one MLA one Pension: पंजाब में मान का कदम महान! क्या दूसरे दल भी देंगे ध्यान?

राज्यपाल की मंजूरी के साथ ही पंजाब में एक विधायक एक पेंशन योजना लागू हो गई है। सीएम भगवंत मान ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। पंजाब की भगवंत मान सरकार का यह पहल राजनीति के क्षेत्र में मिसाल बनेगी और अन्य राजनीतिक दलों और सरकारों पर भी इसे लेकर दबाव बनेगा।
one MLA one Pension: पंजाब में मान का कदम महान! क्या दूसरे दल भी देंगे ध्यान?

पंजाब की भगवंत मान सरकार ने पंजाब में एक विधायक एक पेंशन योजना लागू कर पूरे देश के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। इस प्रशंसनीय कदम को चाहे लालची राजनेता पंसद करें या न करें, लेकिन इतना तो तय है कि पंजाब सरकार की यह पहल राजनीति के क्षेत्र में मिसाल बनेगी और अन्य राजनीतिक दलों और सरकारों पर भी इसे लेकर दबाव बनेगा। हालांकि जनता और स्वयंसेवी संगठनों की ओर से इस तरह की मांगें पहले से ही की जाती रही हैं, लेकिन उन्हें अब तक किसी राजनीतिक दल ने तवज्जो नहीं दी। पंजाब सरकार के इस कदम के बाद राजनेताओं द्वारा उठाई जा रही इस तरह की सुविधाओं और अन्य कई रियायतों रूपी मलाई पर रोक के लिए अब जनता की आवाज को बल मिलेगा। अभी गुजरात की एक ऐसा राज्य है जहां विधायकों को पेंशन नहीं दी जाती।

पंजाब में विधायकों को अब सिर्फ एक पेंशन

पंजाब में एक विधायक एक पेंशन योजना लागू हो गई है। पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने एक विधायक-एक पेंशन योजना को मंजूरी दे दी है। यह फाइल काफी समय से राज्यपाल के पास अटकी हुई थी। राज्यपाल की मंजूरी के बाद इस संबंध में गजट अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह जानकारी खुद सीएम भगवंत मान ने ट्वीट कर दी। पंजाब की भगवंत मान सरकार इसी वर्ष 1 जुलाई को इस संबंध में विधानसभा में विधेयक लेकर आई थी। इसके बाद इसे मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेज दिया गया था। इस संबंध में अधिसूचना जारी होने के बाद अब राज्य में विधायक को एक ही पेंशन मिलेगी। राज्य में अब तक हर कार्यकाल की अलग-अलग पेंशन मिलती थी। उदाहरण के लिए यदि कोई नेता पांच बार विधायक रहा तो उसे पांच पेंशन मिलती थी, लेकिन अब एक ही पेंशन मिलेगी। अधिसूचना जारी होने के बाद अब विधायकों को उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद 60 हजार रुपये पेंशन और डीए ही मिलेगा।

पंजाब : पहले यह था पूर्व विधायकों की पेंशन का नियम

26 अक्टूबर 2016 में पंजाब में पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन में संशोधन किया गया था। इसके तहत पूर्व विधायकों को उनके पहले कार्यकाल के लिए पेंशन के रूप में 15 हजार रुपए और इसके बाद अगले हर कार्यकाल के लिए 10 हजार रुपए देने का प्रावधान किया गया। इस रकम में पहले 50 फीसदी DA मर्ज होगा और उसके बाद बनने वाली कुल रकम में फिर से 234% महंगाई भत्ता जुड़ जाएगा। इस तरह पूर्व विधायकों को काफी फायदा हुआ, क्योंकि इससे 15000 पेंशन में 50% DA यानी 7,,500 रुपए जुड़ने से 22500 रुपये बने। अब 22,500 में 234 फीसदी DA यानी 52,650 रुपये और जुड़ने से कुल पेंशन 75,150 रुपये बन जाती है। इसी नियम के चलते कई नेताओं को 5 लाख रुपए तक की पेंशन मिलती थी। अकाली दल के प्रमुख प्रकाश सिंह बादल 11 बार विधायक रह चुके हैं। ऐसे में उन्हें 5.76 लाख रुपए की पेंशन मिलती थी। मुख्यमंत्री भगवंत मान की पंजाब के पूर्व विधायकों की मोटी पेंशन रोकने की घोषणा से हर साल पंजाब सरकार के करोड़ों रुपए बचेंगे।

