Gujarat Election 2022: भाजपा में दस का दम, सत्ता वापसी पक्की; जानें वे दस कारण जो दिलाएंगे जीत

गुजरात के विधानसभा चुनाव इस बार रोचक होने वाले हैं। भाजपा और कांग्रेस के साथ APP और AIMIM की दावेदारी से मुकाबला कड़ा हो गया है। हालांकि APP और AIMIM के रण में उतरने से भाजपा की राह आसान हो चली है। APP और AIMIM जहां कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएंगे वहीं भाजपा का रास्ता सुगम करेंगे।
Gujarat Election 2022: भाजपा में दस का दम, सत्ता वापसी पक्की; जानें वे दस कारण जो दिलाएंगे जीत

गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव 2022 का रण इस बार रोचक होगा। हालांकि सीधा मुकाबला दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी (APP) और असुददीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) की दावेदारी से मुकाबला रोचक हो गया है। साथ ही एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पूर्व पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा ने भी नई पार्टी 'प्रजा विजय पक्ष' बनाकर गुजरात की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुनावी रण को और रोचक बना दिया है।

APP और AIMIM दोनों की दलों का प्रमुख वोटर मुस्लिम वर्ग हैं, साथ ही तुष्टीकरण की राजनीति करती आई कांग्रेस भी मुस्लिम मतदाताओं पर अधिक निर्भर रहती है, ऐसे में इस बार गुजरात का मुस्लिम मतदाता किसे अधिक वोट करेगा, यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा, लेकिन यह तो तय है कि मुस्लिम वोटर का बंटना इस बार तय है। ऐसे में एक बार फिर भाजपा का पलड़ा भारी होता नजर आ रहा है। हाल ही हुए चुनाव पूर्व सर्वे में भी भाजपा की जीत पक्की मानी जा रही है।

पीएम मोदी के गृहराज्य गुजरात में पिछले 27 सालों से भाजपा शासन में है। प्रदेश में जहां पीएम मोदी के नाम से वोट मिलते हैं, वहीं भाजपा का वहां अच्छा खासा परंपरागत वोट बैंक है। साथ ही चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के ताबड़तोड़ दौरे कर गुजरात वासियों को कई सौगातें देकर भाजपा की जीत का रास्ता पक्का कर चुके। आएं जानते हैं वे दस बड़े कारण जो भाजपा को दिलाएंगे गुजरात की सत्ता।

कारण 1 : मोदी मैजिक

यह हर कोई जानता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मैजिक पूरे भारत अर्थात देश के हर राज्य में चलता है। पीएम मोदी का मतदाताओं में अच्छा खासा प्रभाव है। उनकी हर चुनाव सभा में लोगों की अपार भीड़ उमड़ी है और जमकर 'मोदी-मोदी' के नारे लगते हैं। मोदी ने जबसे भारत की सत्ता की बागडोर संभाली है तभी से वे अपने बूते कई चुनाव भाजपा को जिता चुके। यूं भी नरेंद्र मोदी खुद गुजरात से हैं और चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके। उनके गृहराज्य गुजरात में पिछले 27 सालों से भाजपा शासन में है। ऐसे में गुजरात वासियों पर इस बार के चुनाव में भी मोदी मैजिक चलना स्वभाविक है।

कारण 2 : पीएम मोदी के दौरे

पीएम नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर से पहले ही राज्य के विभिन्न हिस्सों जैसे सूरत, भावनगर, अहमदाबाद और अंबाजी का दौरा कर कई परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया। इस साल वे करीब 11 बार गुजरात की यात्रा कर चुके और 11 बार ही विडियो कांफ्रेसिंग के जरिए गुजरात के कई कार्यक्रमों में शामिल हुए। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली में दो बार गुजरात के पंचायत सदस्यों से मुलाकात भी की है। पीएम मोदी के गुजरात दौरों में चुनाव पूर्व के उनके चार दौरे काफी महत्वपूर्ण हैं। इस दौरान उन्होंने गुजरात वासियों को करोड़ों रुपए की कई परियोजनाओं की सौगात दी है।

कारण 3 : गुजरात को सौगातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन माह अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में चार बार गुजरात का दौरा कर चुके हैं। पहली बार 27-28 अगस्त को, दूसरी बार 29-30 सितंबर को और तीसरी बार 9 से 11 अक्टूबर को। पहले दौरे में प्रधानमंत्री ने 4 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण किया। दूसरे दौरे में 1,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बने अस्पताल का उद्घाटन किया। तीसरे दौरे में 7 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। 19 और 20 अक्टूबर को अपने चौथे दौरे में पीएम मोदी ने 15,670 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया।

कारण 4 : पन्ना कमेटी मॉडल

इस चुनाव में भाजपा नए मॉडल के साथ मैदान में उतरी है। इस मॉडल को पन्ना कमेटी नाम दिया गया है। वोटर लिस्ट के हर पन्ने के लिए एक कमेटी में 5 सदस्य बनाए गए है। इसमें हर सदस्य की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने परिवार के 3 लोगों का वोट भाजपा को दिलाएगा। पार्टी ने पूरे प्रदेश में 82 लाख पन्ना सदस्य बनाए हैं। इसमें लक्ष्य है कि हर पन्ना सदस्य 3 वोट डलवाए। इस बार जीत के लिए भाजपा ने यह फॉर्मूला तैयार किया है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2020 में 8 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने सबसे पहले इस मॉडल को अपनाया था। इन उपचुनावों में पार्टी सभी सीटों पर जीत हासिल की। इसके बाद फिर 2021 में गुजरात निकाय चुनाव में मॉडल को लागू किया गया। इसमें भाजपा को 80 प्रतिशत से ज्यादा सीटों पर सफलता मिली।

