Twin Tower: इमारत गिराई पर दोषियों पर कब होगी कार्रवाई? गहरी है 'भ्रष्ट तंत्र' की खाई

नोएडा के सेक्टर 93ए में स्थित सुपरटेक ट्विन टॉवर जमींदोज हो चुके हैं। रविवार को इस 32 मंजिला इमारत को तो महज 8 सेकेंड में ढहा दिया गया, लेकिन वर्षों-वर्षों से गहरा रही भ्रष्टाचार की खाई को पाटने का काम कब शुरू होगा? नियम ताक पर रखकर इजाजत देने वाले दोषी अफसरों को सजा कब मिलेगी? यह बड़ा प्रश्न है।
Twin Tower: इमारत गिराई पर दोषियों पर कब होगी कार्रवाई? गहरी है 'भ्रष्ट तंत्र' की खाई

भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा हुआ नोएडा का ट्विन टॉवर तो आखिर रविवार, 28 अगस्त को ढहा दिया गया, लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है कि जिस भ्रष्ट गठजोड़ की वजह से यह गगनचुंबी इमारत खड़ी हुई, उन जिम्मेदार लोगों को सजा कब मिलेगी और मिलेगी भी या नहीं? अथॉरिटी में बैठे जिन अधिकारियों ने तमाम नियमों को दरकिनार कर नक्शे पास किए, बिल्डर को एनओसी दी, जब तक उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक लोगों में यह भरोसा जगाना मुश्किल है कि अब आगे ऐसा नहीं होगा। हालांकि इसे गिराने पर आया खर्च तो निर्माणकर्ताओं से वसूलने की बात कही जा रही है, पर सवाल तो यह भी है कि इस पर झोंकी गई सरकारी मशीनरी और समय की बर्बादी का खमियाजा कौन भुगतेगा? स्थानीय लोगों को हुई असुविधा और नुकसान हुआ सो अलग।

एक अन्य सवाल यह भी है कि क्या ऐसा कोई सिस्टम तैयार किया गया है जहां घर खरीदारों के हितों का ख्याल रखा गया हो? घर खरीदारों के लिए आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट आलोक कुमार का कहना है कि रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी रेरा के गठन के बाद बायर्स के हक तो काफी हद तक सुरक्षित हुए, लेकिन उसमें कहीं भी अवैध निर्माण पर शिकायत को लेकर कोई प्रावधान नहीं है।

'मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ तो हक में फैसला कैसे'?

ऐसी शिकायतों के लिए बायर के पास संबंधित डिवेलपमेंट अथॉरिटी के पास जाने का ही ऑप्शन है जहां एक एन्फोर्समेंट टीम इसकी जांच करती है। लेकिन जो अधिकारी इस मिलीभगत में शामिल हों, उनकी शिकायत उन्हीं के दफ्तर में करेंगे और जांच भी वही करेंगे तो इंसाफ कैसे मिलेगा। यानी जब मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ होगा तो वो मेरे हक में फैसला कैसे करेगा। इसलिए अथॉरिटी से कोई अलग बॉडी बनाई जाए जहां लोग अपनी शिकायत लेकर जा सकें क्योंकि अभी अगर अथॉरिटी सुनवाई नहीं करती तो सिर्फ हाई कोर्ट जाने का ही ऑप्शन बचता है।

ट्विन टॉवर : यूं खड़ी हुई भ्रष्टाचार की इमारत

कहानी 23 नंवबर 2004 से शुरू होती है। जब नोएडा अथॉरिटी ने सेक्टर-93ए स्थित प्लॉट नंबर-4 को एमराल्ड कोर्ट के लिए आवंटित किया। आवंटन के साथ ग्राउंड फ्लोर समेत 9 मंजिल के 14 टॉवर बनाने की अनुमति मिली। जमीन आवंटन के दो साल बाद 29 दिसंबर 2006 को अनुमति में संशोधन कर दिया गया। नोएडा अथॉरिटी ने संशोधन करके सुपरटेक को 9 की जगह 11 मंजिल तक फ्लैट बनाने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही टॉवरों की संख्या भी बढ़ाई गई। पहले 15 और फिर इनकी संख्या 16 हुई। 2009 में इसमें फिर से इजाफा किया गया। 26 नवंबर 2009 को नोएडा अथॉरिटी ने फिर से 17 टॉवर बनाने का नक्शा पास कर दिया। इसके बाद भी ये अनुमति लगातार बढ़ती गई।

और कहां-कहां हुई नियमों की अनदेखी?

सुपरटेक को 13.5 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। परियोजना का 90 फीसदी यानी करीब 12 एकड़ हिस्से पर 2009 में ही निर्माण पूरा कर लिया गया था। 10 फीसदी हिस्से को ग्रीन जोन दिखाया गया। 2011 आते-आते दो नए टावरों के बनने की खबरें आने लगीं। 12 एकड़ में जितना निर्माण किया गया, उतना एफएआर का खेल खेलकर दो गगनचुंबी इमारतों के जरिये 1.6 एकड़ में ही करने का काम तेजी से जारी था। अंदाजा लगाया जा सकता है कि 12 एकड़ में 900 परिवार रह रहे हैं, इतने ही परिवार 1.6 एकड़ में बसाने की तैयारी थी।

फ्लैट बायर्स ने 2009 से शुरू की लड़ाई

फ्लैट बायर्स ने 2009 में आरडब्ल्यू बनाया। इसी आरडब्ल्यू ने सुपरटेक के खिलाफ कानूनी लड़ाई की शुरुआत की। ट्विन टॉवर के अवैध निर्माण को लेकर आरडब्ल्यू ने पहले नोएडा अथॉरिटी मे गुहार लगाई। अथॉरिटी में कोई सुनवाई नहीं होने पर आरडब्ल्यू इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। 2014 में हाईकोर्ट ने ट्विन टॉवर तोड़ने का आदेश जारी किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुपरटेक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट में सात साल चली लड़ाई के बाद 31 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के अंदर ट्विन टॉवर को गिराने का आदेश दिया।

