Scam: विभाग की आंखों में धूल झोंक डाककर्मियों ने सरकारी खजाने पर डाला डाका, 16.92 करोड़ का गबन

उदयपुर के मावली डाकघर में उपडाकपाल सहित चार डाककर्मियों ने बैंक में जमा राशि के फर्जी वाउचर बनाकर करीब 16.92 करोड़ का गबन कर लिया, सरकारी धन की लूट का यह सिलसिला तीन सालों से चल रहा था।
Scam: विभाग की आंखों में धूल झोंक डाककर्मियों ने सरकारी खजाने पर डाला डाका, 16.92 करोड़ का गबन

उदयपुर के मावली डाकघर के सरकारी खजाने पर डाककर्मियों ने ही डाका डाला। डाकघर में काम करने वाले उपडाकपाल सहित चार कर्मिकों ने जमा राशि के फर्जी वाउचर बनाकर करीब 16.92 करोड़ का गबन कर डाला। आरोपी बैंक स्टेटमेंट, पावती व बैंक अधिकारीयों के फर्जी हस्ताक्षर कर 3 साल से सरकारी खजाने को लूटते आ रहे है। प्रधान डाकघर के अधिकारी जाँच के बावजूद अभी तक आरोपी बचते आ रहे है।

जोधपुर CBI में मामला दर्ज

प्रवर अधीक्षक ने गबन मामले में मावली उपडाकघर के उपडाकपाल सुशिल कुमार, डाकसेवक फलीचड़ा, राधेश्याम पारीक, भीमल, विजयसिंह पथिक, किशनलाल मेघवाल व रतनलाल गवारिया को नामजद करते हुए सीबीआई को रिपोर्ट सौंपी। सीबीआई जोधपुर की टीम ने जाँच के बाद मामला दर्ज कर लिया।

सीबीआई में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। परिमंडल की भी मामले की जाँच चल रही है। मुख्यालय को भी अवगत करवाकर FIR की प्रति भिजवाई है। मामले में आरोपियों को निलंबित कर रखा है।

के. के. बुनकर, प्रवर अधीक्षक, उदयपुर डाकघर

तीन सालों से कर रहें गबन

राजस्थान में डाकघर गबन का इतनी बड़ी राशि वाला पहला मामला बताया जा रहा है। गबन का ये सिलसिला 2020 से चला आ रहा है। इन डाककर्मियों ने 2020 में 3 करोड़ 94 लाख, 2021 में 12 करोड़ 13 लाख व 2022 में सवा 33 लाख रूपये यानि कुल मिलाकर 16.92 करोड़ रूपये गबन किए है ।

जाँच में हुए बड़े खुलासे

  • आरोपी उपडाकपाल सुशिल कुमावत ने ही 4 जनवरी 2022 को प्रवर अधीक्षक को जानकारी दी तो धीरे धीर गबन का राज भी खुलता गया। सबसे पहले आरोपियों ने दैनिक सीमा से अधिक राशि वाउचर के माध्यम से बैंक में जमा होना दिखाया।

  • फर्जी वाउचर में से एक-एक को उपडाकघर में ही रिकॉर्ड में रखा था दूसरी प्रति को हेड पोस्टऑफिस को अन्य दैनिक कागजातों के साथ भेजा गया।

  • महीने समाप्ति पर राशि जमा के बैंक के फर्जी अकाउंट स्टेटमेंट भी भेजे गए। बैंक में जाँच करने पर फर्जी स्टेटमेंट व असल दस्तावेज में भरी फेरबदल मिला।

Related Stories

No stories found.
Since independence
hindi.sinceindependence.com