यूनेस्को के विश्व धरोहर सूची में स्मारकों को जोड़ा जाए: राज्यपाल कलराज मिश्र

राज्यपाल ने जैसलमेर किले के संरक्षण और सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए वहां अतिक्रमण की समस्या के प्रभावी समाधान पर बल दिया
यूनेस्को के  विश्व धरोहर सूची में स्मारकों को जोड़ा जाए: राज्यपाल कलराज मिश्र

महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के प्रति आमजन का जुड़ाव और बढ़ेगा।

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के लिए स्मारकों को सूचीबद्ध करने का कार्य प्रभावी रूप में किया जाए। उन्होंने कहा कि इस बारे में प्रस्ताव तैयार करने के साथ-साथ स्मारकों के संरक्षण और रख-रखाव की साझा दीर्घकालीन नीति पर भी कार्य किया जाए।

राज्यपाल मिश्र ‘राजस्थान की समृद्ध विरासत का संरक्षण’ विषय पर राजभवन में आयोजित बैठक में सम्बोधित कर रहे थे। इस दौरान राज्यपाल ने जैसलमेर किले के संरक्षण और सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए वहां अतिक्रमण की समस्या के प्रभावी समाधान पर बल दिया। उन्होंने महाराणा प्रताप का राज्यारोहण दिवस मनाने के सुझाव की सराहना करते हुए कहा कि ऐसा करने से महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के प्रति आमजन का जुड़ाव और बढ़ेगा।

<div class="paragraphs"><p>विश्व धरोहर के रूप में मान्यता मिलने से उस स्थान का प्रभावी संरक्षण तो होता ही है, विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थान बनाने से वहां की अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है।</p></div>

विश्व धरोहर के रूप में मान्यता मिलने से उस स्थान का प्रभावी संरक्षण तो होता ही है, विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थान बनाने से वहां की अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है।

विश्व धरोहर के रूप में मान्यता मिलने से उस स्थान का प्रभावी संरक्षण तो होता ही है

राज्यपाल ने कहा कि ऐतिहासिक एवं प्राचीन स्मारक हमारे अतीत और सांस्कृतिक वैभव के परिचायक हैं और राजस्थान की इस विरासत के संरक्षण के साथ ही इस बारे में सांस्कृतिक जागरूकता पैदा करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने योग्य धरोहर स्थलों की दृष्टि से राजस्थान में बहुत संभावनाएं हैं। विश्व धरोहर के रूप में मान्यता मिलने से उस स्थान का प्रभावी संरक्षण तो होता ही है, विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थान बनाने से वहां की अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है।

राज्यपाल ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर के प्रति चेतना से ही कोई समाज और राष्ट्र अपनी जड़ों से जुड़ा रह सकता है। इस दृष्टि से बाड़मेर में किराडू मंदिर, उदयपुर के पास जगत मंदिर, भानगढ़, अलवर में टहला के पास नीलकण्ठ मंदिर, बिजोलिया के मंदिर, बूंदी में केशवरायपाटन, झालावाड़ की बौद्ध गुफाएं, टोंक स्थित बीसलपुर का शिव मंदिर जैसे बहुत सारे महत्वपूर्ण स्थान हैं जिनके संरक्षण की आवश्यकता है।

<div class="paragraphs"><p>महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के प्रति आमजन का जुड़ाव और बढ़ेगा।</p></div>
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