जानें कब है निर्जला एकादशी, क्यों मनाया जा रहा इस बार दो दिवसीय

Madhuri Sonkar

एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। एकादशी हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को मनाई जाती है। इस दिन श्री हरि और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है।

सभी पापों से मुक्ति पाने के लिए एकादशी का व्रत भी करते है। निर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठे और स्नान करके पीले वस्त्र पहने।

मंदिर में साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा विराजमान करें। इसके बाद पीले रंग का फूल, चंदन चढ़ाए और मां लक्ष्मी को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। फिर दीपक लगाकर आऱती करें औऱ विष्णु चालीसा का पाठ करें और केले और मिठाई का भोग लगाएं।

इस बार निर्जला एकादशी को लेकर लोगों में बहुत कंफ्यूजन बना हुआ है, लेकिन पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का आरंभ 17 जून को सुबह 04 बजकर 43 मिनट से हो चुका है और इसका समापन 18 जून को 6 बजकर 2 मिनट पर होगा।

बता दें कि सनातन धर्म में उदया तिथि का अधिक महत्व होता है। ऐसे में निर्जला एकादशी का व्रत 18 जून को रखा जाएगा।

इसका पारण 19 जून को सुबह 5 बजकर 23 मिनट लेकर 7 बजकर 28 मिनट तक कर सकते हैं।