आंग सांग सू कि की बढ़ी मुश्किलें, अब व्यापारी ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

हाल ही में वहां के एक व्यापारी ने सू कि पर 550000 अमेरिकी डॉलर लेने का आरोप लगाया है। इसी के साथ सू कि के ऊपर अब तक 12 आरोप अब तक लगाए जा चुके है
आंग सांग सू कि की बढ़ी मुश्किलें, अब व्यापारी ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
lifegate.it

म्यांमार(Myanmar) में सत्ता हस्तांतरण(MilitaryCoup) को एक साल से भी काफी ज्यादा समय हो गया है। संभवतः अब तो लोगो के जेहन में ये भी न होगा की म्यांमार(Myanmar) में सत्ता हस्तांतरण हुआ कब था। ऐसा नहीं है की म्यांमार के सत्ता हस्तांतरण का कोई महत्त्व नहीं है लेकिन वास्तव में होता यही हैं। खैर, म्यांमार(Myanmar) में बीते साल एक फरवरी को सेना के द्वारा सत्ता हस्तांतरण करा गया था। और उसके बाद से ही देश में अस्थिरता का माहौल है। पूरे देशभर में इसके विरोध में लगातार विरोध प्रदर्शन हुए और कमोबेश अभी भी जारी है। हालाँकि हालात अब भी जस के तस है और ताजा आंकड़ों कि बात करे 28 फरवरी तक देश में करीब 500000 लोग विस्थापित(Displace) हो चुके है। वहीँ वहां पर मौजूद लोग अब भी खाने पीने और दवाई जैसी मूलभूत सेवाओं के लिए तरस रहे है।

क्यों हुआ हस्तांतरण(Military Coup)
आंग संग सू कि(Aang Sang Suu Kyi) की पार्टी National League for Democracy (NLD) ने इस हस्तांतरण से पूर्व हुए आम चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल किया था और यही जीत ने म्यांमार(Myanmar) में आने वाली तबाही कि नींव रखी। दरअसल सेना ने इन चुनावों में विपक्षी पार्टी का पुरजोर समर्थन किया था, हालाँकि चुनावो में जीत सू कि की कि पार्टी कि हुई। इसके बाद विपक्षी पार्टी ने मतगणना फिरसे करवाने कि मांग रखी, उसका आरोप था कि चुनाव में भ्रष्ट तरीको का इस्तेमाल हुआ है। हालाँकि वहां के चुनाव आयोग ने इस शिकायत को ये कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि उन्हें चुनाव में भ्रष्टाचार होने के कोई सबूत नहीं मिले है। इसके बाद ही फेरवारी में देश में दमनकारी हस्तांतरण हुआ था, इसके बाद से ही वहां के सैन्य कमांडर इन चीफ Min Aung Hlaing सत्ता पर काबिज हैं।
Aung Sang Suu Kyi
Aung Sang Suu KyiImage Credits: elle.fr
कौन है आंग सांग सू कि
आंग सांग सू(Aang Sang Suu Kyi) कि ने म्यांमार(Myanmar) में ठीक वैसा ही काम किया है, जैसा भारत में स्वतंत्र सेनानियों ने आजादी के लिए किया था। सू की उस वक्त पूरे दुनियाभर में मशहूर हो गई थी जब उन्हें साल 1991 में म्यांमार(Myanmar) में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था। इसके बाद साल 2015 में जब देश में पहली बार स्वतंत्र रूप से चुनाव हुए तो सू कि कि पार्टी NLD ने बहुमत हासिल किया।
People have been protesting for long in Myanmar
People have been protesting for long in MyanmarImage Credits: ibtimes.co.uk
वर्तमान कि स्थिति?
सबसे ख़ास बात इस हस्तांतरण के दौरान जो देखी गयी वो ये रही कि जनता ने इस दौरान सेना के सामने घुटने टेकने से इंकार कर दिया और लगातार उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर लोकतंत्र के प्रति अपनी दीवानगी जगजाहिर करी। विरोध को दबाने के लिए सेना ने पाबंदियों से लेकर हिंसा तक तमाम तरह की कोशिशे की लेकिन वहां के नागरिको ने झुकने से बेहतर मरना समझा।
सत्ता हस्तांतरण(Army Coup) के बाद से म्यांमार में कई सामाजिक कार्यकर्ताओ ने तरह तरह के कैंपेन चलाये हैं और व्यापक स्तर पर प्रदर्शन कर सैन्य हस्तांतरण को गलत बताया है। खैर एक साल से भी लम्बे समय से चल रहे इस संघर्ष के चलते अब म्यांमार गृह युद्ध का सामना कर रहा है। स्थानीय लोग ने People's Defence Forces जैसी संघठन का गठन किया है और अब वे भी सेना से बदला लेते हुए उसके काफिलों और उसके अधिकारियो पर हमला कर रहे है, तो वहीँ सैकड़ो लोगों ने देश छोड़कर मिजोरम में आकर शरण ली है।
People protesting in Myanmar
People protesting in MyanmarImage Credits: gmanetwork.com

वैश्विक स्तर पर बात करे तो करीब एक महीने तक म्यांमार के मसले पर चर्चा होती रही, तो वहीँ चीन(China) पर वहां के हस्तांतरण को बढ़ावा देने का आरोप है। अमेरिका(USA) ने भी कुछ समय तक बयानबाजी हुई और भारत ने भी म्यांमार में हुई घटना पर दुःख जताया था। मोटे तौर पर बात की जाए तो अब सब शांत है। हाल ही में वहां के एक व्यापारी ने सू कि पर 550000 अमेरिकी डॉलर लेने का आरोप लगाया है। इसी के साथ सू कि के ऊपर अब तक 12 आरोप अब तक लगाए जा चुके है और हर आरोप कि अधिकतम सजा 15 साल हैं। इसके अलावा एक आरोप में उन्हें बीते हफ्ते छह साल कि सजा सुनाई जा चुकी है। म्यांमार के लोगो का इस घटना पर कहना है कि ऐसा सेना जान बूझकर कर रही है ताकि 76 वर्षीय सू कि का अधिकतर जीवन जेल में ही व्यतीत हो।

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