दुर्गा अष्टमी के मौके पर बुआ के घर पहुंची प्रियंका गाँधी , कन्या पूजन भी किया

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार को दुर्गा अष्टमी पर अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की भाभी के घर कन्या पूजन किया। प्रियंका गांधी ने इंस्टाग्राम पर शेयर की कन्या पूजन की तस्वीरें
दुर्गा अष्टमी के मौके पर  बुआ के घर पहुंची प्रियंका गाँधी , कन्या पूजन भी किया

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार को दुर्गा अष्टमी पर अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की भाभी के घर कन्या पूजन किया। प्रियंका गांधी ने इंस्टाग्राम पर शेयर की कन्या पूजन की तस्वीरें

उन्होंने पोस्ट में लिखा,

"आज अष्टमी के दिन कन्यापूजन के लिए मेरे पिता राजीव गांधी जी की राखी बहन के घर जाना हुआ। वहां जाकर कई पुरानी यादें ताजा हो गईं।

उनको पंडित जी जम्मू से लेकर आए थे। उनके पिता जी चौकीदार का काम करते थे। वो मेरे पिताजी और चाचा को राखी बांधती थीं। इंदिरा गांधी जी ने उनकी शादी कराई।

कोरोना के चलते उनकी मृत्यु हो गई। कल उनके बेटे ने बताया कि वो पहली दफा उनके बिना कन्यापूजन कर रहे हैं तो आज उनके घर जाकर कन्यापूजन किया।

या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

प्रियंका गांधी ने आगे लिखा,

उनकी मौत कोरोना के कारण हुई। कल उनके बेटे ने बताया कि वह उनके बिना पहली बार कन्या की पूजा कर रहे हैं, इसलिए आज उन्होंने अपने घर जाकर कन्या की पूजा की।

आपको बता दें, आज शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि है. इसे दुर्गा अष्टमी भी कहते हैं। इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। नवरात्रि हवन पूरे देश में दुर्गा अष्टमी के दिन किया जाता है। दुर्गा अष्टमी और महानवमी के दिन कन्या की पूजा भी की जाती है।

कैसे करें कन्या पूजन

कन्या पूजा घर या मंदिर में की जा सकती है। शास्त्रों के अनुसार दो साल से लेकर 10 साल तक की उम्र की लड़कियों को पूजा के लिए आमंत्रित करना चाहिए। कन्या पूजा में संतान का होना आवश्यक माना गया है। कन्या पूजन के दिन सबसे पहले मां अम्बे की विधि का पूजन करें। इसके बाद लड़के-लड़कियों के पैर साफ पानी से धो लें। फिर लड़कियों और बच्चे को बैठने के लिए एक सीट दें।

फिर मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं और सभी कन्याओं और एक बच्चे को तिलक करें और उनके हाथों में कलावा बांधें। इसके बाद बालक-बालिकाओं को भोजन कराएं। भोजन के बाद कन्याओं को उनकी क्षमता के अनुसार दक्षिणा या उपहार दें। फिर सभी कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें और सम्मान के साथ विदा करें।

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