अब बुजुर्ग और दिव्यांग कर सकेंगे घर से मतदान, चुनाव आयोग ने लिया फैसला

उत्तर प्रदेश में साल 2022 में विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित है। इसकी तैयारियों को परखने के लिए 29 दिसंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त सुरेश चंद्रा लखनऊ पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न सियासी दलों से चुनाव को लेकर सुझाव लिये थे। इसके बाद प्रशासनिक व पुलिस अफसरों के साथ बैठक कर कानून व्यवस्था व सुरक्षा के मुद्दों को लेकर लंबी चर्चा की और स्वास्थ्य विभाग क साथ कोविड संक्रमण को लेकर उपजे हालातों और नियंत्रण पर बैठक की.
अब बुजुर्ग और दिव्यांग कर सकेंगे घर से मतदान, चुनाव आयोग ने लिया फैसला

इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया

यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव 2022 में ऐसा पहली बार होगा. जब देश के बुजुर्ग और दिव्यांग घर रहकर मतदान कर सकेंगे. यह ऐलान यूपी दौरे के अंतिम दिन गुरुवार को योजना भवन में मुख्य चुनाव आयुक्त सुरेश चंद्रा ने की। पत्रकारों से बात करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि पहली बार होगा जब किसी बुजुर्ग या दिव्यांग मतदाता को घर से मतदान करने की सुविधा चुनाव आयोग की और से दी जा रही है साथ ही इस बार विधानसभा चुनाव के मतदान के लिए भी समय बदला गया है. मतदान का समय सुबह 8 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक किया गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि मतदान के समय किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए C-Vigil app का प्रयोग किया जा सकता है। इस एप्लीकेशन के जरिए जनता अनियमितताओं की गोपनीय सूचना दे आयोग तक पहुंचा सकती है.

<div class="paragraphs"><p>फाइल फोटो</p></div>

फाइल फोटो

वोट के लिए घर के दरवाजे पर पहुंचा आयोग -

होने वाले विधानसभा चुनाव में बुजुर्ग और दिव्यांगजन अपने घर से वोट डाल पाएंगे। इसमें 80 साल से ज्यादा उम्र के लोग, दिव्यांगजनों और कोरोना से प्रभावित लोग, जो वोट डालने के लिए पोलिंग बूथ तक नहीं पहुंच सकते, उन्हे यह सुविधा मिलेगी. मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि चुनाव आयोग वोट के लिए इन लोगों के घरों के दरवाजे तक जाएगा.

आयोग की सलाह पर लिया था सरकार ने निर्णय -

चुनाव आयोग की सलाह पर, भारत सरकार ने अक्टूबर 2019 में चुनाव संचालन के नियम, 1961 में थोड़ा बदलाव कर 80 साल और उससे वरिष्ट नागरिकों को बैलेट वोटिंग सिस्टम के जरिए वोट डालने का अधिकार दिया था. पोस्टल बैलेट के जरिए जरूरी फॉर्म को 80 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों और दिव्यांगों के घरों डिलीवर किया जाएगा. यह फॉर्म अपने पोलिंग स्टेशन के तहत बूथ लेवल ऑफिसर डिलीवर करेगा.

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फाइल फोटो

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इस पर अब सवाल उठता है कि 80 से उपर के सभी लोग कैसे घर बैठे वोट डाल सकेंगे. आइए जानते है इसकी पूरी प्रकिया के बारे में.

घर पर बैठकर वोट डालने के लिए इन तरीकों को करें फॉलो -

1. पहली बात कि आपको घर बैठे वोट डालने के लिए फॉर्म 12 D भरना होगा. एक बार आप इस फॉर्म को पूरी तरह भर देते हैं, इसके बाद आप पोलिंग स्टेशन पर होने वाली सामान्य वोटिंग प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे.

2. बूथ लेवल ऑफिसर आवेदकों के घर आएंगे और उसने यह जरूरी फॉर्म भरवाएंगे.

3. चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पांच दिनों के अंदर आपको अफसर को इस फॉर्म को वापस देना होगा.

4. आपको पहले ही उस तारीख की सूचना मिल जाएगी, जब पोलिंग टीम आपके घर आने वाली होगी.

5. टीम आपके घर वोट लेने भी आएगी. वोटिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी.

6. पोस्टल वोटिंग की यह प्रक्रिया चुनाव में मतदान के तीन दिन पहले खत्म हो जाएगी.