जितनी बार MLA, MP उतनी बार की पेंशन, सुविधाएं अलग

देश में चपरासी से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज तक को केवल एक पेंशन मिलती है, लेकिन सांसद, विधायक और मंत्रियों पर यह नियम लागू नहीं है। यानी, विधायक से यदि कोई सांसद बन जाए तो उसे विधायक की पेंशन के साथ ही लोकसभा सांसद का वेतन और भत्ता भी मिलता है। इसी तरह राज्यसभा सांसद चुने जाने और केंद्रीय मंत्री बन जाने पर मंत्री का वेतन-भत्ता और विधायक-सांसद की पेंशन भी मिलती है, जबकि सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों को एक ही पेंशन मिलती है।

UP, MP, Rajasthan में 8-8 कार्यकाल की पेंशन ले रहे पूर्व विधायक

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूर्व विधायकों की पेंशन के फॉर्मूले में बदलाव की घोषणा की है। अब तक पंजाब में हर कार्यकाल के बाद पेंशन बढ़ती जाती थी। इससे सरकार के खजाने पर काफी बोझ पड़ता था। ऐसे में सवाल उठता है कि देश के अन्य प्रमुख राज्यों में पूर्व विधायकों की पेंशन को लेकर क्या व्यवस्था है। आइए जानते हैं राजस्थान, UP और मध्य प्रदेश में पूर्व विधायकों को कितनी पेंशन मिलती है? इसके अलावा उन्हें और क्या सुविधा मिलती है? साथ ही यह हर कार्यकाल के साथ कैसे बढ़ती जाती है?

MP : हर साल 9,600 रुपए बढ़ जाती है पूर्व विधायकों की पेंशन

मध्य प्रदेश विधानसभा के सेक्शन 6A के तहत, मध्य प्रदेश में पूर्व विधायकों को हर महीने 20 हजार रुपए की पेंशन मिलती है। ये सुविधा हर पूर्व विधायक को मिलती है, फिर चाहे उसने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया हो या नहीं। उपचुनाव जीतकर कार्यकाल पूरा न कर पाने वालों को भी 20 हजार रुपए प्रति माह की पेंशन मिलती है। पांच साल से ज्यादा विधायक रहने वालों की पेंशन में हर साल 800 रुपए हर महीने के हिसाब से पेंशन जुड़ती जाती है। इसका मतलब ये है कि अगर कोई दोबारा विधायक बना और उस दौरान जितने साल विधायक रहा, तो 20 हजार रुपए प्रति माह की पेंशन के अलावा हर साल उसकी पेंशन में 800 रुपए महीने और मिलते हैं, यानी सालाना 9,600 रुपए और उसकी पेंशन में जुड़ जाते हैं। इसका मतलब है कि अगर उसने दो कार्यकाल पूरे किए हैं, तो उसे 24 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलेगी।

यदि किसी विधायक ने 5 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है तो उसे हर महीने 35 हजार रुपए पेंशन के रूप में मिलते हैं। वहीं अगर कोई दूसरी बार विधायक बनता है और अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करता है तो इन पांच साल के दौरान हर महीने के हिसाब से 1,600 रुपए और मिलेंगे यानी दो कार्यकाल पूरा करने के बाद उसे हर महीने 43 हजार रुपए मिलने लगेंगे। वहीं 70 वर्ष की उम्र होने पर इसमें 20% की वृद्धि होगी और 80 वर्ष का होने पर यह 30% बढ़ जाएगी। उप चुनाव में जीते विधायकों को उनकी शपथ लेने की तारीख से विधानसभा खत्म होने के पीरियड को 5 साल मानकर पेंशन दी जाएगी।

