GANGAUR 2022: ईसर गणगौर उत्सव की धूम, दो साल बाद भारी लवाजमें के साथ निकली गणगौर की सवारी

राजस्थान में गणगौर पूजा पर महिलाएं शिव और गौरी की कृपा पाने के लिए पूजा और व्रत करती हैं। इन दिनों राजस्थान में गणगौर और सिंजारे का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है, इसी बीच कोरोना काल के कारण दो साल बाद जयपुर के परकोटे से गाजे बाजे और लवाजमें के साथ गणगौर की सवारी निकली।
GANGAUR 2022: ईसर गणगौर उत्सव की धूम, दो साल बाद भारी लवाजमें के साथ निकली गणगौर की सवारी

गणगौर का त्यौहार राजस्थान का पारम्परिक आकर्षण बनाये रखने वाला त्यौहार है। राजस्थान में गणगौर पूजा पर महिलाएं शिव और गौरी की कृपा पाने के लिए पूजा और व्रत करती हैं। इन दिनों राजस्थान में गणगौर और सिंजारे का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है, इसी बीच

कोरोना काल के कारण दो साल बाद जयपुर के परकोटे से गाजे बाजे और लवाजमें के साथ गणगौर की सवारी निकली। इस दौरान देसी विदेशी सैलानियों की खासी भीड़ नजर आई। बैंड बाजों की धुन पर घोड़े , हाथी और उंट सजधज कर त्रिपोलिया गेट से निकले।

वहीं राजस्थानी संस्कृति के गौरव को बनाए रखने और बढ़ावा देने के उद्देश्य से नासा (नोबल एक्टिविटीज़ एवं सोशल अवेयरनेस) और इंटरनेशनल एस्ट्रोलोजी रिसर्च सेंटर ने मिलकर सिंजारा और गणगौर त्यौहार मनाया। ये सेलिब्रेशन आज़ादी का अमृत महोत्सव कला और संस्कृति के तहत किया गया।

350 महिलाओं ने लिया भाग

यह कार्यक्रम सुबह 11 से 5 बजे तक चला। इस कार्यक्रम में नासा की अध्यक्षता कीर्ति गुप्ता एवं इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजी रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष पवन शर्मा ने की। वहीं प्रोग्राम में नासा के सदस्यों सहित 350 महिलाओं ने भाग लिया। प्रोग्राम में सभी महिलाओं ने मिलकर गणगौर पूजन किया, हाथो में मेहँदी लगवाई और गणगौर के गीतों पर डांस किया। कार्यक्रम के अंत में सभी महिलाओं को ईसर गणगौर की तस्वीर बांटी गई।

राजस्थानी संस्कृति का महत्व कम होता दिखाई दे रहा

प्रोग्राम कोर्डिनेटर संगीता गर्ग ने बताया कि एक और जहां राजस्थान की संस्कृति विदेशों में धूम मचा रही है वहीं हमारे देश की यंग जनरेशन में राजस्थानी संस्कृति का महत्व कम होता दिखाई दे रहा है। गणगौर त्यौहार विदेशों में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह त्यौहार हमारी धरोहर है और पुरे देश में अनूठी है। इस संस्कृति को बचाना और इसको बढ़ावा देना ही हमारे इस प्रोग्राम का मोटिव है। कोरोनाकाल के चलते पिछले 2 सालों से यह प्रोग्राम नहीं किये जा रहे थे लेकिन अब राजस्थान की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ऐसे प्रोग्राम होते रहेंगे।

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