मेवात का कड़वा सच: क्या पुलिस प्रशासन का नाकारापन है हिन्दुओं के पलायन की बड़ी वजह

हरियाणा के मेवात में हिंदू और दलितों पर हो रहे अत्याचारों पर एक कमेटी का गठन कर पूर्व जस्टिस पवन कुमार ने 1 जून 2020 एक रिपोर्ट मीडिया के सामने रखी थी। आज उसी रिपोर्ट की पड़ताल में जानेंगे उन घटनओं के बारें में, जिनको सुनकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएगें कि आखिर किस तरह से स्वतंत्र भारत में कुछ मजहबियों के लिए कानून केवल नाम के लिए है।
मेवात का कड़वा सच: क्या पुलिस प्रशासन का नाकारापन है हिन्दुओं के पलायन की बड़ी वजह

पहले पाकिस्तान और अब बांग्लादेश से आए दिन हिन्दुओं पर अत्याचार की खबरें आती रहती हैं। लेकिन भारत में भी एक ऐसा हिस्सा है जहां पर हिन्दुओं और खासकर दलितों के हालात बद से बदतर हो रहे हैं। यह बात हम नहीं बल्कि पूर्व जस्टिस द्वारा जारी की गई एक प्रेस रिलीज में हुआ है। 5 अगस्त को जारी की गई सिंस इंडिपेंडेस की पड़ताल मेवात का कड़वा सच में आपने देखा की किस तरह से हरियाणा के मेवात में हिंदू और दलितों पर हो रहे अत्याचारों पर एक कमेटी का गठन पूर्व जस्टिस पवन कुमार ने 1 जून 2020 एक रिपोर्ट मीडिया के सामने रखी थी। आज उसी रिपोर्ट की पड़ताल में जानेंगे उन घटनओं के बारें में, जिनको सुनकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएगें कि आखिर किस तरह से स्वतंत्र भारत में कुछ मजहबियों के लिए कानून केवल नाम के लिए है।

उल्लेखनीय है कि विज्ञप्ति में न्यायाधीश पवन कुमार ने कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन के कई मामले मेवात से सामने आए हैं। लेकिन किसी भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने से धर्मांतरित व्यक्तियों के परिवारों पर धर्मांतरण का दबाव था।

धर्म परिवर्तन का था मामला, पुलिस ने कार्रवाई करना ही उचित नहीं समझा

एक न्यूज साइट से बात करते हुए पूर्व जस्टिस एक घटना का जिक्र करते हुए कहते है कि मेवात में दो बच्चों की मां को पहले एक मुस्लिम लड़का भागा कर ले गया, बाद में अविवाहित बताकर उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराया, लेकिन तब भी पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करना उचित नहीं समझा। वहीं महिला की बेटियां इस संबंध में कहती रहीं कि उस लड़के के व्हाट्सएप पर मैसेज आते थे कि तुम धर्म परिवर्तन करो।

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मेवात का कड़वा सच: पाक से भी बदतर हालत में हैं हिन्दू ? पूर्व जस्टिस की रिपोर्ट में कई चौकाने वाले खुलासे

कार्रवाई करने के बजाय समझौते का दबाव

जांच समिति के अध्यक्ष पवन कुमार पुलिस की ढिलाई की ओर ध्यान दिलाते हुए बताते हैं कि मेवात में स्थिति इतनी खराब है कि पैसे मांगने पर दलितों को इतना मारा जाता है कि वे मुश्किल से ही बच पाते हैं। लेकिन जब वही पीड़ित जाता है और इस संबंध में पुलिस से शिकायत करता है, तो पुलिस कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता पर ही समझौता करने का दबाव बनाती है।

जब अपराधियों को बचाने में ही लग जाए पुलिस

प्रेस विज्ञप्ति में बिछोरे गांव की एक और घटना का जिक्र है। एक न्यूज साइट को इस संबंध में सेवानिवृत्त न्यायाधीश बताते हैं कि वहां रामजीलाल को पेट से काट दिया गया और बाद में उसे जिंदा जला दिया गया। लेकिन जब आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की बात आई तो पुलिस ने यह कहते हुए फाइल बंद कर दी कि उसकी मौत बिजली गिरने से हुई है। पवन कुमार का कहना है कि खुद सोचिए अगर बिजली से किसी व्यक्ति की मौत हो गई तो पेट थोड़ी कट जाएगा? इस घटना में मृतक के परिजन इतने डरे हुए थे कि गांव से ही पलायन करने को मजबूर कर दिया था।

मेवात को हिंदु विहीन करने की तैयारी?

आगे पवन न्यूज साइट को बताते है कि हमें यह भी ज्ञात हुआ कि मेवात की बहुसंख्यक आबादी धीरे-धीरे दलितों और हिंदूओं के श्मशान घाट पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है। धीरे-धीरे मेवात की बहुसंख्यक आबादी सरकार द्वारा दिये जाने वाले प्लॉट को भी हड़पने का प्रयास कर रही है।

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