फैमिली पेंशन : पूर्व विधायक की मृत्यु की तारीख से उसके पति/पत्नी, या मृतक आश्रित को हर महीने 18 हजार रुपए की फैमिली पेंशन मिलती है। हर साल फैमिली पेंशन में 500 रुपए जुड़ जाते हैं। पूर्व विधायकों को हर महीने 15 हजार रुपए का मेडिकल भत्ता और राज्य सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है।

रेल यात्रा में छूट : पेंशन के हकदार सभी पूर्व विधायकों को अपनी पति/पत्नी या एक अटेंटडेंट के साथ रेलवे के फर्स्ट एसी या सेकेंड एसी कोच में यात्रा के लिए रेलवे के कूपन मिलते हैं। इस रेलवे कूपन से वे राज्य भर में बिना रोक-टोक कहीं भी यात्रा करने को स्वतंत्र होते हैं। राज्य के बाहर हर फाइनेंशियल ईयर में चार हजार किलोमीटर तक की यात्रा मुफ्त होती है।

UP : पूर्व विधायकों को पेंशन के साथ मिलता है जीवनभर मुफ्त रेलवे पास

उत्तर प्रदेश में पूर्व विधायकों को हर महीने 25 हजार रुपए पेंशन मिलती है। 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले विधायकों की पेंशन में हर साल 2 हजार रुपए की बढ़ोतरी होती जाती है। यानी 10 साल विधायक रहने वालों को हर महीने 35 हजार रुपए की पेंशन मिलती है। इसी तरह 15 साल विधायक रहने वालों को हर महीने 45 हजार रुपए की पेंशन मिलती है। 20 साल विधायक रहने वालों को हर महीने 55 हजार रुपए की पेंशन मिलती है।

विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके लोगों, यानी MLA और MLC को मिलने वाले पेंशन और सुविधाएं एक ही होती हैं। पूर्व विधायकों को सालाना एक लाख रुपए का रेल कूपन मिलता है, जिसमें से 50 हजार रुपए निजी वाहन के डीजल, पेट्रोल के लिए कैश लिए जा सकते हैं। इसके अलावा जीवन भर मुफ्त रेलवे पास और मुफ्त मेडिकल सुविधा का लाभ मिलता है। उत्तर प्रदेश में पिछले 9 बार से विधानसभा का चुनाव जीतने वालों में भाजपा के सुरेश खन्ना, सपा के दुर्गा यादव हैं, जबकि आजम खान 10वीं बार जीते हैं। 2016 में अखिलेश यादव सरकार ने उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायकों की पेंशन को 10 हजार रुपए प्रति महीने से बढ़ाकर 25 हजार रुपए प्रति माह किया था।

राजस्थान : कार्यकाल पूरा होते ही पेंशन के हकदार

यदि किसी विधायक ने 5 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है तो उसे हर महीने 35 हजार रुपए पेंशन के रूप में मिलते हैं। वहीं अगर कोई दूसरी बार विधायक बनता है और अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करता है तो इन पांच साल के दौरान हर महीने के हिसाब से 1,600 रुपए और मिलेंगे यानी दो कार्यकाल पूरा करने के बाद उसे हर महीने 43 हजार रुपए मिलने लगेंगे। वहीं 70 वर्ष की उम्र होने पर इसमें 20% की वृद्धि होगी और 80 वर्ष का होने पर यह 30% बढ़ जाएगी। उप चुनाव में जीते विधायकों को उनकी शपथ लेने की तारीख से विधानसभा खत्म होने के पीरियड को 5 साल मानकर पेंशन दी जाएगी।

