Excise Policy Case: कोर्ट में केजरीवाल पर बोली ED 'घर में बॉडी नहीं मिलने से मर्डर छिप नहीं जाता'

Liquor Policy Case: दिल्ली हाईकोर्ट में केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर ईडी के वकील राजू ने जोरदार पैरवी करते हुए केजरीवाल की जमर धुलाई की।
Excise Policy Case: कोर्ट में केजरीवाल पर बोली ED 'घर में बॉडी नहीं मिलने से मर्डर छिप नहीं जाता'

Excise Policy Case: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। केजरीवाल की ओर से दायर इस याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने अपने फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही थी।

हाईकोर्ट में सीएम अरविंद केजरीवाल की तरफ से उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी अपना पक्ष रख रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ ईडी की ओर से पेश हुए ASG राजू केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध कर रहे थे। इस दौरान दोनों की दलील के बीच कुछ तीखी बातचीत भी देखने को मिली। आइए जानते हैं हाईकोर्ट में किसने क्या कहा?

ईडी के वकील ASG राजू की दलीलें

ईडी की ओर से पेश ASG राजू ने केजरीवाल की याचिका को PMLA की धारा 45 की कठोरता से बचने के लिए जमानत याचिका का दूसरा रूप बताया और कहा कि अपराध हुआ है यह फैक्ट है और जो भी व्यक्ति संदेह के दायरे में है उससे पूछताछ होना लाजमी है।

कोर्ट की ओर से पीसी पर संज्ञान के आदेश का हवाला देते हुए राजू ने कहा कि साफ है कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है और किसी ने भी आदेश को चुनौती नहीं दी है। आखिरी आदेश 19 दिसंबर 2023 का है जिसमें कोर्ट ने 2 शिकायतों पर संज्ञान लिया है और दोनों फैसलों पर समझ आता है कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध बनता है।

जिसने नहीं दी रिश्वत उसके लाइसेंस करा दिए सरेंडर

ईडी के वकील ने इस दौरान आप सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने रिश्वत नहीं दी, उनसे लाइसेंस सरेंडर कराए गए, कार्टेलाइजेशन की शिकायत के बावजूद इंडो स्पिरिट को थोक लाइसेंस दिया गया, शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। 5 प्रतिशत के लाभ को 12 प्रतिशत क्यों कर दिया गया. इन सवालों के जवाब जरूरी हैं।

यह अनुमान है लेकिन इस बढ़ाने का सिर्फ एक कारण समझ आता है कि करीब 7 प्रतिशत हिस्से का उपयोग रिश्वत देने के लिए किया जा सके। घोटाला हुआ है यह फैक्ट है और इसमें कोई शक नहीं. शोर मचाने से सच नहीं बदल जाता।

घर में कुछ न मिलने से घोटाला नहीं छिप जाता

अगर घोटाला नहीं हुआ था तो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस को क्यों डिस्ट्रॉय किया गया। कई बार कोर्ट में ऐसे मामले आते हैं जब मर्डर के केस में बॉडी नहीं मिल पाती है लेकिन जब दोष साबित हो जाता है। इसका मतलब ये तो नहीं कि मर्डर नहीं हुआ है। हम मामला बनाते हैं कि आप मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थे, तो अपराध की वास्तविक आय का पता लगाना बेकार है। आप कह रहे हैं कि मेरे घर से तो कुछ नहीं मिला लेकिन जब आपने वो पैसा कहीं और भेज दिया तो वो कैसे आपके घर में मिलेगा।

आतंकी कहे कि चुनाव लड़ना है तो क्या उसे नहीं छुएंगे

ईडी के वकील ने हाईकोर्ट में कहा कि मान लीजिए एक आतंकवादी का मामला है जो राजनेता है, उसने सेना के वाहन को उड़ा दिया है लेकिन वह कहते हैं कि मुझे चुनाव में खड़ा होना है, आप मुझे छू नहीं सकते। यह कैसा तर्क है?

यह पहली नजर में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है। कई अभियुक्तों को जमानत से इनकार करने के उद्देश्य से मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया। आज हमें धारा 45 PMLA को पार नहीं करना है क्योंकि यह जमानत याचिका नहीं है।

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