बांग्लादेश को भी हिंदुमुक्त बनाने की गहरी साजिश, हिन्दुओं पर हो रहे हमलों पर क्यों खामोश हैं अंतरराष्ट्रीय संगठन?

बांग्लादेश में हाल ही में हिन्दुओं पर हमले हुए हैं। ये पहली बार नहीं हुआ है बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले होते रहते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस पर कोई सवाल नहीं उठाता।
बांग्लादेश को भी हिंदुमुक्त बनाने की गहरी साजिश, हिन्दुओं पर हो रहे हमलों पर क्यों खामोश हैं अंतरराष्ट्रीय संगठन?

बांग्लादेश में हाल ही में नड़ाइल इलाके में हिन्दुओं पर हमला किया गया था। हिन्दु अल्पसंख्यकों के घरों पर आग लगा दी गई। माना कि बांग्लादेश में हिन्दु अल्पसंख्यक हैं लेकिन भारत में तो हिन्दु बहुसंख्यक हैं। भारत में भी हिन्दुओं के गले काटे जा रहे है। हिन्दु अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक, हमले हिन्दुओं पर ही हो रहे हैं।

हाल की घटनाओं को देखकर समझ आ रहा है कि चौतरफा टारगेट हिन्दुओं को बनाया जा रहा है। मजहब की आग में लगातार हिंदुओं को जलाया जा रहा है।

लगातार पिछले कई महीनों से ये घटनाएं सामने आ रही हैं लेकिन मजाल है UNO और दुनियाभर के मानवाधिकार आयोगों की नींद टूट जाए और वो हिन्दुओं की तकलीफ को दुनिया के सामने रख दें और ये ही आयोग एक मुस्लिम स्टैंड अप कॉमेडियन के शो कैन्सिल होने पर पूरी दुनिया में भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होने की दुहाई दे रहे थे। BBC बिठाकर उस इन्सान का इंटरव्यू ले रही थी। ये ही दुनिया भर के आयोग और बड़े बड़े न्यूज चैनल हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के मामले में चुप्पी क्यों साध लेते हैं ?

आज की इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की कहानी

बांग्लादेश में दो हफ्ते पहले ही हुआ है हिंदुओं पर हमला

बांग्लादेश में हिंदुओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल चटर्जी का कहना हैं कि हिंदुओं के घरों और दुकानों को लूट लिया गया।

महिलाओं के गहने छीन लिए गए और उनकी अस्मत पर हमला किया गया। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की ये कोई पहली या अकेली घटना नहीं है।

साल 2022 के मार्च में भीड़ ने एक हिंदू मंदिर पर हमला किया था। अब क्योंकि बांग्लादेशी सरकार को खुद को धर्मनिरपेक्ष साबित करना था तो इसे प्रॉपर्टी से जुड़ा विवाद बताकर पीछा छुड़ा लिया।

पिछले कुछ सालों में हिन्दुओं पर बांग्लादेश में हुए हमले

जैसा की हम पहले भी कह चुके हैं, हिंदुओं पर ये पहला या अकेला हमला नहीं था। अक्टूबर 2021 में कई जिलों में हिंदुओं पर हमले हुए थे। दुर्गा पूजा के दौरान हुए इन हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों घायल हुए थे। मुसलमानों की भीड़ ने कई शहरों में दुर्गा पंडालों पर हमले किए। ये हमले भी कथित तौर पर कुरान के अपमान के आरोप के बाद हुए थे।

इससे पहले साल 2016 में नसीरनगर में हिंदुओं पर बड़ा हमला हुआ था। हमलों में 19 मंदिर तोड़ दिए गए थे और 300 से अधिक हिंदू घरों को निशाना बनाया गया था। इस हमले में सौ से अधिक लोग घायल हुए थे। हमले का कारण – विवादित फेसबुक पोस्ट। साल 2013, हिंदुओं पर योजनाबद्ध हमले हुए और सैकड़ों घरों को निशाना बनाया गया था।

