कौन है कांग्रेस के चाणक्य, जो अमेठी में स्मृति ईरानी को देंगे टक्कर

लोकसभा चुनाव अपने चरम पर हैं। कांग्रेस ने अमेठी और रायबरेली कि लोकसभा सीट पर प्रत्याशियों के नाम को सस्पेंस बना कर रखा था। लम्बे समय से ऐसी खबरें सामने आ रही थी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अमेठी से अपना नामांकन भरेंगे, लेकिन उन्होनें रायबरेली से नामांकन भरकर सस्पेंस खत्म कर दिया है।
कौन है कांग्रेस के चाणक्य, जो अमेठी में स्मृति ईरानी को देंगे टक्कर
कौन है कांग्रेस के चाणक्य, जो अमेठी में स्मृति ईरानी को देंगे टक्कर

लोकसभा चुनाव अपने चरम पर हैं। कांग्रेस ने अमेठी और रायबरेली कि लोकसभा सीट पर प्रत्याशियों के नाम को सस्पेंस बना कर रखा था। लम्बे समय से ऐसी खबरें सामने आ रही थी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अमेठी से अपना नामांकन भरेंगे, लेकिन उन्होनें रायबरेली से नामांकन भरकर सस्पेंस खत्म कर दिया है।

बता दें कि अमेठी और रायबरेली कांग्रेस के गढ़ हुआ करते थे। ये 2 सीटें ऐसी है जहां हमेशा से गांधी परिवार ही उतरता आ रहा है। अब सवाल ये है कि अब जब गांधी परिवार में से इस सीट पर कोई नहीं उतर रहा तो फिर अब कौन।

कौन है किशोरी लाल शर्मा

किशोरी लाल शर्मा पंजाब के रहने वाले हैं। इन्हें गांधी परिवार का सबसे करीबी माना जाता है। साथ ही कांग्रेस और सोनिया गांधी का चाणक्य भी कहा जाता है। ये रायबरेली में कांग्रेस और सोनिया गांधी की अनुपस्थिति में उनके प्रबंधक रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत के बाद शर्मा का रिश्ता गांधी परिवार के साथ और गहरा हो गया। वह पहली बार 1983 में अमेठी आये और तब ही से वह कांग्रेस के लिए इस निर्वाचन क्षेत्र में काम करते आ रहे हैं। इन सब में सबसे दिलचस्प बात ये है कि सोनिया की पहली चुनावी जीत में उनकी एहम भूमिका रही थी।

2004 में सोनिया ने अपने बेटे राहुल के लिए अमेठी की सीट छोड़ दी और रायबरेली चली आयी। शर्मा ने दोनों ही शहरों में (रायबरेली और अमेठी में) पार्टी के सभी मामलों में प्रबंधन देखना शुरू कर दिया था।

प्रियंका गांधी ने किशोरी लाल शर्मा के प्रत्याशी बनने पर x पर किया पोस्ट

प्रियंका गांधी x पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखती हैं कि किशोरी लाल शर्मा से गांधी परिवार का वर्षों का नाता है। वो हमेशा अमेठी और रायबरेली के लोगों की सेवा में पुरेमन और प्राण से लगे रहें। उनका जनसेवा का जज़्बा अपने आप में एक मिसाल हैं। प्रियंका ने शर्मा को उम्मीदवार बनने पर बधाई दी है।

एक सदी के बाद कोई दूसरा उतरा कांग्रेस से

1967 से जब अमेठी सीट का अस्तित्व बना, तब से आज तक इस सीट पर गांधी परिवार का ही कोई सदस्य चुनावी मैदान में उतरता आया है। अब कांग्रेस कहे या गांधी परिवार ये सीट उनका गढ़ बन गई थी। साल 1977, 1998 और 2019 को छोड़ कर इस सीट परिवार का ही साम्राज्य रहा है।

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