इंजीनियरिंग शिक्षा के प्रति युवाओं का रुझान हुआ कम, नौकरी नहीं मिलने से बढ़ रही नकारात्मकता

युवाओं की इंजीनियरिंग शिक्षा के प्रति रुचि में गिरावट दर्ज की गई है। एनटीए के आंकड़ों को देखे तो जून सत्र के मुकाबले जुलाई सत्र में पंजीकरण में कमी आयी है।
इंजीनियरिंग शिक्षा के प्रति युवाओं का रुझान हुआ कम, नौकरी नहीं मिलने से बढ़ रही नकारात्मकता

देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन जुलाई सत्र के लिए पंजीकृत छात्रों की संख्या में रिकॉर्ड 2.43 लाख की कमी दर्ज की गई है। एनटीए द्वारा जारी आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई सत्र के लिए 6.29 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया, जबकि जून सत्र के लिए पंजीकरण कराने वाले छात्रों की संख्या 8.72 लाख थी।

भारत में एक समय था जब इंजीनियरिंग को एक सफल व्यक्ति की पहचान से जोड़ा जाता था। माता-पिता का सपना होता था कि उनका बच्चा इंजीनियर बने, लेकिन आज के समय में यह क्षेत्र अपना महत्व खोता जा रहा है। इंजीनियरिंग में प्रवेश पाने से पहले छात्र बहुत मेहनत करते थे। अब वह इंजीनियरिंग के अलावा अन्य विकल्पों की तलाश में है।

देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन जुलाई सत्र के लिए पंजीकृत छात्रों की संख्या में रिकॉर्ड 2.43 लाख की कमी दर्ज की गई है। एनटीए द्वारा जारी आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई सत्र के लिए 6.29 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया, जबकि जून सत्र के लिए पंजीकरण कराने वाले छात्रों की संख्या 8.72 लाख थी।

इंजीनियरिंग क्षेत्र में रुझान कम होने से अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

शिक्षा विशेषज्ञ देव शर्मा ने कहा कि पंजीकृत छात्रों की संख्या में यह कमी इंजीनियरिंग शिक्षा के प्रति छात्रों की लगातार घटती रुचि को दर्शाती है। पंजीकृत छात्रों की संख्या में कमी के कारणों का विस्तार से अध्ययन करना आवश्यक है। इंजीनियरिंग में छात्रों की घटती रुचि इंजीनियरिंग क्षेत्र को कमजोर करेगी और देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी। बता दें कि जेईई मेन जुलाई सत्र 25 जुलाई से आयोजित किया जाएगा।

इंजीनियरिंग करने वाले 94 फीसदी युवा रोजगार के योग्य नहीं

एम्प्लॉयबिलिटी असेसमेंट कंपनी एस्पायरिंग माइंड्स के शोध के अनुसार, भारत में 94% इंजीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर जॉब के लिए फिट नहीं हैं। इस शोध को बाद में टीवी मोहनदास ने पूर्ण बकवास बताया। मोहनदास मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन के अध्यक्ष और इंफोसिस के बोर्ड सदस्य हैं। वहीं टेक महिंद्रा के सीईओ और एमजी सीपी गुरनानी का कहना है कि 94 फीसदी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट भर्ती के लिए पूरी तरह फिट नहीं है। शीर्ष 10 आईटी कंपनियां भी केवल 6 फीसदी की भर्ती करती हैं।

नौकरी न मिलने से नकारात्मकता

लाखों रुपये खर्च करने के बाद हताश छात्र करोड़ों के पैकेज की चाह में इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ रहे है। इतना ही नहीं इंजीनियरिंग के छात्र नहीं मिलने से दर्जनों कॉलेजों में ताला लगा दिया गया है। इसके अलावा, प्रीमियम संस्थानों IIT के प्लेसमेंट में भी पांच प्रतिशत की गिरावट आई है। इंजीनियरिंग की डिग्री छात्रों की पहली पसंद होने से उनका मोहभंग हो रहा है।

इसके अलावा एक के बाद एक इंजीनियरिंग कॉलेज खुल रहे थे, वहीं अब उनमें ताला लग रहा है। जिनका सपना इस क्षेत्र में करियर बनाना है, वे या तो स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं या कोर्स पूरा करने के बाद कॉल सेंटर में काम करने के लिए मजबूर हैं। इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हैं। जिन्होंने इस उन्नत क्षेत्र की चमक फीकी पड़ गई है।

तकनीकी शिक्षा में लगातार गिरावट और नौकरी की मांग में कमी के कारण पिछले साल 22,000 से अधिक छात्रों ने इंजीनियरिंग कॉलेजों को छोड़ दिया। 62 कॉलेज छात्र न मिलने के कारण बंद कर दिए गए। देशभर में सबसे ज्यादा 11 कॉलेज हरियाणा में बंद हुए, जबकि चौथे नंबर पर यूपी रहा।

वर्ष 2014-15 में 12,553 छात्रों ने प्लेसमेंट में भाग लिया, जिसमें से केवल 9,141 छात्रों का चयन हुआ। यानी प्लेसमेंट पर्सेंटेज 72.82 फीसदी रहा।

वहीं, वर्ष 2015-16 में 75.79 प्रतिशत छात्रों का चयन हुआ था।

वर्ष 2016-17 में 12,525 छात्रों में से केवल 8,874 छात्रों को ही नौकरी मिली।

प्रवेश के लिए नि:शुल्क लैपटॉप और बाइक

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के कड़े मानदंडों के कारण, निजी इंजीनियरिंग कॉलेज अब छात्रों को प्रवेश लेने के लिए विभिन्न आकर्षक ऑफर दे रहे हैं। कुछ कॉलेज केवल 2,500 रुपये की वार्षिक फीस लेकर छात्रों को प्रवेश दे रहे हैं। कुछ निजी कॉलेज भी मुफ्त लैपटॉप और दोपहिया वाहन दे रहे हैं।

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