बांग्लादेश में मानवाधिकारों और कानूनी अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन आईन ओ सालिश केंद्र के अनुसार बांग्लादेश में साल 2013 से 2022 के बीच हिंदुओं के 1642 घरों और 456 दुकानों पर हमला किया गया।

इन सब हमलों से साफ दिख रहा है कि मुसलमानों का मिशन कुलमिलाकर हिंंदूमुक्त बांग्लादेश बनाना है। कहीं कोई गलत है तो वो है हिंदू। क्योंकि हिंदू सहिष्णु है, हिंदुओं ने हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम को मानते हुए पूरे विश्व को अपना परिवार माना है और हमेशा से भाईचारे का संदेश दिया है लेकिन हर बार हिंदुओं की ही पीठ में छुरा घोंपा गया है।

चटर्जी के मुताबिक अब हिंदुओं को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा के अलग पहलू भी सामने आ रहे हैं। वो कहते हैं कि पहले चुनाव से पहले और बाद में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले होते थे।

हालांकि, पिछले दस सालों से प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान ऐसा नहीं हो रहा था। अब हाल के दिनों में सांप्रदायिक तत्व फिर से काफी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने फिर से हिंदुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

खतरे में है हिंदुओं का अस्तित्व

बांग्लादेश के मानवाधिकार कार्यकर्ता और अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद के राष्ट्रीय महासचिव राणा दास गुप्ता का मानना है बांग्लादेश में हिंदुओं का अस्तित्व खतरे में है।

राणा दासगुप्ता के अनुसार 'बांग्लादेश में हिंदुओं का अस्तित्व खतरे में हैं क्योंकि उनके घरों, मंदिरों, व्यापारिक ठिकानों पर लगातार हमले हो रहे हैं। उनकी जवान लड़कियों का अपहरण किया जा रहा है। हिंदू डरे हुए हैं। उनके सामने अपनी जमीन और घरों को बचाने की चुनौती है। उनके मंदिर और महिलाएं खतरे में हैं।'

बांग्लादेश में हाल के सालों में हिंदुओं पर हमलों के पीछे सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद या धार्मिक पुस्तक के कथित अपमान से खड़े हुए विवाद रहे हैं, लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ता मानते हैं कि देश के सक्रिय कट्टरवादी योजनाबद्ध तरीके से हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं।

राणा दास गुप्ता के अनुसार कट्टरवादी समूह और पार्टियां ही हमलों में शामिल हैं। ये वही ताकतें हैं जिन्होंने 1971 में पाकिस्तान का समर्थन किया था। ये अब सत्ताधारी आवामी लीग में भी घुस गए हैं।

बांग्लादेशः 30% से 9.6% रह गई है हिंदू आबादी

लगातार हिन्दुओं पर हो रहे हमलों का अंजाम ये हुआ है पिछले 50 साल में बांग्लादेश में हिन्दुओं की आबादी एक तिहाई से कम रह गई है। शायद यहीं वहां के कट्टरपंथियों के मंसूबे थे जिनमें वो सफल होते दिखाई दे रहे हैं।

आंकड़े देखें तो आजादी के समय बांग्लादेश में हिंदू आबादी 29.7 प्रतिशत के आसपास थी जो 2011 की जनगणना के मुताबिक मात्र 9.6 प्रतिशत रह गई है। आज तो और भी कम हो गई है।

ये वही बांग्लादेश है जिसको भारत की सेना ने अपनी जान की बाजी लगाते हुए पाकिस्तान के अत्याचारों से मुक्त कराया था और इसे पूर्वी पाकिस्तान से बांग्लादेश की शक्ल में ढाला था।

ये बांग्लादेश भारत से दोस्ती की कसमें खाता है लेकिन अपने देश में हिन्दू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा तक नहीं कर पा रहा है।

सुरक्षा तो दूर की बात है हमला करने वाले अपराधियों को सजा तक नहीं दी जा रही है। इस्लामी कट्टरपंथी चाहते हैं कि देश में हिन्दू आबादी खत्म कर के इसे तालिबान की राह पर ले जाया जाए।

“हिंदुओं को ही बनाया जा रहा है निशाना”

