिक्स और मच्छर के कारण फैलती है। यह बीमारी नमी वाले तापमान में ज्यादा तेजी से फैलती है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लंपी स्किन बीमारी का प्रकोप अफ्रीका में शुरू हुआ और पाकिस्तान के रास्ते भारत में फैल गया है। इस बीमारी से प्रभावित पशु के शरीर पर फफोले हो जाते हैं और इसमें से पानी रिसने लगता है। इससे बैक्टीरिया को प्रवेश करने का मौका मिल जाता है। ये फफोले घाव का रूप ले लेते हैं। इस पर मक्खियों बैठती है और संक्रमण प्रसार करती है। भारत में इस बीमारी के लक्षण प्रमुख रूप से गाय जैसे दुधारू पशुओं पर देखे जा रहे हैं। इस बीमारी से कई हजार गायों की मौत हो चुकी है। अभी फिलहाल इस बीमारी का प्रकोप सिर्फ गायों में देखा जा रहा है। भैंसों में अभी तक इस बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए हैं।

ये होते हैं लंपी बीमारी के लक्षण

हरियाणा में पशुपालन विभाग की ओर से जारी की गई एडवाइजरी के अनुसार इस बीमारी के जो लक्षण बताए गए हैं, वे इस प्रकार से हैं-

  • इस बीमारी से ग्रसित पशुओं को बुखार आता है। इससे पशु सुस्त रहने लगता है।

  • इस रोग से पीडि़त पशु की आंखों और नाक से स्राव होता है। पशु के मुंह से लार टकती रहती है।

  • इस बीमारी से ग्रसित पशु के शरीर पर गांठ जैसे छाले हो जाते हैं जो फफेले का रूप ले लेते हैं। इससे पशु को काफी परेशानी होती है।

  • इस रोग से ग्रसित पशु की दूध देने की क्षमता कम हो जाती है। इससे पशुपालक को हानि होती है।

  • रोग से ग्रसित की भूख कम हो जाती है और पशु चारा कम खाना शुरू कर देता है।

  • उपरोक्त लक्षण दिखाई देने बाद संक्रमित पशुओं का इलाज शुरू करना चाहिए।

एक जानवर से दूसरे जानवर में यूं फैलता है यह रोग

लंपी स्किन एक संक्रामक बीमारी है जो तेजी के साथ एक जानवर से दूसरे जानवरों में फैलती है। जैसा कि हमने आपको बताया कि इस बीमारी के वाहन मच्छर, मक्खी, जूं जैसे परजीवी होते हैं जो इस वायरस को एक पशु से दूसरे पशु में पहुंचाने का काम करते हैं। इन परजीवियों के काटने के बाद जब वो दूसरे जानवरों को काटते हैं तो उनके खून से वायरस दूसरे जानवरों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। ये बीमारी पशुओं में सीधे संपर्क में आने से भी फैलती है। इसके अलावा दूषित भोजन से भी जानवरों में यह बीमारी फैलती है।

लंपी स्किन रोग से बचाव के लिए उपाय/बचाव के तरीके

लंपी स्किन रोग से बचाव के लिए किसान पशुपालकों को अपने कुछ सावधानी और बचाव के तरीके अपनाने चाहिए जिससे इसके प्रसार को रोका जा सकता है। ये बचाव के उपाय और तरीके इस प्रकार से हैं-

  • पशुओं को लंपी स्किन रोग से पशुओं को इस रोग से बचाने के लिए संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से तत्काल अलग कर देना चाहिए।

  • संक्रमित क्षेत्र में बीमारी फैलाने वाले मक्खी-मच्छर की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। जैसे- पशु बाडे के पास साफ-सफाई रखनी चाहिए।

  • पशुओं के खाने और पीने का पात्र साफ होना चाहिए।

  • पशुओं को ताजा चारा ही खिलाएं। पुराना या गला सड़ा चारा नहीं खिलाएं।

  • संक्रमित पशु के खाने-पीने का पात्र स्वस्थ पशु के पात्र से अलग रखें |

  • संक्रमित क्षेत्र से अन्य क्षेत्रों में पशुओं का आवागमन प्रतिबंधित करें।

  • संक्रमित क्षेत्र के बाजार में पशु बिक्री, पशु प्रदर्शनी, पशु संबंधित खेल आदि पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाएं।

  • संक्रमित पशु का सेंपल लेते समय पीपीई किट सहित सभी सुरक्षात्मक उपाय अपनाएं।

  • संक्रमित पशु प्रक्षेत्र, घर आदि जगहों पर साफ-सफाई, जीवाणु एवं विषाणुनाशक रसायन का प्रयोग करें।

  • रोग के लक्षण दिखने पर तुरंत ही अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय में या पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

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