AAP बेनकाब! दिल्ली सरकार का 1300 करोड़ का क्लासरूम घोटाला उजागर, DoV ने की जांच की सिफारिश

दिल्ली के विजिलेंस विभाग ने केजरीवाल सरकार में हुए क्लासरूम घोटाले का पर्दापाश करते हुए सरकारी एजेंसी से जाँच करने की सिफारिश की..
AAP बेनकाब! दिल्ली सरकार का 1300 करोड़ का क्लासरूम घोटाला उजागर, DoV ने की जांच की सिफारिश

दिल्ली सरकार के विजिलेंस डिपार्टमेंट (DoV) ने राजधानी के स्कूलों में बड़े घोटाले का दावा किया है। विभाग का कहना है कि दिल्ली के 193 सरकारी स्कूलों में 2,405 क्लास रूम बनाने के दौरान केजरीवाल सरकार ने जमकर भ्रष्टाचार किया।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक 1300 करोड़ के घोटाले की रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंप दी गई है। साथ ही सरकारी एजेंसी के जरिए इसकी जांच की मांग भी की है।

जानिए क्या है पूरा मामला

अप्रैल 2015 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने PWD को दिल्ली के 193 सरकारी स्कूलों में 2405 एक्स्ट्रा क्लासरूम बनाने का निर्देश दिया था। लेकिन जब विजिलेंस ने क्लासरूम बनाने की जरूरत का पता लगाने के लिए एक सर्वे किया तो 194 स्कूलों में 7180 इक्विलेंट क्लासरूम (ECR) बनाए जाने का अनुमान लगाया जो 2405 क्लासेस के मुकाबले तीन गुना था।

AAP ने ढाई साल तक दबाया मामला

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC ) को 25 अगस्त 2019 को क्लासरूम कंस्ट्रक्शन में भ्रष्टाचार और लागत बढ़ने की शिकायत मिली। इससे सामने आया की बेहतर सुविधाओं के नाम पर कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 90% तक बढ़ाई गई और दिल्ली सरकार ने बिना टेंडर के 500 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी को मंजूरी भी दी। साथ ही कहा गया कि जीएफआर, सीपीडब्ल्यूडी वर्क्स मैनुअल का जमकर उल्लंघन करते हुए घटिया गुणवत्ता का अधूरा काम किया।

इसके बाद 17 फरवरी 2020 को CVC ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हुए भ्रष्टाचार को बताया। साथ ही विभाग ने रिपोर्ट भेजकर DoV यानि डाईरेक्टरेट ऑफ़ विजिलेंस से जवाब मांगा लेकिन आम आदमी पार्टी सरकार ने ढाई साल तक इस मामले को आगे नहीं बढ़ाया। इसके बाद अगस्त 2022 में दिल्ली LG ने मुख्य सचिव को निर्देश देकर देरी की जांच करके रिपोर्ट देने कहा।

रिपोर्ट से खुली AAP की पोल

जब DoV ने रिपोर्ट दी तो उसमें बताया कि टेंडर प्रोसेस में उलटफेर करने के लिए नियमों का उल्लंघन हुआ है। बेहतर सुविधाएं बढ़ाने के नाम पर 205.45 करोड़ रुपए एकस्ट्रा खर्च किया है। साथ ही कई निजी लोगों का रोल भी उजागर किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गैर संवैधानिक एजेंसियां/व्यक्ति (जैसे मैसर्स बब्बर एंड बब्बर एसोसिएट्स) एडमिनिस्ट्रेशन चला रहे थे और अधिकारियों के लिए नियम और शर्तें बना रहे थे। पूरा प्रशासन इन नियमों का पालन करवा रहा था।

केजरीवाल ने टॉयलेट को बताया क्लासरूम

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 194 स्कूलों में 160 टॉयलेट्स बनाए जाने थे, लेकिन 37 करोड़ रुपए एक्स्ट्रा खर्च करके 1214 टॉयलेट बनाए गए और इन टॉयलेट को केजरीवाल ने क्लासरूम बताया बता दे की फरवरी 2022 में केजरीवाल ने 20 हजार कमरे बनाने का दवा किया जबकि हकीकत में 141 स्कूलों में केवल 4027 क्लासरूम ही बनाए।

इस प्रोजेक्ट की टेंडर वैल्यू 860.63 करोड़ रुपए थी जबकि 989.26 करोड़ रुपए दिए गए और प्रोजेक्ट में कुल 1315.57 करोड़ रुपए खर्च हुए लेकिन बिना किसी नए टेंडर के एक्स्ट्रा काम किया, इससे कॉस्ट 326.25 करोड़ रुपए तक बढ़ गई, जो टेंडर के सेंक्शन अमाउंट से 53% ज्यादा थी।

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