ऐसा नहीं है कि बांग्लादेश की इन गतिविधियों को अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषक देख नही पा रहे। लेकिन बांग्लादेश की सरकार को हिंदुओं की जानों से ज्यादा अपने वोटबैंक की परवाह है।

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि वोटबैंक के लिए बांग्लादेश सरकार इन इस्लाम कट्टरपंथियों पर कोई एक्शन तक नहीं ले रही है।

मशहूर किताब जिहाद वॉच के लेखक और इस्लामी चरमपंथ की गतिविधियों पर गौर से नजर रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय एनालाइजर रॉबर्ट स्पेंसर इस मामले पर गहरी निगाह रखे हुए हैं।

उन्होंने कहा है कि 'ये साफ है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले धर्म से प्रेरित हैं। यहां के मुसलमान हिंदुओं को देश से हमेशा के लिए भगा देना चाहते हैं। वो ये मानते हैं कि इस जमीन पर उनका अधिकार है और इस्लाम के वर्चस्व को बढ़ाना उनकी जिम्मेदारी है। इस बात का सबूत ये है कि मुसलमानों का वहां कभी भी इस तरह से उत्पीड़न नहीं हुआ है।'

बांग्लादेशः संविधान में धर्मनिरपेक्षता नाम मात्र के लिए

बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक इस्लाम देश का अधिकारिक धर्म है हालांकि संविधान में धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत भी है। जब बांग्लादेश का एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उदय हुआ, तब 4 नवंबर 1972 को लागू देश के संविधान में धर्म से जुड़ा कुछ नहीं था।

अब संविधान की प्रस्तावना के ऊपर ही बिस्मिल्लाह लिखा है और 1988 के बाद से इस्लाम राज्य का धर्म है। हालांकि, अनुच्छेद 12 के तहत धर्मनिरपेक्षता को राज्य का सिद्धांत घोषित किया गया है। संविधान में भले ही धर्मनिरपेक्षता हो, लेकिन वास्तव में ये कहीं नहीं हैं। सभी राजनीतिक दल कट्टरवादी ताकतों को रिझाने की कोशिश करते हैं।'

भारत में भी इस्लामी कट्टरवादी बना रहे हिंदुओं को निशाना

भारत में बहुसंख्यक होने के बावजूद हिंदुओं को लगातार पिछले कई दिनों से टारगेट बनाया जा रहा है। राजस्थान के करौली में हिंदू रैली पर हुए हमले के बाद हिंदुओं की लगभग 17 रैलियों पर हमले हुए।

नुपुर शर्मा के एक बयान पर मुस्लिम समाज के लोगों ने पूरे देश में आग लगा दी। करीब 40 शहरों को दंगो के हवाले कर दिया। कहने लगे कि नुपुर ने उनके पैगंबर का अपमान किया है। और जब दंगाइयों पर दंडात्मक कार्रवाई की गई जिसमें कुछ इस्लाम को बचाने के लिए आसमां से उतरे फरिश्तों (जो कि सड़को पर दंगे कर रहे थे) को चोट आ गई तो पूरी कम्यूनिटी संविधान का हवाला देने लगी। कहने लगे कि दंगाइयों पर कार्रवाई करने का काम संविधान का है। कथित तौर पर पैगंबर के अपमान का बदला लेने के नाम पर इन्होने सिर्फ दंगे ही नहीं किए बल्कि मासूम लोगों की जान ले ली। कन्हैया लाल की उदयपुर में, उमेश कोल्हे की अमरावती में गर्दन काट कर रख दी। तो इनको किसी का गला काटने का लाइसेंस किसने दिया ? हिंसा करने की आजादी किसने दी ?

समझ में ये नहीं आता कि दुनिया भर में भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए जाने की दुहाई देने वाले अंतर्राष्ट्रीय संगठन और लेखक अब कितनी लंबी छुट्टियों पर चले गए हैं। इन मामलों को 4 महीने होने को आए हैं लेकिन अभी तक किसी ने भारत में बहुंसख्यकों और भारत को पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की सुध नहीं ली है। किसी ने सवाल नहीं उठाया है कि कहीं पर हिंदु खतरे में हैं।

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