आखिर क्यों कर रहे है कोविड स्वास्थ्य सहायक बीते 74 दिन से प्रदर्शन,जाने

कोरोना के मुश्किल दौर में घर घर सर्वे, दवाइयों के वितरण जैसे कई राहत कार्यो को सुलभ बनाने के लिए सरकार ने करीब 28000 स्वास्थ्य सहायको को Contractual Basis पर नियुक्त किया था।
आखिर क्यों कर रहे है कोविड स्वास्थ्य सहायक बीते 74 दिन से प्रदर्शन,जाने
Image Source: Amar Ujala

बीते 74 दिन से शहीद स्मारक पर उम्मीदों का ताँता लगा हुआ है। यहाँ पर हजारो की संख्या में बेरोजगार मौजूद है जो की आज से दो महीने पहले भर तक कोरोना महामारी में आपके हमारे सभी के लिए एक सहायक की भूमिका अदा कर रहे थे। हालाँकि प्रदेश की गहलोत सरकार ने अब इन स्वास्थ्य सहायको को उनके पदों से हटा दिया है। सरकार के इस कदम से प्रदेश के करीब 28 हजार स्वास्थ्य सहायक प्रभावित हो रहे है। और यही वजह है की स्टेचू सर्किल पर हजारो की संख्या में मौजूद ये बेरोजगार धरने पर बैठे है।

प्रदर्शनकारियों की मांग है की उनकी सेवाएं फिर से बहाल की जाए। मालूम हो की गहलोत सरकार ने कोरोना पर लगाम कसने के लिए बीते साल कोविड स्वास्थ्य सहायको की भर्ती की थी। कोरोना के मुश्किल दौर में घर घर सर्वे, दवाइयों के वितरण जैसे कई राहत कार्यो को सुलभ बनाने के लिए सरकार ने करीब 28000 स्वास्थ्य सहायको को Contractual Basis पर नियुक्त किया था। हालाँकि मार्च महीने में सरकार ने इन सभी संविदाकर्मियों की सेवाओं को समाप्त कर उन्हें हटा दिया, जिसके बाद से ही प्रदर्शनकारी धरने पर है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है की उन्होंने कोरोना महामारी के मुश्किल दौर में जब सब अपने घरो में कैद थे ऐसे समय में उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए जनसेवा का काम किया। ऐसे में ये सरकार का फर्ज है की वे उनकी सेवाओं की फिर से बहाली करें।

शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे इन प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान सरकार से भी बात करने की कोशिश करी लेकिन वो भी बेनतीजा ही निकली। ये मामले इन बेरोजगारों के लिए कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की रोजगार न होने के चलते एक हाल ही में एक प्रदर्शनकारी खेमचन्द मीणा ने आत्महत्या जैसा कदम तक उठा लिया।

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हालाँकि सरकार अभी तक इस मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए है। प्रदर्शनकारी भी दूसरी तरफ अपनी मांगो पर टिके हुए है और कहते है की वे तब नहीं हटेंगे जब तक उनकी सेवाएं बहाल नहीं कर दी जाती। और यदि सरकार उनकी मांगो पर ध्यान नहीं देती है तो वे आगामी विधानसभा चुनावों के जरिए सरकार को उनकी मौजूदगी का एहसास कराएंगे।

इस पूरे मामले से इतर जब हम अपनी नजरो को घुमाते हुए पीछे देखते है तो पता चलता है की प्रदेश का कोविद मैनेजमेंट पूरे देशभर में सराहा गया था। महामारी के उस दौर में जब हम सब वास्तव में अपने घरो में कैद थे तब ये सहायक कोरोना और तमाम तरह के हालातो से लड़ते हुए हमारी मदद कर रहे थे। ये इनकी मेहनत का ही नतीजा था की कोरोना काल में बेहतर मैनेजमेंट का सहरा अशोक गहलोत सरकार के सर बंधा। ऐसे में अब ये सरकार का फर्ज बनता है की वो भी इनका ख्याल रखे। वैसे भी बेरोजगारी के मामले में प्रदेश टॉप 3 में शामिल है। ऐसे में बेवजह बेरोजगारी का आंकड़ा बढ़ाने से सरकार को बचना चाहिए।

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