मोती डूंगरी मंदिर प्रसाद को मिला 100% शुद्धता का सर्टिफिकेट, जानें प्रसाद की खासियत

मोती डूंगरी गणेशजी मंदिर को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सेफ भोग प्लेस घोषित कर दिया है। यानी अब यहां मिलने वाले प्रसाद की गुणवत्ता प्रमाणित हो गई है।
मोती डूंगरी मंदिर प्रसाद को मिला 100% शुद्धता का सर्टिफिकेट, जानें प्रसाद की खासियत
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डेस्क से यशस्वनी की रिपोर्ट -

मोती डूंगरी गणेशजी मंदिर को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सेफ भोग प्लेस घोषित कर दिया है। यानी अब यहां मिलने वाले प्रसाद की गुणवत्ता प्रमाणित हो गई है। मंदिर समिति अब प्रसाद के पैकेट पर विशेष 'भोग' टैग भी लगा सकेगी।

इस मंदिर से प्रदेश में इस योजना का श्रीगणेश हो गया है। सोमवार को यानी आज दिल्ली से एक विशेष टीम आकर महंत कैलाश शर्मा को यह सर्टिफिकेट देगी। अब आगे भोग प्लेस योजना में हर 6 माह में ऑडिट होगा।

उज्जैन महाकाल के बाद अब मोती डूंगरी मंदिर को मिला भोग सर्टिफिकेट

भोग शब्द अंग्रेजी के चार अल्फाबेट्स से मिलकर बना है। B से ब्लिसफुल, H से हाईजिनिक, O से ऑफिरिंग, G से गॉड। ‘ब्लिसफुल हाइजिनिक ऑफरिंग टू गॉड’ यानी भगवान को प्रस्तुत मधुर और स्वस्थप्रद।

बता दें कि मोतीडूंगरी मंदिर के प्रशाद में किसी भी प्रकार का फ़ूड कलर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यह बात दिल्ली से ऑडिट के लिए आई टीम में शामिल में शामिल पार्टनर इंद्रप्रस्थ अकादमी फाउंडेशन के निदेशक गौरव श्रीवास्तव ने बताई।

35 स्थलों को मिल चुका है ये सर्टिफिकेट

अब तक प्रमुख 10 मंदिरों सहित 35 धार्मिक स्थलों को यह सर्टिफिकेट मिल चुका है। भोग योजना के अंतर्गत मंदिरों को यह सर्टिफिकेट दिया जाता है। यह योजना 2020 में शुरू हुई थी और जून 2021 में उज्जैन के महकाल मंदिर को सबसे पहले भोग टैग मिला था।

इस योजना में भोपाल की एक मस्जिद भी शामिल है। हालांकि बता दें कि अभी तक किसी गुरुद्वारे को यह टैग नहीं मिला है।

ये होते हैं शुद्धता के मानक

प्रसाद के लिए शुद्धता के ये मानक होना जरुरी है, तभी संस्था द्वारा उसे भोग सर्टिफिटेक दिया जाता है।

  • हाईजिनिक भंडारण व्यवस्था

  • खाद्य सामग्री की गुणवत्ता एवं सुरक्षा

  • लाइसेंस और फूड सेफ्टी डिस्प्ले

  • कर्मचारियों का मेडिकल फिटनेस

चार चरणों बाद मिलता है सर्टिफिकेट

सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया 4 चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में गैप ऑडिट कर मंदिर रसोई की कमियों, जरूरतों, कार्य और मापदंड के पालन का पता लगाकर रिपोर्ट तैयार की जाती है । दूसरा रिपोर्ट के आधार पर ट्रेनिंग दी जाती है। तीसरा गैप ऑडिट में बताए पॉइंट की पूर्ति होने के बाद प्री-ऑडिट होती है। चौथा फाइनल ऑडिट में प्राधिकरण के मापदंड की जांच की जाती है।

मंदिर को भोग टैग मिलना बड़ी उपलब्धि

महंत कैलाश शर्मा, (मोतीडूंगरी गणेशजी मंदिर) ने अपनी ख़ुशी जाहिर करते हुए बताया की इस योजना का श्री गणेश मोतीडूंगरी गणेशजी मंदिर से हुआ और यह सर्टिफिकेट मिलना इस मंदिर के लिए एक उपलब्धि बड़ी है।

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