
चुनाव आयोग (Election Commission) ने गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) के कार्यक्रम की घोषणा कर दी। 18 जुलाई को मतदान होगा और 21 जुलाई को रिजल्ट आएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मतदान के दौरान पालन किए जाने वाली प्रक्रियाओं की जानकारी दी।
राजीव कुमार ने बताया कि मतदाताओं को वोट डालते समय सिर्फ चुनाव आयोग द्वारा दिए गए पेन का ही इस्तेमाल करना होगा। सभी मतदान केंद्र पर आयोग द्वारा मतदाताओं को पेन दिया जाएगा। यदि किसी ने किसी और पेन का इस्तेमाल किया तो उसका वोट रद्द हो जाएगा। 776 सांसद और 4033 विधायक वोट देंगे। मतदान पूरी तरह से गुप्त होगा। कोई भी पार्टी अपने सांसदों और विधायकों के लिए व्हिप जारी नहीं कर सकती।
वरीयता अधिकतम उतनी लिखनी है, जितनी उम्मीदवारों की संख्या है। यदि किसी ने उम्मीदवारों को दूसरी और तीसरी वरियता दी और पहली वरीयता किसी भी प्रत्याशी को नहीं दी तो उसका वोट रद्द हो जाएगा। हर प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग सांसद या विधायक के चुनाव से अलग होती है। सांसद या विधायक को वोट देते समय मतदाता सिर्फ एक प्रत्याशी को चुनता है। राष्ट्रपति चुनाव में वोटर प्रत्याशियों को अपने पसंद के क्रम के अनुसार चुनता है। यदि तीन प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं तो मतदाता अपने सबसे पसंदीदा उम्मीदवार को पहला नंबर देगा। इसके बाद वह अपनी पसंद के अनुसार बाकि उम्मीदवारों को दूसरे और तीसरे नंबर रखेगा।
भारत के राष्ट्रपति पद की रेस में हिस्सा लेने वाले हर केंडिडेट को अपना नामांकन दाखिल करना होता है। राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को इसके लिए 15000 रुपये से अधिक जमा करने होते हैं और 50 प्रस्तावकों और 50 समर्थकों की एक हस्ताक्षर की हुई सूची जमा करनी होती है। प्रस्तावक और समर्थक राष्ट्रपति चुनाव 2022 में मतदान करने के योग्य निर्वाचकों में से कोई भी हो सकता है।
राष्ट्रपति चुनाव में सभी निर्वाचित विधायक अपने-अपने राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में तो वहीं सभी निर्वाचित सांसद राज्यसभा और लोकसभा में वोट करते हैं। वोट डालने के लिए निर्वाचित सांसदों और निर्वाचित विधायकों को मतपत्र दिए जाते हैं। सांसदों को हरे रंग और विधायकों को गुलाबी रंग का मतपत्र दिया जाता है। उन्हें विशेष पेन भी दिए जाते हैं, जिसका उपयोग वे अपने वोट रिकॉर्ड करने के लिए कर सकते हैं।
प्रत्येक मतपत्र में उन सभी उम्मीदवारों के नाम होते हैं जो राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे हैं. निर्वाचक प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपनी वरीयता को इंगित करता है. जिस उम्मीदवार को वे राष्ट्रपति के रूप में सबसे अधिक पसंद करते हैं, उनके लिए '1' नंबर चुनते हैं जबकि उस उम्मीदवार के लिए '2', जो उनकी दूसरी वरीयता है और इसी तरह अन्य वरियता का चुनाव भी निर्वाचक करता है।
हालांकि जो भी निर्वाचक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के लिए वरीयताएं चिह्नित करता है उसके लिए यह जरूरी नहीं है कि वो सभी उम्मीदवारों का चयन करे। वो केवल पहली वरीयता को ही चिह्नित कर सकता है।
वोटिंग के बाद विधायकों के मतपत्रों को राज्यवार इकट्ठा कर प्रत्येक उम्मीदवार की ट्रे में डाल दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर पिछले राष्ट्रपति चुनाव की बात करें तो, यदि उत्तर प्रदेश के किसी विधायक ने राम नाथ कोविंद को अपनी पहली वरीयता के रूप में चिह्नित किया था, तो विधायक का मतपत्र कोविंद की ट्रे में गया होगा।
फिर इसी प्रकार संसद सदस्यों के मतपत्रों का वितरण किया जाता है। उदाहरण के लिए, जिन सांसद ने पिछले चुनाव में मीरा कुमार को अपनी पहली वरीयता के रूप में चिह्नित किया होगा उन सांसदों के सभी मतपत्र कुमार की ट्रे में गए होंगे।
राष्ट्रपति चुनाव में वोट देने योग्य व्यक्ति केवल एक ही उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव या समर्थन कर सकता है। चुनाव आयोग द्वारा 1952, 1957, 1962, 1967 और 1969 (भारत के तीसरे राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की कार्यालय में मृत्यु के बाद एक प्रारंभिक चुनाव) के चुनावों के बाद 1974 में मतदाताओं को प्रस्तावित करने और एक व्यक्ति की उम्मीदवारी का प्रस्ताव देने का यह नियम अपनाया गया था।
वोट देने वाले सांसदों और विधायकों के वोट की महत्ता यानि वेटेज अलग-अलग होता है। दो राज्यों के विधायकों के वोटों का वेटेज भी भिन्न होता है।
उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में 402 विधानसभा सीटें हैं। यहां की जनसंख्या साल 1971 की जनगणना के मुताबिक 83849905 है। इस हिसाब से यहां एक विधायक के मतपत्र का मूल्य 208 है। किसी भी सांसद (राज्यसभा या लोकसभा से) के मतपत्र का मूल्य 708 है।