फैमिली पेंशन : विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले यदि किसी विधायक की मौत हो जाती है तो ऐसे में उसके आश्रितों को हर माह वही पेंशन मिलेगी. जो पूर्व विधायक को मिलती है। वहीं, पूर्व विधायक के निधन के बाद उनकी पत्नी या पति को 17,500 रुपए या उन्हें मिली लास्ट पेंशन का 50%, जो भी ज्यादा हो वह पेंशन के रूप में मिलता है।

मेडिकल सुविधा : सभी पूर्व विधायकों को राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी RGHS के तहत कैशलेस मेडिकल सुविधा मिलती है।

ट्रैवल सुविधा : पूर्व विधायकों को दो फ्री पास मिलते हैं। इससे वे और उनके साथ कोई और व्यक्ति राजस्थान की सरकारी बसों में फ्री यात्रा कर सकते हैं। इसके साथ ही पूर्व विधायक अपने साथ एक व्यक्ति को लेकर किसी फाइनेंशियल ईयर में 1 लाख रुपए तक रेल, फ्लाइट या शिप से किसी भी कैटेगरी में यात्रा कर सकते हैं। यदि पूर्व विधायक एक साल में 70 हजार रुपए ही ट्रैवल पर खर्च कर पाते हैं तो ऐसे बचा हुआ पैसा अगले साल के ट्रैवल भत्ते में जुड़ जाएगा। इसके अलावा भी पूर्व विधायकों को कई और सुविधाएं मिलती हैं।

हिमाचल : जीत का सर्टिफिकेट मिलते ही विधायक पेंशन के हकदार

प्रदेश में विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित हाेने के बाद जैसे ही विधायक बनने का सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, वह पेंशन के हकदार बन जाते हैं। यहां पर विधायक काे एक टर्म यानी 5 साल पूरा होने पर हर महीने 36,000 रुपए पेंशन मिलती है। इसके बाद एक और टर्म पूरा करने पर विधायक काे 5,000 रुपए अतिरिक्त पेंशन दी जाती है यानी एक साल का एक हजार रुपए ज्यादा मिलता है। प्रदेश में इस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्या स्टोक्स, कौल सिंह ठाकुर और गंगूराम मुसाफिर सहित कई पूर्व विधायक है जिन्हें अधिक पेंशन मिलती है। विधानसभा से जुटाई गई जानकारी के अनुसार विधायकों काे पेंशन बेसिक टर्म 65,000 रुपए DA के साथ मिलता है।

झारखंड : झारखंड में एक टर्म के विधायक को 40 हजार रुपए प्रति माह पेंशन राशि निर्धारित है। एक बार 40 हजार रुपए का पेंशन निर्धारित होते ही प्रति वर्ष उसमें केवल 4 हजार रुपए की वृद्धि होती जाएगी, लेकिन पेंशन की अधिकतम राशि एक लाख रुपए से अधिक नहीं होगी। दर्जन भर पूर्व विधायक हैं, जिन्हें एक लाख रुपए प्रति माह पेंशन मिल रही है।

गुजरात : पेंशन नहीं देता गुजरात, सरकारी हॉस्पिटल के मानदंड के अनुसार इलाज के बिल के भुगतान, राज्य परिवहन में मुफ्त यात्रा की सुविधा।

सांसदों को कितनी मिलती है पेंशन?

