Rajasthan: करौली में जमीन जिहाद! सोशल मीडिया पर वीडियो डाल RTI कार्यकर्ता को दी "सर तन से जुदा" की धमकी; देखें VIDEO

Karauli Crime News: मंदिर माफी की जमीन पर कब्जे के खिलाफ आवाज उठाने पर अशोक पाठक को मिल रही धमकियां। शिकायत के बावजूद आरोपियों पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई।
Rajasthan: करौली में जमीन जिहाद! सोशल मीडिया पर वीडियो डाल RTI कार्यकर्ता को दी "सर तन से जुदा" की धमकी; देखें VIDEO

Karauli Crime News: राजस्थान के करौली जिले में मंदिर माफी की जमीनों पर कब्जों का खेल चल रहा है। प्रशासनिक मिलीभगत से मजहब विशेष के कुछ लोगों के नाम मंदिर माफी की जमीनों का नामातंरण खोल दिया गया। इसके बाद शुरू हुआ अतिक्रमण का खेल। इसी जानकारी मिलने पर स्थानीय RTI कार्यकर्ता अशोक पाठक ने सबूत जुटाए और फिर कोर्ट स्टे लेकर कब्जे रुकवा दिए।

इसी से खफा कब्जा करने वाले मजहब विशेष के लोगों ने RTI कार्यकर्ता अशोक पाठक को सोशल मीडिया के माध्यम से वीडियो भेजकर "सर तन से जुदा" की धमकियां देना शुरू कर दिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। पीड़ित अशोक पाठक के अनुसार Sohiv khan की फेसबुक से मेरे खिलाफ "गुस्ताख ए नवी की एक सजा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा" story डाली गई है।

इस मामले को लेकर RTI कार्यकर्ता पाठक सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और आला पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा की गुहार लगाई है।

Since Independence पर यहां देखें घटनाक्रम का पूरा वीडियो...

बेशकीमती जमीनों पर कब्जे का है पूरा मामला

RTI कार्यकर्ता अशोक पाठक ने बताया कि करौली में सभापति प्रतिनिधि अमीनुद्दीन खान ने मंदिर माफी की सैंकड़ो बीघा जमीन पर अतिक्रमण कर लिया। मैंने इसके विरुद्ध सबूत जुटाए और संघर्ष करके करौली एसडीएम कोर्ट से 21 बीघा जमीन पर स्थगन आदेश ले लिया।

इसी तरह त्रिलोक चंद माथुर स्टेडियम के पीछे करोड़ों की कीमती जमीन पर भूखंड काटना शुरू कर दिया। इसके खिलाफ भी मैंने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। कुछ दिन पहले ही पता चला कि जाटव समाज के सैंकड़ों वर्ष पुराने शिव मंदिर को तोड़कर अमीनुद्दीन खान अवैध होटल बनाने जा रहा है।

इसके खिलाफ जाटव समाज के साथ मिलकर जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया गया। इसे खफा होकर आरोपी अमीनुद्दीन ने अपने समाज के मुस्लिम लोगों को भड़का कर षडयंत्र के तहत मेरे खिलाफ एसपी को फैक्स कर एक झूंठी रिपोर्ट पेश कर दी। रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।

फिर मिली "सर तन से जुदा" की धमकी

इसके बाद "सर तन से जुदा" का एक वीडियो शोएब खान नाम के व्यक्ति ने सोशल मीडियास पर वायरल किया, जो कि अमीनुद्दीन खान का खास आदमी है। पाठक ने बताया कि धमकी का वीडियो आते ही मैंने मुख्यमंत्री, डीजीपी, आईजीपी और करौली एसपी को इसकी जानकारी दी, लेकिन अभी तक आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

दूसरी ओर भूमाफियाओं के विरुद्ध आवाज उठाने की वजह से मेरे खिलाफ आईपीसी की धाराओं में एक झूठा मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

तोड़ा  जा रहा करौली का ऐतिहासिक परकोटा
तोड़ा जा रहा करौली का ऐतिहासिक परकोटा

परकोटे की जमीन पर भी अतिक्रमण

करौली के 700 साल पुराने ऐतिहासिक परकोटे को भी तोड़कर जीर्ण-क्षीर्ण किया जा रहा है। परकोटे की दीवार को जगह-जगह से तोड़कर कब्जे किए जा रहे हैं। साथ ही परकोटे के आसपास की जमीन पर भी कब्जे हो रहे हैं। मंदिर आदि तोड़कर वहां निर्माण किए जा रहे हैं।

आरोप है कि यह खेल भी चल रहा है सभापति प्रतिनिधि अमीनुद्दीन खान के इशारे पर। सभापति प्रतिनिधि के गुर्गे परकोटा और आसपास की जमीन को खुर्द-बुर्द करने पर तुले हैं। यह जमीन हैरिटेज के हिसाब से कीमती है, इसलिए अतिक्रणकारियों की इस पर नजर है।

उदयपुर: सरकार काटने वालों को सजा कब?

नुपूर शर्मा के बयान के बाद पूरे देश में हंगामा, धमकियों और मारपीट, हत्याओं का दौर चला। "सर तन से जुदा" के नारे लगाकर सड़कों पर हथियार लहराए गए। नुपूर के बयान का समर्थन करने पर उदयपुर में सरेआम कन्हैया लाल टेलर का गला रेत दिया गया। आरोपियों को पकड़ा तो गया, लेकिन आज तक उन्हें सजा नहीं मिल पाई है।

उधर, कन्हैया लाल टेलर के परिवार वाले आज भी डरे सहमें हुए हैं। आरोपियों को सजा नहीं मिलने से उनको भी हर दम जान जोखिम का खतरा रहता है। जिस बाजार में कन्हैया टेलर का मर्डर हुआ उसमें आज सन्नाटा पसरा हुआ है। बहुत सी दुकानों पर ताले लटके हुए हैं। टेलर के परिवार वालों को घोषित मुआवजा भी पूरा नहीं मिला।

करौली दंगाईयों पर सरकार मेहरबान!

करौली जिले के फूटा कोट इलाके में गत वर्ष हिन्दू नववर्ष (नव संवत्सर) के उपलक्ष्य में मुस्लिम बहुल इलाके से निकाली गई रैली पर मजहबियों ने जमकर पथराव और आगजनी की। इसके बाद जमकर हिंसा हुई। अनेक लोग घायल हुए। मुस्लिमों के घरों से चट्‌टनों जैसे बड़े पत्थर हिंदू रैली में शामिल लोगों पर गिराए गए।

इस मामले में पुलिस ने हिंदु पक्ष के ही अधिकतर लोग गिरफ्तार कर उन पर मुकदमे दर्ज किए, जबकि मजहब विशेष के कुछ ही लोगों को गिरफ्तार किया गया और उनमें से भी अधिकतरों को बाद में बिना मुकदमा दर्ज किए छोड़ दिया गया। ऐसे आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।

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