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कोरोना से संक्रमित व्यक्ति को भी मिलेगा मत का अधिकार –

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि कोविड संक्रमित व्यक्ति को भी मत करने का अधिकार मिलेगा. उन्होंने बताया कि इसके लिए पीपीई किट पहनकर टीम कोविड संक्रमित के पास जाकर उनका वोट लेगी. मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि चुनाव के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन कराया जायेगा।

गड़बड़ी रोकी जाएग इसके लिए होगी वेब-कास्टिंग -

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि मतदान के दौरान गड़बड़ी रोकने के लिए संवेदनशील पोलिंग बूथों की की वेब-कास्टिंग भी करायी जायेगी। इसके अलावा सीमा चौकियों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जायेगी।

<div class="paragraphs"><p>राजनीतिक पार्टीयां</p></div>

राजनीतिक पार्टीयां

राजनीतिक पार्टीयों पर चुनाव आयोग सख्त -

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि आपराधिक पृष्ठ भूमि वाले लोग अगर इलेक्शन में खड़े होते है तो उन्हे अपने आपराधिक इतिहास के बारे में बताना होगा साथ ही राजनीतिक पार्टी भी अगर किसी आपराधिक इतिहास वाले व्यक्ति को टिकट देती है तो उन्हे भी इसका जवाब देना होगा.

नई लिस्ट के आने के बाद भी जुड़ सकेंगे नाम -

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि इस बार चुनाव में ईसीआई डोर स्टेप की सुविधा भी मिलेगी साथ ही नई लिस्ट आने के बाद भी नये नाम जुड़ सकेंगे. महिला मतदाताओं की सुरक्षा पर भी बात की गई. इस पर चुनाव आयोग ने बताया कि हर क्षेत्र में आदर्श बूथ भी स्थापित होंगे.

<div class="paragraphs"><p>विदेशों में होते है ऑनलाइन चुनाव</p></div>

विदेशों में होते है ऑनलाइन चुनाव

विश्व में इन देशों में है ऑनलाइन चुनाव की व्यवस्था –

ब्रिटेन -
-यहां नागरिकों को अपना ऑनलाइन पंजीकरण करवाना होता है. वोट देने के लिए या तो खुद वहां मौजूद रहना जरूरी है या अपने किसी नजदीकी रिश्तेदार या पहचान के व्यक्ति को अपना मताधिकार देने की सुविधा दी जाती है।
-NRI वोटर के लिए पिछले 15 सालों में देश में मतदाता के रूप में पंजीकरण होना जरूरी
-ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से मतदाता के रूप में पंजीकरण कराया जा सकता है।
-ब्रिटेन में मतदान के समय ना रहने पर पहले जानकारी देना जरुरी है. इसके बाद ही अन्य स्थान से मतदान दिया जा सकता है।

अमेरिका -
-अमेरिका में 18 साल या इससे अधिक उम्र का व्यक्ति कहीं से भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकता है।
-अमेरिकी नागरिक मध्यावधि चुनाव के अलावा राष्ट्रपति, सीनेटर के चुनाव में कहीं से भी वोटिंग कर सकते हैं।
- वो किसी भी राज्य में रहते हुए नया पंजीकरण करवाकर वोट कर सकता है. इसके लिए टैक्स देना होता है.
-मतदान की तारीख से पहले और बाद में भी वोट कर सकता है हालांकि इसके लिए अनुमति जरुरी है.

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कनाडा -
-मतदान के दिन यदि आप अपने गृह क्षेत्र में मौजूद नहीं हैं तो दो तरीके से मतदान कर सकता है.
-पहला, चुनाव से 4 दिन पहले मतदान कर सकते हैं।
-दूसरा, स्पेशल बैलेट के जरिए मतदान करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया -

ऑस्ट्रेलिया का नागरिक मतदान वाले दिन जिस राज्य का निवासी है वहां से ऑनलाइन मतदान कर सकता है।

जर्मनी -

जर्मनी में यदि आप मतदान के समय मौजूद नहीं हैं तो, समय के बाद भी मत कर सकते है. इसके लिए वोटर कार्ड के साथ नगर निगम में आवेदन करना होता है

इन देश में सबसे पहले की गई थी ऑनलाइन वोटिंग -

अक्टूबर 2005 के स्थानीय चुनावों के दौरान पहली बार एस्टोनिया में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का इस्तेमाल किया गया था। एस्टोनिया में ही सबसे पहले ऑनलाइन वोट डाले गए. वही कुछ देश फ्रांस, पनामा और पाकिस्तान जैसे देशों में ऑनलाइन वोट करने का विकल्प विदेश में रहने वाले मतदाताओं के लिए आरक्षित है। फ़्रांस ने 2003 में विदेशों में मतदाताओं के लिए ऑनलाइन वोटिंग के उपयोग का संचालन शुरू किया था. वही न्यू साउथ वेल्स राज्य ने 2011 में ऑनलाइन वोटिंग का संचालन शुरू किया और 2015 में इस विकल्प का विस्तार किया, जब 286,000 मतदाताओं ने इस चैनल का इस्तेमाल किया। इसी तरह की परियोजनाओं को पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में 2017 में दोहराया गया था

इन देशों में अनिवार्य है मतदान –

दुनिया के लगभग 30 देशों में मतदान करना अनिवार्य है. जिनमें दुनियाभर के 196 देशों में से बेल्जियम, स्विटजरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रिया, साइप्रस, पेरू, ग्रीस और बोलीविया में मतदान करना अनिवार्य है।

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