अब बात करते हैं कि आखिर सासंदों को पेंशन कितनी मिलती है. दरअसल, कुछ साल पहले 2010 में सासंदों के कानून में संशोशन किया गया था. इसके अनुसार, सासंदों को हर महीने बीस हजार रुपये देने का प्रावधान है। ये पेंशन हर किसी को दी जाएगी, चाहे कार्यकाल पूरा भी ना हो। अगर कोई व्यक्ति पांच साल से अधिक सालों की अवधि तक सेवा करता है तो उसे पांच साल की अवधि के बाद हर साल में हर महीने 1500 रुपये के हिसाब से अतिरिक्त पेंशन दी जाती है। पेंशन की राशि निर्धारित करने के लिए सदस्य के रुप में पूरी की गई अवधि की गणना के लिए नौ महीने या उससे अधिक को एक पूरा साल माना जाता है। साथ ही कोई पूर्व सांसद केंद्र सरकार, राज्य सरकार अथवा किसी अन्य सोर्स से होने वाले पेंशन का भी हकदार होगा. इसके अलावा सांसद के परिवार को भी कुटुंब पेंशन के रूप में मौत के बाद भी पेंशन मिलती है, इसलिए एक बार सांसद बनने के बाद सांसद और उसके परिवार को लंबे समय तक पेंशन मिलती है।

संसद सदस्यों के लिए सुख-सुविधाएं

संसद के लिए निर्वाचित होने के पश्चात् संसद सदस्य कतिपय सुख-सुविधाओं के हकदार हो जाते हैं। ये सुख सुविधाएं संसद सदस्यों को इस दृष्टि से प्रदान की जाती हैं कि वे संसद सदस्य के रूप में अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से निपटा सकें। मोटे तौर पर संसद सदस्यों को प्रदान की गई सुख-सुविधाएं वेतन तथा भत्ते, यात्रा सुविधा, चकित्सा सुविधाएं, आवास, टेलीफोन आदि से संबंधित होती हैं। ये समस्त सुख-सुविधाएं संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा शासित होती हैं। भत्तों समेत तमाम सुविधाएं इतनी होती हैं कि उन्हें पढ़कर हम माथा पकड़ लेंगे।

भारत में MLA, MP खुद करते हैं अपनी सैलरी बढ़ाने पर फैसला

दुनिया के अनेक देशों में जनप्रतिनिधियों को वेतन और सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, इसे वह खुद नहीं तय करते हैं बल्कि इसे तय करने का अधिकार अलग संस्थाओं को रहता है। इसके लिए उम्र और सेवा की सीमा तय है। वहीं, ब्रिटेन जैसे देश में इसके लिए आयोग का गठन किया गया हैं। हालांकि, भारत में सांसद व विधायकों की सुविधाओं के संबंध में क्रमश: संसद व विधानसभाएं ही फैसला लेती हैं।

कौन-कितनी पेंशन ले रहा है, इसका रिकॉर्ड ही नहीं

एडवोकेट पूर्वा जैन का कहना है कि उन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा सचिवालय के साथ ही पेंशनर्स वेलफेयर डिपार्टमेंट से सूचना के अधिकार कानून के तहत सांसद और विधायकों के वेतन-भत्ते, पेंशन को लेकर जानकारी मांगी थी। उन्होंने सवाल किए थे कि एक सांसद या विधायक कितनी पेंशन ले सकता है? सांसद-विधायकों को वर्तमान में कितनी पेंशन राशि मिलती है? क्या ऐसा कोई कानून या प्रावधान है जिसके तहत नेता एक से अधिक पेंशन या पेंशन और वेतन दोनों ले सकते हैं? क्या पेंशन का हकदार होने के लिए कोई समय सीमा तय है? इन सवालों का उन्हें जो जवाब मिला, वह चौंकाने वाला है।

यानी, माननीयों के लिए शासकीय सेवकों की तर्ज पर एक वेतन-एक पेंशन का नियम लागू नहीं है। आश्चर्य की बात तो यह है कि कोई नेता कितनी बार कौन सा चुनाव जीता और कितनी पेंशन ले रहा है, इसका भी रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है। यानी, कोई नेता पूर्व सांसद, विधायक की हैसियत से पेंशन लेने के दौरान मंत्री बन जाता है तो उसे मंत्री पद का वेतन-भत्ता भी दिया जाता है।

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