अयोध्या मामलें में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मध्यस्था आगे बढ़ाये पैनल..नहीं तो 25 जूलाई से रोजाना सूनवाई

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में अदालत ने तीन सदस्यीय समिति का गठन कर रखा है।
अयोध्या मामलें में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मध्यस्था आगे बढ़ाये पैनल..नहीं तो 25 जूलाई से रोजाना सूनवाई

जयपुर (डेस्क न्यूज) – सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 11 जुलाई को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई की। मामलें की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कर रही है।

कोर्ट में याचिकाकर्ता ने कहा कि जो तीन-सदस्यीय पैनल बनाया गया था उस मामले में बहुत कुछ नही हुआ है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिम्हा द्वारा मुकदमे की सुनवाई के लिए पेश हुए वरिष्ठ वकील पीएस नरसिम्हा द्वारा कहा गया कि विवाद को अदालत के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की आवश्यकता है।

एक समाचार एंजेसी के मुताबिक भूमि विवाद में सौहार्दपूर्ण समाधान की संभावनाओं की तलाश के लिए, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में अदालत ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। श्री श्री रविशंकर और मद्रास उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू भी पैनल का हिस्सा हैं। अदालत ने कहा कि कार्यवाही "अत्यंत गोपनीयता" के साथ होनी चाहिए।

6 दिसंबर 1992 को, शिया मुस्लिम मीर बाक़ी द्वारा 16 वीं शताब्दी में विवादित स्थल पर बनाई गई बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था।

2010 में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर 2.7 एकड़ विवादित भूमि को राम लल्ला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच समान रूप से विभाजित किया जाएगा।

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