राजस्थानी युवा लेखन महोत्सव: "जिण भासा ने इतियास रच्यो, वीं री पीड़ा कुण जाणै है"- कवि शारदा कृष्ण

जेकेके जयपुर में आयोजित महोत्सव के दुसरे दिन भी कई राजस्थानी लेखकों ने राजस्थानी भाषा को सवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग रखी।
राजस्थानी युवा लेखन महोत्सव: "जिण भासा ने इतियास रच्यो, वीं री पीड़ा कुण जाणै है"- कवि शारदा कृष्ण

कार्यक्रम में प्रस्तुती देता राजस्थानी युवा लेखक

डेस्क न्यूज. आखर के अंतर्गत राजस्थानी युवा लेखन महोत्सव के आयोजन के दुसरे दिन आज 27 दिसंबर सोमवार को जवाहर कला केंद्र में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रदेशभर से आए युवा कवि, साहित्यकारों ने अपनी प्रस्तुती दी। इसके पश्चात दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिभागीयों का मुख्य अतिथियों ने प्रमाण-पत्र के साथ स्मृति चिन्ह भेंट कर उत्साहवर्धन किया। राजस्थानी युवा लेखकों के लिए एस तरह का ये पहला कार्यक्रम है, इस तरह के महोत्सव को आगे बड़े स्तर पर करने को लेकर भी चर्चा कार्यक्रम में की गई। कार्यक्रम के दुसरे दिन मुख्य अतिथि के तौर पर गोपाल कृष्ण व्यास, राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग मौजुद रहे।

<div class="paragraphs"><p>कार्यक्रम में मौजुद प्रदेशभर से राजस्थानी कला और साहित्य से जुड़े लोग</p></div>

कार्यक्रम में मौजुद प्रदेशभर से राजस्थानी कला और साहित्य से जुड़े लोग

बीकानेर की मोनिका गौंड के राजस्थानी गीतों पर झूमे दर्शक देखिए...

युवाओं के लिए इस तरह का कार्यक्रम पहली बार किया गया

युवाओं को राजस्थानी भाषा में लिखने के लिए प्रेरित करने का यह प्रयास पहली बार हो रहा है। मायाड भाषा के इस साहित्यिक उत्सव का आयोजन ग्रासरूट मीडिया द्वारा प्रभा खेतान फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है।

राजस्थानी भाषा के इस युवा कवि के क्यों दीवाने हुए दर्शक देखिए...

गोपाल कृष्ण व्यास के गाए राजस्थानी गीतों ने समा बांधा

आज आयोजित हुए कार्यक्रम में अतिथि के रूप में गोपाल कृष्ण व्यास, राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग मौजुद रहे इस दौरान व्यास ने राजस्थानी में अपना उदबोधन दिया और दर्शकों के कहने पर राजधानी गीत गा कर समां भी बाधां। इस दौरान कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर जवाहर कला केंद्र की अपर महानिदेशक डॉ. अनुराधा मौजूद रही। बता दें राजस्थानी लेखन के इस दो दिवसीय उत्सव का उद्घाटन पहले दिन शिक्षा, कला, साहित्य और संस्कृति मंत्री बी.डी. कल्ला ने किया था।

गोपाल कृष्ण व्यास के गाए राजस्थानी गीतों ने समा बांधा देखिए..

क्या कहना है राजस्थानी लेखक, कवि और साहित्यकारों का राजस्थानी भाषा के सवैधानिक दर्जे को लेकर देखिए...

1936 से अपनी भाषा के हक के लिए आवाज उठा रहे लोग

  • 1936 से चल रही राजस्थानी भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने मांग।

  • अर्जुन राम मेघवाल का 2021 के जनवरी-फरवरी में बयान आया कि राजस्थानी भाषा को जल्द मिलेगा सावधानी दर्जा।

  • 2006 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री ने 14वीं लोकसभा के कार्यकाल में राजस्थानी को संवैधानिक दर्जा दिलाने का आश्वासन दिया था और बाकायदा बिल भी तैयार किया गया, लेकिन वह आज तक पेश नहीं हो पाया।

  • प्रदेश के तीन नेता गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल और कैलाश चौधरी मोदी टीम में केंद्रीय मंत्री के अहम् पदों पर हैं। कई लोगों का मानना है कि इससे राजस्थानी भाषा

  • को सवैधानिक दर्जा दिलाने में आसानी होगी।

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<div class="paragraphs"><p>कार्यक्रम में प्रस्तुती देता राजस्थानी युवा लेखक</p></div>
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