राजस्थान में क्यों आई बाड़ाबन्दी की नौबत, आखिर क्या है बाड़ाबन्दी?

देश में 10 जून को राज्यसभा चुनाव होने वाले हैं। जिसको लेकर राजस्थान की कांग्रेस और भाजपा दोनों में में ही एक सीट को लेकर कलह मची हुई है। हालात ये हैं कि एक फिर से बाड़ेबन्दी की नौबत आ गई है।
राजस्थान में क्यों आई बाड़ाबन्दी की नौबत, आखिर क्या है बाड़ाबन्दी?

देश में 10 जून को राज्यसभा चुनाव होने वाले हैं। जिसको लेकर राजस्थान की कांग्रेस और भाजपा दोनों में में ही एक सीट को लेकर कलह मची हुई है। हालात ये हैं कि एक फिर से बाड़ेबन्दी की नौबत आ गई है।

रिपोर्ट्स में सामने आ रहा है कि कांग्रेस ने उदयपुर में जहां चिंतन शिविर किया था वहीं पर कांग्रेस 3 जून यानि कल से बाडेबन्दी करने जा रही है।

आखिर क्या है बाडाबन्दी?

बार बार इन दिनो ये शब्द सुनने में आ रहा है शब्द है बाड़ा बन्दी । लेकिन इसका मतलब क्या है। आइए आपको आसान भाषा में समझाते हैं।

सरल शब्दों में समझा जाए तो कोई पार्टी अपने विधायकों को एक जगह पर इकट्ठा करती है और उनको दूसरे दलों के नेताओं से मिलने से रोकने के प्रयास करती है जिससे वो दूसरे दलों से प्रभावित न हो पाए और पार्टी का मत ज्यों का त्यों बना रहे तो इस प्रक्रिया को बाड़ाबन्दी कहा जाता है।

आखिर क्यों आ रही है राजस्थान में बाड़ा बन्दी की नौबत

दरअसल राजस्थान में राज्यसभा की 4 सीटे को लिए चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में कांग्रेस ने तीन उम्मीदवार उतारे हैं जो हैं मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला और प्रमोद तिवारी। यहां तो खेल ठीक था क्योंकि एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन का चाहिए और कांग्रेस 128 विधायकों को समर्थन का दावा कर रही थी।

लेकिन यहां से पेच फंसाया सुभाष चंद्रा ने। सुभाष चंद्रा ने निर्दलीय पर्चा भरा है लेकिन उन्हें भाजपा का समर्थन मिला है। भाजपा के पास एक सीट का समर्थन होने के बावजूद भाजपा के प्रत्याशियों ने पर्चा भरा है।

सुभाष चन्द्रा ने निर्दलीय भरा नामांकन
सुभाष चन्द्रा ने निर्दलीय भरा नामांकन

ऐसे में कांग्रेस को डर है कि कहीं निर्दलीय विधायकों का ध्रुवीकरण न हो जाए। दरअसल कांग्रेस के पास आरएलडी और उसके सहित 109 विधायकों का तो अपना समर्थन है और दो विधायक माकपा के हैं लेकिन तीसरे प्रत्याशी प्रमोद तिवारी के लिए कांग्रेस को कम से कम 14 वोट और चाहिए। वहीं सुभाष चंद्रा के पास भाजपा के 30 और आरएलपी के 3 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में सुभाष चन्द्रा को 8 वोट चाहिए।

अब यही 8 वोट इस तीसरी सीट का भाग्य तय करने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा ने बसपा के 6 विधायकों को कांग्रेस के खिलाफ वोट डालने का ऑफर दिया है। जिसके बदले में भाजपा सुप्रीम कोर्ट में दायर दल बदल याचिका वापस लेने की बात कही है।

कांग्रेस की तीसरी सीट खतरे में

कांग्रेस की तीसरी सीट पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। क्योंकि बुधवार को जयपुर के एक निजी होटल में हुई कांग्रेस की मीटिंग में बसपा से कांग्रेस में शामिल वाजिब और संदीप, निर्दलीय विधायक रमीला और बीटीपी के दो विधायक नहीं पहुंचे थे। ऐसे में सत्तारूढ़ पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस तरीके से निर्दलीय विधायक कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकते हैं।

अब कौन कौन राजस्थान से राज्यसभा जाएगा ये तो 10 जून को होने वाले चुनावों के नतीजें ही बताएंगे। हालांकि 3 विधायकों की तस्वीर तो साफ है लेकिन तलवार अटकी है प्रमोद तिवारी और सुभाष चन्द्रा की दावेदारी पर। देखना होगा कि सियासी पार्टियां आखिर क्या खेल खेलेंगी और चौथी सीट किसके पाले में जाएगी।

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