जिस अग्निपथ योजना में रिकॉर्ड आवेदन हुए, उसी योजना का विपक्षी सांसद कर रहे विरोध

जिस योजना में युवाओं ने उत्साहपूर्वक रिकॉर्ड 7.5 लाख आवेदन किए, उसी योजना पर विपक्षी दल के सांसद भर्ती पर सवाल उठा रहे है व वापस लेने की मांग कर रहे है ।

जिस अग्निपथ योजना में रिकॉर्ड आवेदन हुए, उसी योजना का विपक्षी सांसद कर रहे विरोध

केन्द्र सरकार की अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं में देश प्रेम की भावना के चलते भारतीय वायुसेना की ओर से निकाली गई रिक्तियों में रिकॉर्ड 7.5 लाख ऑनलाइन आवेदन प्राप्त किये गये है, लेकिन वहीं विपक्षी पार्टी के सांसदों ने संसद सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है।

अग्निपथ योजना के खिलाफ विपक्षी दल के सांसदों ने रक्षा मामलों संसदीय सलाहकार समिति बैठक में प्रखर रूप से आवाज उठाई गई। वहीं सत्तापक्ष की ओर से योजना की तारीफ की गई। सलाहकार समिति में लोकसभा के 13 और राज्यसभा के 7 सदस्य है, इनमें से 12 सदस्य मौजूद थे।

विपक्षी सांसदो के अनुसार योजना में खामियां-

  • अग्निवीरों को प्रमोशन नही, कोई रैंक नहीं, पेंशन भी नहीं

  • युवा रिटायर होकर गांव जाएगा तो पूर्व सैनिक के बराबर सम्मान नहीं मिलेगा

  • अग्निवीरों को कैंटीन सुविधा नहीं मिलेगी

  • सरकार ने योजना लागू करने से पहले युवाओं को विश्वास में नहीं लिया । योजना को प्रायोगिक रूप से लागू नहीं किया ।

रिटायरमेंट के बाद भविष्य पर उठाए सवाल-

साथ ही योजना को लेकर विपक्षी सांसदों का कहना है कि अर्ध्द सैनिक बलों, सार्वजनिक उपक्रमों में भर्ती वादा पूरी नहीं होता है। पूर्व सैनिकों के लिए ग्रुप सी में 10% और 20% नौकरियां आरक्षित हैं लेकिन असल में 1.29% और 1.66% नौकरी ही दी जा सकीं है।

जबकि युवा इस योजना को लेकर आखिर क्यूं है उत्साहित जानें...

अग्निवीर को मिलेंगे इतने फायदे

चार साल की नौकरी में अग्निवीर को पहले साल 30,000 रुपये महीने सैलरी मिलेगी । वहीं दूसरे साल में हर माह 33,000 रुपये, तीसरे साल में 36,500 रुपये और फिर चौथे साल 40,000 रुपये मासिक मानदेय होगा। इस मानदेय में से प्रत्येक महीने 30 फीसदी अमाउंट काटा जायेगा और उतनी ही राशि केन्द्र सरकार भी इसमें जोड़ेगी। जिसे रिटायरमेंट फंड के रूप में अग्निवीर को दिया जायेगा। मानदेय से पृथक रिस्क और हार्डशिप अलाउंस, राशन अलाउंस, ड्रेस और ट्रैवल अलाउंस दिया जाएगा।

4 साल की नौकरी के बाद ये है विकल्प

सरकार का कहना है कि ज्यादातर युवा 12वीं के बाद स्किल ट्रेनिंग लेते हैं या हायर एजुकेशन करते हैं और फिर जॉब ढूंढते है। हम युवाओं को एक साथ तीन मौका दे रहे हैं, उन्हें अच्छी सैलरी मिलेगी, चार साल में अच्छा बैंक बैलेंस हो जाएगा। साथ ही जॉब के दौरान उन्हें स्किल ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत उन्हें जो भी फॉर्मल ट्रेनिंग दी जाएगी, उसका क्रेडिट पॉइंट उन्हें मिलेगा. उससे वे चार साल बाद हायर एजुकेशन ले सकते है। वे चार साल सेना में रहकर ज्यादा आत्मविश्वास के साथ बाहर जाएंगे।

अग्निवीर कर सकेगा नौकरी के साथ पढ़ाई भी

इन अग्निवीरों में से ही अधिकतम 25 फीसदी को ही सेना में परमानेंट होने का मौका दिया जाएगा। इसका मतलब है कि 4 में से एक अग्निवीर को पक्की नौकरी दी जायेगी। सरकार का कहना है कि वो 4 साल आर्मी में रहकर लौटा हुआ युवा दूसरों के मुकाबले नौकरी पाने में ज्यादा सक्षम होगा। इसी के साथ 4 साल में अग्निवीरों के लिए ग्रेजुएशन डिग्री कोर्स होगा। इस कोर्स की मान्यता देश-विदेश में होगी।

दुर्भाग्यवश वीरगति होने पर प्रावधान

यदि दुर्भाग्यवश सेवा के दौरान कोई अग्निवीर वीरगति प्राप्त करता है तो उसके परिवार को एक करोड़ की सहायता राशि प्रदान की जायेगा। इसके साथ ही अग्निवीर की सेवा का बचा हुआ मानदेय परिवार को मिलेगा। वहीं अगर कोई अग्निवीर सेवा के दौरान विकलांग हो जाता है तो सेना की तरफ से उसे 44 लाख की राशि देय की जाएगी और बाकी बचा हुआ मानदेय भी दिया जायेगा।


जिस अग्निपथ योजना में रिकॉर्ड आवेदन हुए, उसी योजना का विपक्षी सांसद कर रहे विरोध
युवाओं में अग्निवीर बनने को लेकर उत्साह, रिकॉर्ड 7.5 लाख ऑनलाइन आवेदन

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