चीन का ताइवान के पास सैन्य अभ्यास, ताइवान को सता रहा हमले का डर

वू ने कहा कि चीन हांगकांग में विपक्षी आवाजों को दबाने में कामयाब हुआ है ऐसे में इस प्रतिक्रिया से उसका विश्वास बढ़ा है और अब ताइवान पर बल प्रयोग कर नियंत्रण में लेना चाहता है
चीन का ताइवान के पास सैन्य अभ्यास, ताइवान को सता रहा हमले का डर
Image Credit - The Diplomat

 डेस्क न्यूज – ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने बुधवार को कहा कि चीन ताइवान के पास सैन्य विमानों को भेज रहा है। जोसेफ वू ने संवाददाताओं से कहा कि इस तरह की उड़ानें "वास्तव में एक दैनिक घटना" बन गई हैं।

फाइल चित्र
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वू ने कहा कि चीनी सैन्य अभ्यास के साथ-साथ Taiwan पर हमले के लिए चीन की उड़ानें ताइवान की सरकार के लिए बड़ी चिंता का कारण हैं।

वू ने कहा, "अब जो वह कर रहा है वह ताइवान समस्या को हल करने के लिए बल प्रयोग करने की तैयारी में है"

वू ने जापान और अमेरिका जैसे सहयोगियों के साथ समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया, जिनमें से किसी के भी ताइवान के साथ आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं लेकिन जो निकट संबंध बनाए रखते हैं।

ताइवान के विदेश मंत्री ने ओर क्या कहा..

वू ने कहा कि चीन हांगकांग में विपक्षी आवाजों को दबाने में कामयाब हुआ है ऐसे में इस प्रतिक्रिया से उसका विश्वास बढ़ा है और अब Taiwan पर बल प्रयोग कर नियंत्रण में लेना चाहता है, हांगकांग चीन के नियंत्रण में है और वंहा लगातार लोकतांत्रिक आवाजें उठ रही थी, उसे दबाने के लिए चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पास कर दिया जिससे प्रदर्शनकारियों, आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया जा सकें।

वू ने जापान और अमेरिका जैसे सहयोगियों के साथ समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया, जिनमें से किसी के भी Taiwan के साथ आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं लेकिन जो निकट संबंध बनाए रखते हैं। अमेरिकी कानून कहता है कि वाशिंगटन सुनिश्चित करता है कि द्वीप की विश्वसनीय रक्षा बनाए रख सके और द्वीप के खिलाफ सभी खतरों को गंभीर चिंता का विषय मान सकें ।

चीन के साथ राजनीतिक एकीकरण के लिए Taiwan के बीच समर्थन लंबे समय से कमजोर है और हांगकांग में चीन के मजबूत होने के बाद ये ओर मुखर हो गया है, जैसा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पास एक तेजी से मुखर विदेश नीति है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वह क्षेत्र में सैन्य टकराव का प्रयास कर सकते हैं।

चीन हांगकांग की तरह ताइवान पर अपना नियंत्रण चाहता है

ताइवान स्वंय को प्रजातांत्रिक मानता है लेकिन चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी इस क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लाने के लिए ताइवान को धमकी देता रहता है, 1949 में चीन में दो दशक तक चले गृहयुद्ध के अंत में जब 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना' के संस्थापक माओत्से तुंग ने पूरे चीन पर अपना अधिकार जमा लिया तो विरोधी राष्ट्रवादी पार्टी के नेता और समर्थक ताइवान भाग खड़े हुए।

माओ के डर से Taiwan अमेरिका के संरक्षण में चला गया। सन् 1950 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने जल सेना का जंगी जहाज 'सातवां बेड़ा' ताइवान और चीन के बीच के समुद्र में पहरेदारी करने भेजा। सन् 1954 में अमेरिकी राष्ट्रपति आइज़न हावर ने ताइवान के साथ आपसी रक्षा संधि पर भी हस्ताक्षर किए।

शुरू में 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' (Taiwan) संयुक्त राष्ट्रसंघ का सदस्य था और चीन नहीं। धीरे-धीरे अमेरिका के संबंध चीन से अच्छे होने लगे और विश्व में चीन का दबदबा बढ़ने लगा तो सन् 1971 में चीन को संयुक्त राष्ट्रसंघ की सदस्यता मिल गई और चीन के दबाव में ताइवान की सदस्यता खारिज कर दी गई।

चीन ने ताइवान को अपना प्रांत घोषित कर दिया। धीरे-धीरे चीन के राजनीतिक दबाव की वजह अन्य राष्ट्रों ने भी ताइवान के साथ कूटनीतिक संबंध तोड़ लिए।

ताइवान ऐतिहासिक तथा संस्कृतिक दृष्टि से चीन का अंग रहा है

Taiwan  पूर्व  में स्थित एक द्वीप है। यह द्वीप अपने आसपास के कई द्वीपों को मिलाकर चीनी गणराज्य का अंग है जिसका मुख्यालय ताइवान द्वीप ही है। लेकिन अब यह चीनी गणराज्य मुक्त स्वतंत्र देश है, इस कारण 'ताइवान' का अर्थ 'चीनी गणराज्य' से भी लगाया जाता है।

यूं तो ऐतिहासिक तथा संस्कृतिक दृष्टि से यह मुख्य भूमि चीन का अंग रहा है, पर इसकी स्वायत्ता तथा स्वतंत्रता को लेकर चीन के साथ विवाद रहा है। ताइवान की राजधानी है ताइपे यह देश का वित्तीय केन्द्र भी है और यह नगर देश के उत्तरी भाग में स्थित है।

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