राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी का सोमवार देर रात 2 बजे सवाई मान सिंह हॉस्पीटल में अन्तिम सांस ली। लोकेंद्र सिंह कालवी ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित थे। एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा ने बताया कि उनका जून 2022 से सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में इलाज चल रहा था।
लोकेंद्र सिंह कालवी, फिल्म जोधा अकबर फिल्म के खिलाफ अभियान चलाकर सुर्खियों में आए थे। जिसके बाद फिल्म पद्मावत की विरोध करने के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बनी थी।
राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी राजपूत समाज के हितों के लिए सदैव तत्पर तैयार रहते थे। चाहे वह पद्मावत को लेकर आंदोलन हो या फिल्म जोधा अकबर को लेकर अभियान चलाने की बात हो, उन्होंने समाज को हमेशा सर्वोपरि रखा है।
"मैं 6 फ़ीट 4 इंच और 118 किलो का आपके सामने खड़ा हूँ- हमने सिर कटवाए हैं मालिक! खून से इतिहास लिखा है। मुझे रानी पद्मिनी की 37वीं पीढ़ी से होने का सौभाग्य प्राप्त है। जौहर की ज्वाला में बहुत कुछ जल जाएगा। रोक सको तो रोको, जो अपनी जात का नहीं, वह अपने बाप का नहीं, जो अपने बाप का नहीं वह अपने राष्ट्र का नहीं "
राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी
लोकेंद्र सिंह कालवी पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे कल्याण सिंह कालवी के बेटे थे। कल्याण सिंह कालवी चंद्रशेखर के करीबी विश्वासपात्र थे और वीपी सिंह सरकार के गिरने के बाद चंद्रशेखर की सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह 1991 में कैबिनेट मंत्री बने, उनके पास ऊर्जा विभाग था।
लोकेंद्र सिंह कालवी ने "उपेक्षित को आरक्षण और आरक्षित को संरक्षण" के नारे के साथ 2003 में सामाजिक न्याय मंच ने 65 विधान सभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन कुल 2.2 फीसदी वोट ही मिले। सामाजिक न्याय मंच से देवी सिंह भाटी ही चुनाव जीत सके।
लोकेंद्र सिंह कालवी उस वक्त भाजपा से बगावत कर सामाजिक न्याय मंच बनाया था। पहले ही चुनाव में हार के बावजूद कई सीटों के समीकरण बदलने में कामयाब रहे भाटी-कालवी अपने मंच को मजबूत करने की कवायद में ही जुटे थे। देवी सिंह भाटी के साथ हुए एक हादसे ने सारे गणित बिगाड़ दिए। एक-एक कर भाटी के परिवारजन को सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके थे। भाटी ने कालवी की सहमति से "सामाजिक न्याय मंच" का विसर्जन किया तो कालवी ने अपनी करणी सेना बनाकर समाज के लिए मोर्चा खोल दिया।