कोरोना के साये में इलेक्शन, चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती,क्या नियमों की सख्ती से होगी पालना या बस चलेगा शिकायती सिलसिला

चुनाव आयोग ने चुनाव को लेकर कोरोना से जुड़ी खास गाइड लाइन्स तो जारी की लेकिन उनका पालन हो रहा या नहीं ये सुध लेना भूल गयी थी। इस बार भी कहीं पिछली गलती दोहराई गयी तो उसका खामियाजा आम आदमी ही उठाएगा
कोरोना के साये में इलेक्शन, चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती,क्या नियमों की सख्ती से होगी पालना या बस चलेगा शिकायती सिलसिला

Election commission 

source:social media 

पिछले साल कोरोना और चुनाव दोनों का बहुत गहरा नाता रहा , और दोनों के इस रिश्ते ने पूरे देश का जो बुरा हाल किया वो सारी दुनिया ने देखा। अस्पतालों में मचती चीख पुकार , ऑक्सीजन को तड़पते मरीज और शमशानों में जलती दिन रात चिताओं ने मौत का वह खौफ पूरे देश में भर दिया था , जिससे निकालने में कई डॉक्टरों , नर्सों , पुलिस कर्मियों जैसे कोरोना वारियर्स को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। चुनाव आयोग ने चुनाव को लेकर कोरोना से जुड़ी खास गाइड लाइन्स तो जारी की लेकिन उनका पालन हो रहा या नहीं ये सुध लेना भूल गयी थी। इस बार भी कहीं पिछली गलती दोहराई गयी तो उसका खामियाजा आम आदमी ही उठाएगा।

जानिए क्या था चुनाव आयोग की गाइडलाइंस का हाल , धरातल पर पिछले साल

पिछले साल बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत कुल 4 राज्यों में चुनाव हुए थे। चुनाव आयोग ने जब चुनाव की घोषणा की थी तब कोरोना को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग , मास्क और सैनेटाइजेशन जैसे कई आदेश जारी किये थे। सभी राजनैतिक पार्टियों ने भरोसा दिलाया था सभी नियमों के पालन का। लेकिन जैसे ही चुनाव प्रचार शुरू हुए देश के प्रधानमंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्रियों तक , सब ने लाखो लोगो की रैलियां की हजारों की भीड़ जुटा के रोड शो किये। कहीं से ये लग ही नही रहा था कि किसी को कोरोना का खौफ भी है। चुनाव हुए , परिणाम आये कोई जीता कोई हारा। चुनाव परिणाम के साथ एक और परिणाम भी देश के सामने था कोरोना मरीजों की लाखों की संख्या के रूप में जिसमें से हजारों लोगों को कहीं कोरोना से तो कहीं कोरोना की वजह से जान देनी पड़ी ।

जब तक चुनाव आयोग ने होश संभाले , देश के लोगों की कोरोना की दूसरी लहर से होश पाख्ता हो रहे थे । जब तक चुनाव आयोग को अपनी गलती का एहसास हुआ बहुत देर हो चुकी थी । हाईकोर्ट ने चुनाव के दौरान नियम कायदों की उड़ाई गई धज्जियों को लेकर इलेक्शन कमीशन और केन्द्र को नोटिस जारी कर चुका था । सब कुछ हाथ से निकल जाने के बाद आयोग चुनाव में हुई नियमों की अनदेखी को लेकर कार्यवाई करने की डींगे हांक रहा था । लेकिन न कोई कार्यवाही हुई न ही कोई सजा ।

इस बार क्या सीख लेगी आयोग पिछले साल की गलती से

2021 एक बुरे साल के रूप में यादकर लोगों को उम्मीद थी कि 2022 बेहतर होगा लेकिन नये साल के जश्न के बाद से ही कोरोना के मामलों आई बाढ़ इस बात का सीधा संकेत दे रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर की शुरूआत हो चुकी है । देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश , पंजाब समेत 5 राज्यों के चुनाव की तारीखे घोषित कर दी गयी हैं । कोरोना को लेकर इस बार भी गाइडलाइंस जारी की गई हैं ।

क्या निर्देश हैं इस बार की गाइडलाइंस में

चुनाव आयोग ने कहा कि कोरोना और ओमिरक्रोन की रणनीति के संभावित चुनाव आयोग ने स्वस्थ, स्वास्थ्य से संबंधित, जानकारों के लिए स्वास्थ्य संबंधी से मीटिंग की. सही स्थिति में बदलने वाले चुनाव आयोग ने संशोधित किया है।

यह कहा गया है कि चुनाव के निर्वाचन कार्य है. कोरोना कालचक्र सक्रिय हो रहा है। . 15 जनवरी तक किसी भी रोड शो, पद यात्रा, साइकिल या साइकिल यात्रा की जानकारी। स्थिति की समीक्षा और बाद में अपडेट जारी रहेगा |

मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा, मतदान केंद्रों की संख्या 2,15,368 है, 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद से मतदान केंद्रों की संख्या में 16% की वृद्धि हुई है. गोवा, पंजाब, मणिपुर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि इस चुनाव में सेवा मतदाताओं समेत 18.34 करोड़ मतदाता हिस्सा लेंगे, जिसमें 8.55 करोड़ महिला मतदाता हैं. उन्होंने कहा, 80 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक, विकलांग व्यक्ति और कोविड-19 के मरीज पोस्टल बैलेट से मतदान कर सकते हैं.

चंद्रा ने आगे कहा, जिन उम्मीदवारों के खिलाफ मामले दर्ज हैं, उन्हें इसकी जानकारी अखबारों और टीवी के जरिए तीन बार देनी होगी. पार्टियों को इसकी जानकारी भी अपनी वेबसाइट पर देनी होगी। इसके अलावा उनके चयन के पीछे का कारण भी बताना होगा। अब प्रत्याशी चुनाव में ज्यादा खर्च कर सकेंगे। सीईसी ने कहा कि उम्मीदवार अब 28 लाख रुपये के बजाय चुनाव प्रचार पर 40 लाख रुपये खर्च कर सकेंगे। इसके अलावा, उम्मीदवार सुविधा ऐप के माध्यम से भी ऑनलाइन नामांकन कर सकते हैं। इन चुनावों में जनभागीदारी के तौर पर सी विजिल एप की भूमिका काफी मजबूत होगी, जिसमें लोग इस एप के जरिए सीधे चुनाव आयोग तक अपनी शिकायतें और मुद्दे पहुंचा सकेंगे ।

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