सीएम का चेहरा बन सकती हैं राजकुमारी दीया

अगले साल चुनाव है, भाजपा में मुख्यमंत्री पद के लिए नए चेहरे की तलाश की जा रही है। हालांकि वसुंधरा पूरी तरह इस कोशिश में लगी हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल जाए, लेकिन फिलहाल ऐसा लग नहीं रहा।
सीएम का चेहरा बन सकती हैं राजकुमारी दीया

- भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व कर रहा है विचार

- वसुंधरा को नहीं मिलेगा मौका, भाजपा के अधिकांश नेता विरोध में

- राज घराने के साथ दीया के कामकाज और व्यवहार को मिल सकता है फायदा

राजस्थान की राजनीति राजघरानों के इर्दगिर्द रही है। रिसासत छूटी तो कुछ को सियासत भाई तो कुछ को यह भी रास नहीं आई। विधानसभा हो या लोकसभा, अब भी कई राज परिवार के सदस्य सियासी दांव-पेंच खेलते नजर आ रहे हैं।

राजमाता गायत्री देवी के पुत्र भले ही लोकसभा का चुनाव हारकर राजनीति से अलग हो गए थे, लेकिन पोती दीया कुमारी आने वाले समय में मुख्यमंत्री पद के लिए बड़ा चेहरा साबित हो सकती हैं। प्रेम विवाह के बाद तलाक की जिंदगी से गुजर चुकी दीया कुमारी के पास सम्पत्ति भी बहुत है तो दबे जुबान में उनके आगे बढऩे पर आपत्ति भी बहुत।

वो वसुंधरा को रिप्लेस कर पाएंगी, इस पर अभी से चर्चा शुरू हो गई है। पहले विधायक और अब सांसद बनी दीया कुमारी का बढ़ता वजूद कई सीनियर भाजपाई लीडर को परेशान किए हुए है।

पूर्व राज परिवारों ने पहले लोकसभा चुनाव से ही राजनीति में एंट्री मार ली थी और आज तक यह रफ्तार से चल रहा है। पहले लोकसभा चुनाव 1951-52 में हुए थे, उस समय बीकानेर के पूर्व महाराजा करणी सिंह ने 28 साल की उम्र में चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए।

कांग्रेस की तुलना में भाजपा को पूर्व राजघराने ज्यादा पसंद हैं। जयपुर की पूर्व राजमाता गायत्री देवी से यह सिलसिला शुरू हुआ। इस लिस्ट में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, जयपुर की पूर्व राजकुमारी दीया कुमारी और बीकानेर की पूर्व राजकुमारी सिद्धी कुमारी जैसे कई नाम शामिल हैं। कांग्रेस के पास अलवर के जितेंद्र सिंह और कोटा के पूर्व सांसद इज्यराज सिंह हैं, जो पूर्व राजघराने से हैं।

दोनों ही पार्टी इन राज परिवारों से फायदा उठाती रही है। पार्टियों को उनके परिवार की लोकप्रियता का लाभ मिलता है, जो संबंधित सीट के साथ ही उसके आसपास की सीटों पर भी नजर आता है।

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जब दीया को मिले आठ लाख से ज्यादा वोट

राजसमंद में दीया कुमारी लोकसभा में शानदार जीत दर्ज की। उदयपुर संभाग के संसदीय क्षेत्र राजसमंद से भाजपा प्रत्याशी दीया कुमारी ने कांग्रेस प्रत्याशी देवकीनंदन गुर्जर को 5 लाख 51 हजार 916 वोटों से हराया।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में दीया को 8 लाख 63 हजार 039 व देवकीनंदन को 3 लाख11 हजार 123 वोट मिले। दीया कुमारी का यह पहला लोकसभा चुनाव था। इसकी जीत ने दीया कुमारी की हैसियत राज्य के साथ केन्द्र में भी बढ़ा दी।