कारण 5 : गैस की सस्ती, MSP में बढ़ोतरी

गुजरात चुनाव पर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा गुजरात में इतनी सघन प्रचार रणनीति के साथ कभी नहीं उतरी थी। यह पहली बार देखा जा रहा है कि यूपी-बिहार, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से आए पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव में घूम रहे हैं और लोगों को भाजपा के कार्यों की सूचना दे रहे हैं। भाजपा गुजरात विधानसभा चुनाव में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। पार्टी इसके लिए सभी उपाय अपना रही है। गुजरात में गैस कीमतों में कमी को भी इसी कड़ी में मतदाताओं को खुश करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी और गोवा निकाय चुनावों में भाजपा को मिली बड़ी जीत से भी पार्टी को गुजरात-हिमाचल चुनावों पर बेहतर असर पड़ने की उम्मीद है।

कारण 6 : भाजपा की मोर्चाबंदी

पार्टी ने फिर से गुजरात पर कब्जा बरकरार रखने के लिए चारों दिशाओं में मोर्चाबंदी कर दी है। जातीय और भौगोलिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की 182 सीटों को चार हिस्सों (सौराष्ट्र, उत्तर, पश्चिम, मध्य क्षेत्र) में बांट दिया है। सौराष्ट्र में उत्तर प्रदेश, पश्चिम में महाराष्ट्र, उत्तर में राजस्थान और मध्य क्षेत्र में मध्यप्रदेश के भाजपा नेताओं की ड्यूटी लगाई है। इन चारों क्षेत्रों में इन राज्यों के मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक और संघ पृष्ठभूमि के नेताओं को तैनात किया है।

कारण 7 : पाटीदारों पर फोकस

गुजरात चुनाव में बीजेपी इस बार पाटीदार समुदाय पर खास फोकस कर रही है। जिस समुदाय ने 2017 में पार्टी को बड़ी चुनौती दी थी, उसी समुदाय के सामने अब बीजेपी ने भूपेंद्र पटेल को अपना सबसे बड़ा विकल्प बना लिया है। पार्टी को भरोसा है कि भूपेंद्र पटेल की राजनीति और उनके काम करने का अंदाज उन्हें इस चुनाव में फायदा पहुंचाएगा। भूपेंद्र पटेल गुजरात के घाटलोडिया विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक हैं। वह पाटीदार समुदाय से आते हैं। भूपेंद्र पटेल को गुजरात में जमीनी स्तर का नेता माना जाता है। पटेल की उम्र 59 साल है। वह अहमदाबाद के शिलाज इलाके का रहने वाला है। शिक्षा की बात करें तो मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है।

कारण 8 : बंटेगा मुस्लिम वोट

गुजरात चुनाव में इस बार आम आदमी पार्टी (APP) और असुददीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) की दावेदारी से मुकाबला रोचक हो गया है। APP और AIMIM दोनों की दलों का प्रमुख वोटर मुस्लिम वर्ग हैं, साथ ही तुष्टीकरण की राजनीति करती आई कांग्रेस भी मुस्लिम मतदाताओं पर अधिक निर्भर रहती है, ऐसे में इस बार गुजरात में मुस्लिम वोटर का बंटना तय है। ऐसे में एक बार फिर भाजपा का पलड़ा भारी होता नजर आ रहा है। असुददीन ओवैसी तो पूरी तरह मुस्लिम मतदाताओं पर निर्भर हैं। अब यदि गुजरात का मुस्लिम मतदाता इस चुनाव में किसी एक दल के साथ नहीं गया तो मुस्लिम वोट बैंक बंटने से भाजपा की जीत हर हाल में निश्चित है।

कारण 9 : महाठग सुकेश के लेटर बम

आम आदमी पार्टी के सागिर्द रहे महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और आम आदमी पार्टी के खिलाफ एक के बाद एक करके तीन बार लेटर जारी कर केजरीवाल और उसकी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सुकेश चंद्रशेखर ने दिल्ली के राज्यपाल के नाम लिख पत्रों में सुकेश चंद्रशेखर ने राज्यसभा टिकट देने के नाम पर केजरीवाल को 50 करोड़ देने समेत आम आदमी पार्टी के लिए चुनावों में करोड़ों रुपए की फंडिग करने और जेल में सुविधाओं के नाम पर पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और डीजी तिहाड़ जेल संदीप गोयल को भी करोड़ों रुपए देने का दावा किया है। ऐसे में आप पार्टी और केजरीवाल की छवि पर प्रभाव पड़ा है, जिसका सीधा असर गुजरात चुनाव पर भी पड़ना स्वभाविक है।

कारण 10 : AAP सीएम कैंडिडेट विवादित चेहरा

आम आदमी पार्टी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए इसुदान गढ़वी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है। इसुदान गढ़वी राजनीति में आने से पहले पत्रकार थे। इसुदान गढ़वी पर गुजरात में शराब प्रतिबंध है वहां शराब पीकर बीजेपी की महिला कार्यकर्ता के साथ छेड़खानी करने के आरोप लग चुके है। जिसकी वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। ऐसे में पाक साफ राजनीति का दम भरने वाले केजरीवाल को इसुदान गढ़वी को सीएम चेहरा बताने से आप पार्टी और केजरीवाल की छवि पर प्रभाव पड़ेगा और चुनाव में मतदाताओं पर इसका गलत मैसेज जाएगा।

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