New Parliament Inauguration: 'क्यों न आप पर जुर्माना लगाएं', राष्ट्रपति से नई संसद के उद्घाटन की मांग वाली याचिका SC ने की खारिज

New Parliament Row: नई संसद का पीएम मोदी से उद्घाटन किए जाने का विपक्ष विरोध कर रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को फटकार लगाई।
New Parliament Inauguration: 'क्यों न आप पर जुर्माना लगाएं', राष्ट्रपति से नई संसद के उद्घाटन की मांग वाली याचिका SC ने की खारिज

New Parliament Inauguration: नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति से करवाने की मांग वाली याचिका पर आज (26 मई) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने नई संसद के पीएम मोदी से उद्घाटन किए जाने के खिलाफ दी गई याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा, 'हम आप पर ऐसी याचिका दाखिल करने के लिए जुर्माना क्यों न लगाएं।' ये याचिका सीआर जयासुकिन नाम के वकील ने दाखिल की थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील देते हुए कहा गया, राष्ट्रपति का संवैधानिक प्रमुख का पद है, जिस वजह से उनके द्वारा ही उद्घाटन होना चाहिए। इस बात पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम मामले में दखल नहीं देना चाहते हैं। यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें कोर्ट दखल दे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कार्यकारी प्रमुख (प्रधानमंत्री) संसद का सदस्य होता है। संवैधानिक प्रमुख (राष्ट्रपति) संसद का हिस्सा होते हैं। हम याचिका को डिसमिस करने जा रहे हैं।

इसके बाद वकील ने याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा, याचिका वापस लेने की इजाजत दी गई तो यह हाईकोर्ट चले जाएंगे। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या आप हाईकोर्ट जाएंगे। वकील की तरफ से कहा गया, नहीं। इस पर जज ने याचिका वापस लेने की इजाजत दी।

तमिलनाडु के वकील ने दाखिल की थी याचिका

याचिकाकर्ता का नाम सी आर जयासुकिन है। पेशे से वकील जयासुकिन तमिलनाडु से हैं। वह लगातार जनहित याचिकाएं दाखिल करते रहते हैं। उनकी इस याचिका में कहा गया था कि देश के संवैधानिक प्रमुख होने के नाते राष्ट्रपति ही प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं। सभी बड़े फैसले भी राष्ट्रपति के नाम पर लिए जाते हैं। राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक हैं। संविधान के अनुच्छेद 79 के मुताबिक राष्ट्रपति संसद का भी अनिवार्य हिस्सा हैं। लोकसभा सचिवालय ने उनसे उद्घाटन न करवाने का जो फैसला लिया है, वह गलत है।

याचिका में कहा गया था कि अनुच्छेद 85 के तहत राष्ट्रपति ही संसद का सत्र बुलाते हैं। अनुच्छेद 87 के तहत उनका संसद में अभिभाषण होता है, जिसमें वह दोनों सदनों को संबोधित करते हैं। संसद से पारित सभी विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही कानून बनते हैं। इसलिए, राष्ट्रपति से ही संसद के नए भवन का उद्घाटन करवाया जाना चाहिए।

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