युद्ध में वो देश की है शान, फिर क्यों ले रहा है पायलट्स की जान, मिग की खामियों और खूबियों का पूरा ब्यौरा

60 के दशक में आईएएफ़ में शामिल हुए मिग-21 विमान के लिए एक रिपोर्ट के अनुसार 1970 से अब तक 400 से अधिक मिग -21 हादसे हुए जिसमें 200 से अधिक पायलट अपनी जान गवा चुके है
युद्ध में वो देश की है शान, फिर क्यों ले रहा है पायलट्स की जान, मिग की खामियों और खूबियों का पूरा ब्यौरा

युद्ध में वो देश की है शान, फिर क्यों ले रहा है पायलट्स की जान, मिग की खामियों और खूबियों का पूरा ब्यौरा

युद्द के मैदान में जब मिग उड़ान भरता है तो दुश्मन की रुह कांप जाती है लेकिन इसी शान के साथ मिग के नाम कई दाग भी हैं जो इसे उड़ता ताबूत जैसा नाम से पुकारने पर मजबूर करते हैं।

युद्द के मैदान में जब मिग उड़ान भरता है तो दुश्मन की रुह कांप जाती है लेकिन इसी शान के साथ मिग के नाम कई दाग भी हैं जो इसे उड़ता ताबूत जैसा नाम से पुकारने पर मजबूर करते हैं।

तारीख 25 दिसंबर 2021

स्थान-जैसलमेर

हादसा- मिग-21 दुर्घटना ग्रस्त पायलट की मौत

तारीख 25 अगस्त 2021

स्थान- बाड़मेर, मातासर भूटिया

हादसा- मिग-21 बाइसन क्रैश, पायलट सुरक्षित

ये सिलसिला साल की इन्हीं दो तारीखों पर नहीं रुकता हर साल कोई ना कोई ऐसी खबर जरुर आती रही है जिसमें मिग हमारे पायलट्स के लिए काल बना।

मरुभूमी कई बार दहल चुकी है मिग हादसों से
12 फरवरी 2013: उत्तरलाई से महज 7 किमी. अनानी की धानी कुडला के पास मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित 7 जून 2013: उत्तरलाई से 40 कि.मी. दूर सोदियार में मिग-21 क्रैश, पायलट सुरक्षित 15 जुलाई 2013: उत्तरलाई से 4 किमी. दूर बांद्रा में मिग-27 क्रैश, पायलट सुरक्षित 27 जनवरी 2015: बाड़मेर में शिवकर रोड पर मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित। 10 सितंबर 2016: माली की ढाणी बाड़मेर में मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित। 15 मार्च 2017: सुखोई-30 शिवकर के पास दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित।

रण की शान को कैसे मिली उड़ता ताबूत की पहचान

वायुसेना का मिग-21 वो विमान जिसको ‘उड़ता ताबूत’ कहते है क्यों कहते हैं इसकी भी एक कहानी है, और इसका परिणाम आकड़े बताते है की देश की सेवा में मिग-21 का कितना योगदान रहा है, 60 के दशक में आईएएफ़ में शामिल हुए मिग-21 विमान के लिए एक रिपोर्ट के अनुसार 1970 से अब तक 400 से अधिक मिग -21 हादसे हुए जिसमें 200 से अधिक पायलट अपनी जान गवा चुके है।

सेना के लिए कितना बड़ा एसेट मिग

रूस द्वारा निर्मित इस सीरीज को अमेरिका सहित कैसे देशो में वायुसेना में काम लिया जाता है, लेकिन समय के साथ इसे रिटायर कर देते हैं, लेकिन भारत में पुरानी पीढ़ी के विमान को समय के बाद भी काम लिया जा रहा है। ज्यादा हादसे के शिकार होने के ये भी कारण हैं, और देश अपने काबिल पायलटों को खो रहा है,लेकिन अगर बात करें इसकी मारक क्षमता की तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये सेना के लिए कितना बड़ा एसेट है।

2019 में 27 फरवरी को पाकिस्तान द्वारा भारतीय मिग-21 बाइसन लड़ाकू जेट को मार गिराने का दावा करने के बाद, कई रक्षा विशेषज्ञों ने मिग विमानों में कमियों की ओर इशारा किया, लेकिन इस घटना में इस विमान को लेकर हो रही निंदा का जवाब खुद मिग ने ही दे दिया, मिग के दुर्घटना ग्रस्त होने से पहले पायलट ने इसी मिग की बदौलत पाकिस्तान का लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराया था।

F-16 विमान को मार गिराया

इस विमान को दुनिया के अब तक के सबसे घातक और सफल लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है, रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवाई युद्ध के इतिहास में यह पहली बार किसी F-16 विमान को मार गिराया गया था।

ये मिग की खूबियों के साथ इस जीत में पायलट की काबिलियत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ये कारनामा पायलट अभिनंदन ने कर दिखाया था, वो भी तब जब F-16 विमान तकनीक के मामले में ज्यादा विकसित हो, ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि मिग-21 विमान पुराने और अपने ही पायलटों के लिए घातक होने के बाद भी भारतीय वायु सेना में क्यों रहता है।

<div class="paragraphs"><p>पायलट अभिनंदन ने मिग-21से  F-16 विमान को मार गिराया था</p></div>

पायलट अभिनंदन ने मिग-21से F-16 विमान को मार गिराया था

मिग-21 ने हर युद्ध में भारत का साथ दिया है
मिग-21 भले ही ज्यादातर बार दुर्घटनाग्रस्त हुआ हो, लेकिन यह भारत की शान है। दरअसल, इस लड़ाकू विमान ने कभी युद्ध के मैदान में धोखा नहीं किया है। 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में इसी लड़ाकू विमान मिग-21 ने दुश्मन देश पाकिस्तान को छक्कों से छुड़ाया था।

भारत मिग-21 का तीसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर

रूस और चीन के बाद भारत मिग-21 का तीसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर है, 1964 में इस विमान को पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट के रूप में वायु सेना में शामिल किया गया था, शुरुआती जेट रूस में बने थे और फिर भारत ने इस विमान को असेंबल करने के अधिकार और तकनीक हासिल कर ली।

तब से लेकर अब तक मिग-21 ने 1971 के भारत-पाक युद्ध, 1999 के कारगिल युद्ध सहित कई मौकों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रूस ने 1985 में इस विमान का निर्माण बंद कर दिया था, लेकिन भारत इसके उन्नत संस्करण का उपयोग कर रहा है। मिग एक सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है जो युद्द के मैदान में कई खूबियां रखता है देश पर आए हर संकट में मिग ने भारतिय वायू सेना का पूरा साथ दिया लेकिन इस बात को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि इसी विमान ने कई होनहार पायलट्स की जान ले ली है। इसके बहुत से हादसे तो युद्ध अभ्यास के दौरान हुए हैं, जब इसे सुरक्षित नहीं माना जा रहा है तो क्यों इस उड़ते ताबूत में देश का एक बेटा वायूसेना का एक जाबांज पायलट सवार होने पर मजबूर किया जाता है।

<div class="paragraphs"><p>युद्ध में वो देश की है शान, फिर क्यों ले रहा है पायलट्स की जान, मिग की खामियों और खूबियों का पूरा ब्यौरा</p></div>
जैसलमेर में मिग-21 विमान क्रैश विंग कमांडर हर्षित सिन्हा शहीद, अगस्त में बाड़मेर में भी हुआ था ऐसा हादसा, 60 सालों में 400 से ज्यादा मिग हादसे के शिकार

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