Rajasthan Election: बीस साल पहले की तरह इस बार भी वोटिंग प्रतिशत बढ़ा… खिलेगा कमल!

Rajasthan Election: राजस्थान में पिछले 20 सालों के चुनाव नतीजों को गौर करें तो पता चलता है मतदान प्रतिशत में वृद्धि का लाभ भाजपा को मिला है।
Rajasthan Election: बीस साल पहले की तरह इस बार भी वोटिंग प्रतिशत बढ़ा… खिलेगा कमल!

Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान में इस बार कुल 74.96 प्रतिशत मतदान हुआ। इसमें से 0.83 प्रतिशत वोटिंग डाक मतपत्रों के जरिए हुई। इस बार का मतदान पिछले विधानसभा चुनावों के मतदान से लगभग 1 प्रतिशत अधिक हुई है।

साल 2018 के विधानसभा चुनावों में राजस्थान में 74.06 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। पिछली बार की तुलना में इस बार हुई अधिक मतदान, क्या राज्य में सरकार परिवर्तन का संकेत है, इसको लेकर चुनाव विशेषज्ञ और तमाम लोग चर्चा कर रहे हैं। दरअसल, अंतिम रैली में भी पीएम मोदी ने राज्य की कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए लोगों से अधिक-से-अधिक संख्या में मतदान करने के लिए कहा था।

मतदान % बढ़ना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय

अगर वोटिंग ट्रेंड पर नजर डालें तो एंटी इंकम्बैंसी (सत्ता विरोधी लहर) की स्थिति में वोटिंग प्रतिशत में वृद्धि देखने को मिलती है। इस बार भी वोटिंग प्रतिशत में वृद्धि सत्ताधारी कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है। इसके पीछे कई कारण भी हैं।

राज्य की अशोक गहलोत की सरकार भले आम लोगों की भलाई की बात करें, लेकिन उनके शासनकाल में भ्रष्टाचार, परीक्षा प्रश्न पत्र का आउट हो जाना, महिलाओं के खिलाफ अपराध में वृद्धि जैसे तमाम मसले रहे हैं, जिससे राज्य सरकार के खिलाफ जनता में आक्रोश दिखा था।

ये कारण भी सत्ता विरोधी

‘लाल डायरी’ जैसे आरोप, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेताओं तक को कठघरे में खड़ा किया गया है, ने भी जनता को चिंतन पर मजबूर किया है। इससे अलग, पार्टी में ही अंदरुनी फूट भी एक बड़ा कारण हैं। सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान जैसे कारण पार्टी के प्रदर्शन पर सीधा प्रभाव डाले हो सकते हैं।

पिछले 20 सालों के चुनाव नतीजों को गौर करें तो पाएँगे कि जब-जब मतदान प्रतिशत में गिरावट आई है, तब-तब कांग्रेस फायदा पहुँचा है। वहीं, मतदान प्रतिशत में वृद्धि का लाभ भाजपा को मिला है। हालाँकि, ये ट्रेंड जारी रहता है या टूटता है, इसका पता 3 दिसंबर को मतगणना के दिन पता चल जाएगा।

इन आंकड़ों से जाने हकीकत

अगर साल 1998 के चुनावी नतीजों को देखें तो उस समय लगभग 63.40 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसके बाद कांग्रेस की सरकार बनी थी और अशोक गहलोत पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। उसके ठीक बाद साल 2003 के चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 67.18 प्रतिशत हुआ। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला और उसकी सरकार बनी।

साल 2008 के विधानसभा चुनावों में फिर वोटिंग पर्सेंट गिरकर 66.25 प्रतिशत रह गया और फिर से कांग्रेस की सरकार बनी। साल 2013 के विधानसभा चुनावों में 75 प्रतिशत मतदान हुआ और भाजपा को सत्ता मिली। इसी तरह साल 2018 के विधानसभा चुनावों में 0.98 प्रतिशत कम वोटिंग हुई और 74.06 प्रतिशत मतदान के कारण कांग्रेस की सरकार बनी।

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