जानें क्या है MSP, कब हुई इसकी शुरुआत और कैसे तय होता है अनाज का मूल्य

दो सालों बाद एक बार किसान आंदोलन फिर उग्र हो गया है। 13 फरवरी से किसान आंदोलन कर रहे है। क्या आपको पता है क्या होता है MSP?, तो चलिए आपको बताते है।
जानें क्या है MSP, कब हुई इसकी शुरुआत और कैसे तय होता है अनाज का मूल्य
जानें क्या है MSP, कब हुई इसकी शुरुआत और कैसे तय होता है अनाज का मूल्य

दो सालों बाद एक बार किसान आंदोलन फिर उग्र हो गया है। 13 फरवरी से किसान आंदोलन कर रहे है। क्या आपको पता है क्या होता है MSP?, तो चलिए आपको बताते है।

MSP का अर्थ मिनिमम सपोर्ट प्राइस यानि न्यूनतम समर्थन मूल्य कहते हैं। इसके जरिए सरकार किसानों के फसल की कीमत तय करती है।

अनाज को पहले सरकार किसानों से एमएसपी पर खरीदती है। फिर सरकार इस अनाज को राशन व्यवस्था या अन्य सरकारी योजनाओं के तहत जनता तक पहुंचाती है।

पिछले 5 दशक से चल रही MSP

किसानों के लिए MSP की व्यवस्था पिछले 5 दशक से चलती आ रही है। अगर कभी फसलों की कीमत बाजार में किसी कारण गिर भी जाती है।

तब भी भारत सरकार उस फसल को एमएसपी पर ही खरीदती है। इससे किसानों को नुकसान नहीं होता है। सरकार हर साल रबी और खरीफ की फसलों की कीमत एमएसपी के जरिये तय करती है।

जोकि (CACP) की सिफारिश पर तय की जाती है। सीएसीपी फसलों की लागत और पैदावार के आधार पर कीमत तय करके सरकार के पास भेजता है।

सरकार इन सुझावों पर चर्चा के बाद MSP की घोषणा कर देती है। पहली बार MSP का ऐलान साल 1966-67 में गेंहू की खरीद पर किया गया था।

इसी के साथ ही पहली बार गेहूं की कीमत 54 रुपये क्विंटल तय की गई थी। ऐसा माना जाता है कि यहीं से हरित क्रांति की शुरुआत हुई थी। गेंहू के साथ ही धीरे-धीरे अन्य फसलों पर भी एमएसपी लागू की गई।

23 फसलों को रखा गया MSP में

बता दें कि एमएसपी सभी फसलों पर लागू नहीं किया जाता है। इसमे सिर्फ 23 फसलों को रखा गया है। जिसमें तिलहन की 7 औऱ 4 कमर्शियल फसलें शामिल है, तो दूसरी ओऱ अनाज की 7 फसलों को रखा गया है।

इनमें गेंहू, मक्का, जौ, बाजरा, चना, मसूर, उड़द, धान, सोयाबीन, जूट, कपास, सूरजमुखी, गन्ना, मूंग, तुअर, सरसों को शामिल किया गया है।

गौरतलब है कि किसी भी फसल के बुआई के पहले ही सरकार उसका एमएसपी तय कर देती है। जिसके बाद तय मूल्य को देखकर ही किसान फसल बुआई का फैसला करते हैं।

फसलों के तैयार हो जाने के बाद सरकार एजेंसियों के माध्यम से MSP मूल्य पर अनाज खरीदती है। इसका गोदामों में भंडारण किया जाता है और मांग के अनुसार देश से लेकर विदेश तक में भेजा जाता है।

MSP के माध्यम से किसानों को हो 50 फीसदी का मुनाफा

एमएसपी तय करते वक्त इस बात का ध्यान रखा जाता है कि किसानों को उनकी लागत का कम से कम 50 फीसदी मुनाफा हो जाए, लेकिन बहुत बार ऐसा नहीं होता औऱ किसानों को एमएसपी से कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ती है।

इसके लिए किसान कोर्ट से गुहार नहीं लगा सकते क्योंकि ये एक पॉलिसी है न कि कानून। अगर बात की जाए फसलों की तो 23 में से एक यानि गन्ने पर सरकार के तरफ से कुछ हद तक पाबंदी लगी हुई है।

ऐसे में किसानों को ये डक सताता रहता है कि सरकार कभी भी एमएसपी खत्म कर सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 6 फीसदी किसानों को ही एसएसपी का फायदा मिला है।

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