माफिया भी नहीं तोड़ पाया रिंकू का हौसला: स्कैम उजागर करने पर 7 गोलियां दागी, एक आंख खोई, अब UPSC परीक्षा में हासिल की 683वीं रैंक

माफिया भी नहीं तोड़ पाया रिंकू का हौसला: स्कैम उजागर करने पर 7 गोलियां दागी, एक आंख खोई, अब UPSC परीक्षा में हासिल की 683वीं रैंक

वाकई रिंकू सिंह की कहानी हरेक उस शख्स को सीख देने वाली साबित हुई है जो जीवन में कई परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। इस तरह की विपरीत परिस्थितियों में तो कई युवा अपना जीवन ही समाप्त कर लेते हैं। वहीं कुछ शख्स रिंकू जैसे भी होते हैं जो दूसरे युवाओं के लिए नजीर बन जाते हैं।
Rinku Singh Rahi Inspirational Story : कहते हैं कि चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियां क्यों न हों... यदि जज्बा और सकारात्मक सोच हो तो जीवन में कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं होता। 2007 बैच के पीसीएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने उक्त पंक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है। साल 2009 में रिंकू सिंह (rinku singh rahi ias) ने 83 करोड़ रुपए के छात्रवृति घोटाले का पर्दाफाश कर सरकारी सिस्टम में लिप्त माफिया से दुश्मनी मोल ली।
अपने विभाग में ही करप्शन के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले इस अधिकारी पर हमला कर सात गोलियां दागी गईं। हमले में उन्हें अपनी एक आंख खोनी पड़ी और चेहरा भी काफी बिगड़ गया। उन्हें सुनने में भी दिक्कत हुई। बावजूद इसके रिंकू सिंह राही के इरादे नहीं डगमगाए। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की अपनी तैयारी करना जारी रखा और अब इस बार उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में 683वीं रैंक हासिल की।
वाकई रिंकू सिंह की कहानी हरेक उस शख्स को सीख देने वाली साबित हुई है जो जीवन में कई परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। इस तरह की विपरीत परिस्थितियों में तो कई युवा अपना जीवन ही समाप्त कर लेते हैं। वहीं कुछ शख्स रिंकू जैसे भी होते हैं जो दूसरे युवाओं के लिए नजीर बन जाते हैं।
Photo | India Today

घोटाला जब उजागर किया तो 26 साल के थे रिंकू

साल 2008 में राही की नियुक्ति मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर हुई। इसी दौरान उन्होंने घोटाले के रैकेट को उजागर किया। इसके बाद सक्रिय माफिया ने पीसीएस अधिकारी रिंकू सिंह अटैक करने के लिए 8 लोगों को भेजा। रिंकू बताते हैं कि अब इनमें से चार आरोपियों को 10 साल की सजा हो गई है। गौरतलब है कि राही ने जब ये स्कैम उजागर किया था तो वे महज 26 साल के ही थे।

हमले के बाद 4 माह हॉस्पिटल में रहा,उसकी छुट्टियां भी अब तक मंजूरी नहीं हुई

रिपोर्ट के अनुसार अब 40 साल के हो चुके राही बताते हैं कि जब मुझे घोटाला एक्सपोज करने के बाद परेशान किया जा रहा था तो उस वक्त मैं सिस्टम से नहीं बल्कि सिस्टम मुझसे लड़ रहा था...। हमले के बाद मैं हॉस्पिटल में चार महीनों तक रहा। मेडिकल पर मेरी छुट्टियों को अभी तक विभाग की ओर से मंजूर नहीं हुई हैं। राही बताते हैं कि यूपी में मायावती के कार्यकाल के दौरान उन पर हमला हुआ... वहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई तो मुझे समाजवादी पार्टी की सरकार में मनोरोगियों के वार्ड शिफ्ट कर दिया गया। उत्तर प्रदेश में चाहे जिसकी भी सरकार रही हो.. मैंने सिस्टम के घोटाले को उजागर किया तो मुझे प्रताड़ित करने का सिलसिला जारी ही रहा।

83 करोड़ रुपये का उजागर किया था घोटाला

रिंकू राही 2008 में पीसीएस अधिकारी बने थे। उनकी पहली नियुक्ति मुजफ्फरनगर में बतौर समाज कल्याण अधिकारी के तौर पर हुई थी। इसके बाद 2009 में उन्होंने समाज कल्याण विभाग में 83 करोड़ रुपये के हुए स्कैम का एक्स्पोज ​कर दिया। स्कैम सामने आने के बाद से विभाग के लोग ही उनके दुश्मन बन गए। इसी का बदला लेने पर उन पर गन से हमला किया गया और कई राउंड गोलियां चलाई गईं।

फिर प्रशासनिक अधिकारी बनने का फैसला किया

राही कहते हैं, जब मैं 10 साल का था तो मेरे दादा का निधन हो गया...। दादी को घर से बाहर निकाल दिया गया...। उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए दूसरे के घरों में बर्तन साफ करने पड़े...। मेरे पिता पढ़ाई में अच्छे थे लेकिन परिवार की देखभाल करने के लिए उन्हें बीच में अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी...। मैं सोचता था कि यदि सरकारी अधिकारी यदि ईमानदार होते तो हमें कई योजनाओं का लाभ मिला होता...। ये सभी बातें मुझे अंदर ही अंदर परेशान करती थीं। ऐसे में मैंने प्रशासनिक अधिकारी बनने की ठानी... कि चाहे जो भी हालात हों मैं प्रशासनिक अधिकारी बनकर ही रहूंगा।
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