34 कंपनियां, 12 शहरों में अरबों के प्रोजेक्ट

एमराल्ड कोर्ट परियोजना में बने ट्विन टॉवरों को बनाने वाली कंपनी सुपरटेक लिमिटेड है। यह एक गैर-सरकारी कंपनी है। इस कंपनी को 7 दिसंबर, 1995 में निगमित किया गया था। सुपरटेक के फाउंडर आरके अरोड़ा हैं। उन्होंने अपनी 34 कंपनियां खड़ी की हैं। 1999 में आरके अरोड़ा की पत्नी संगीता अरोड़ा ने दूसरी कंपनी सुपरटेक बिल्डर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी शुरू की। सुपरटेक ने अब तक नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के 12 शहरों में रियल स्टेट प्रोजेक्ट लांच किए हैं। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने इसी साल कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया। कंपनी पर अभी करीब 400 करोड़ का कर्ज बकाया है।

रोक के लिए जरूरी: प्लान में न हो बदलाव, दोषियों को मिले कड़ी सजा

लंबी कानूनी लड़ाई की वजह से बहुत से लोग कोर्ट जाते नहीं और इसी का फायदा ये लॉबी उठाती आई हैं। एक्टिविस्ट आलोक कुमार का कहना है कि अवैध निर्माण का सारा खेल परचेजेबल एफएआर के प्रावधान से शुरू हुआ। जो फ्लोर एरिया रेशो पास हुआ, बिल्डर उससे ज्यादा निर्माण कर लेता था और अथॉरिटी से अतिरिक्त एफएआर खरीद लेता था। यह बिल्डरों को प्रोत्साहित करने जैसा है कि पहले गलत काम कर लो, फिर अतिरिक्त पैसा देकर उसे पास करवा लो। कानून की इन कमियों को दूर करके ही गलत होने से रोका जा सकता है, यानी एक बार जो प्लान सैंक्शन हो, वही फाइनल हो, उसमें बार-बार बदलाव की इजाजत न दी जाए। जल्द और कड़ी कार्रवाई हो तो लोग डरेंगे, वरना नहीं। इस खेल में नीचे से ऊपर तक मिलीभगत होती है, उन सबको कठघरे में खड़ा कर जल्द सजा दिलवाना जरूरी है।

और 32 मंजिला इमारत महज 8 सेकेंड ध्वस्त

नोएडा के सेक्टर 93ए में स्थित सुपरटेक ट्विन टॉवर जमींदोज हो चुके हैं। रविवार दोपहर ठीक 2:30 बजे तेज धमाके के साथ 32 मंजिला पूरी इमारत मिट्टी में मिल गई। इस गगनचुंबी इमारत को ढहने में महज 8 सेकेंड का वक्त लगा। 200 करोड़ से ज्यादा की लागत में बने ट्विन टॉवर्स को गिराने में करीब 20 करोड़ का खर्च आने की बात कही जा रही है। यह रकम भी बिल्डर्स से ही वसूली जाएगी। मौजूदा समय में इमारत की कीमत करीब 800 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

ब्लॉस्ट के लिए सरकारी कसरत

  • इंजीनियरों ने ट्विन टॉवर का ब्लूप्रिंट निकाला।

  • ब्लॉस्ट की प्लानिंग और इसके असर का पूरा एनालिसिस किया गया।

  • बिल्डिंग के पिलर्स और दीवारों पर 45 मिलीमीटर के 9642 गड््ढ़े बनाए गए।

  • दीवारों और फर्श को जियोटेक्सटाइल कपड़ों से ढंका गया, ताकि मलबा कम बिखरे।

  • गैस पाइप लाइन को बचाने के लिए स्टील प्लेट्स बछाई गई।

  • रिहाइशी इलाके की तरफ एक कंटेनर वॉल बनाई गई।

  • पिलर्स और दीवारों में बनाए गए गड्ढों में करीब 3700 किलो विस्फोटक लगाए गए।

इतनी झोंकनी पड़ी सरकारी मशीनरी

  • 560 पुलिसकर्मी तैनात किए गए।

  • 100 जवान रिजर्व फोर्स के रहे तैनात।

  • 4 क्विक रिस्पॉन्स टीम समेत NDRF की टीम भी रही मौजूद।

  • 15 स्मॉग गन लगाई गई धूल हटाने के लिए।

  • 6 AQI मशीनें लगाई गईं पॉल्यूशन मापने के लिए।

  • 10 जगह बैरिकेडिंग की गई।

  • 6 अस्पतालों को रखा गया स्टैंड पाई पर।

  • 7000 लोगों को डिमोलिशन एरिया से हटाया गया।

सुपरटेक का बयान, फ्लैट देने के लिए हम प्रतिबद्ध

ट्विन टॉवर मामले पर सुपरटेक का बयान आया है। बयान में कहा गया है कि प्राधिकरण को पूरा भुगतान करने के बाद हमने टॉवर का निर्माण किया था। हालांकि, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने तकनीकी आधार पर निर्माण को संतोषजनक नहीं पाया है और दोनों टॉवरों को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए। हम सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं। हमने करीब 70 हजार से अधिक लोगों फ्लैट्स तैयार करके दे दिए हैं। बाकी लोगों को भी निर्धारित समय में फ्लैट देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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