दीया कुमारी ने सितम्बर 2013 में जयपुर में आयोजित भाजपा की रैली में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व तत्कालीन भाजपाध्यक्ष राजनाथ सिंह की मौजूदगी में भाजपा ज्वॉइन की थी।अपनी दादी व जयपुर की पूर्व राजमाता गायत्री देवी के नक्शे कदम पर चलते राजनीति में प्रवेश कर लिया था।

डॉ. किरोड़ी को हरा चुकी हैं

वर्ष 2013 में भाजपा ने सवाई माधोपुर विधानसभा सीट से दीया कुमारी को डॉ. किरोड़ी लाल के सामने टिकट दिया। दीया कुमारी 7 हजार 532 वोटों से जीतकर विधायक बनीं। विधानसभा चुनाव 2018 में दीया कुमारी को टिकट नहीं मिला और फिर भाजपा ने इन पर लोकसभा चुनाव 2019 राजसमंद सीट से दांव खेला।

जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई भवानी सिंह और महारानी पद्मिनी देवी के घर 30 जनवरी 1971 को दीया कुमारी का जन्म हुआ। राजघराने में पैदा होने के कारण इनका बचपन राजकुमारी की तरह बीता। इकलौती संतान दीया कुमारी ने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल और जयपुर के महारानी गायत्री देवी गल्र्स पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की।

फिर उच्च शिक्षा के लिए लंदन चली गई थीं। जयपुर स्थित अपनी पारिवारिक विरासत सिटी पैलेस, जयगढ़ किले समेत अन्य इमारतों व पर्यटन स्थलों के संरक्षण के कामों में भी दीया कुमारी को अक्सर व्यस्त देखा जा सकता है। ये समाजसेवा के कार्यों में भी बढ़-चढक़र हिस्सा लेती हैं।

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21 साल की उम्र में प्रेम विवाह

दीया कुमारी की निजी जिंदगी में काफी उथल-पुथल रही है। सबसे ज्यादा सुर्खियों में दीया कुमार का वैवाहिक जीवन रहा। दीया कुमारी ने समाज से लडक़कर नरेन्द्र सिंह से प्रेम विवाह किया था। दोनों एक ही गोत्र के होने के कारण राजपूत सभा ने भी इनकी लव मैरिज पर कड़ी नाराजगी जताई थी।

अपने साक्षात्कार में दीया कुमारी ने बताया था कि वर्ष 1989 में नरेंद्र जयपुर में चार्टर्ड एकाउंटेंट की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान वे सवाई मानसिंह संग्रहालय ट्रस्ट में इंटर्नशिप के लिए आए थे। यहां तीन माह काम किया। तब दीया कुमारी 18 साल की थी। अकाउंट के काम से नरेन्द्र सिंह महल में कुछ काम से आए थे।

यही पर दोनों की पहली मुलाकात हुई, जो तीन साल बाद में प्रेम और शादी में बदल गई। सामाजिक बंधनों से लडक़र दीया कुमारी ने नरेन्द्र सिंह से शादी कर ली थी। उनके तीन बच्चे हुए। बड़े बेटे पद्मनाभ सिंह को महाराजा भवानी सिंह ने 22 नवंबर 2002 को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। पद्मनाथ को 27 अप्रेल 2011 को जयपुर की गद्दी पर बैठाने की रस्म अदा की गई थी। दूसरे बेटे का नाम लक्ष्यराज सिंह व बेटी का नाम गौरवी कुमारी है।

आखिर क्यों हुआ नरेंद्र से तलाक

वर्ष 2018 तक दीया कुमारी की निजी जिंदगी में सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन अचानक पति से तलाक का उन्होंने फैसला ले लिया। इस फैसले के कारण दीया एक बार फिर से सुर्खियों में आ गईं। उन्होंने गांधीनगर स्थित फैमिली कोर्ट में अपने पति नरेंद्र सिंह से तलाक के लिए अर्जी लगाई थी। वर्ष 2018 में तलाक हुआ।

हालांकि यह बात किसी के गले नहीं उतर रही कि प्रेम विवाह के बाद इनके तलाक का कारण क्या रहा। जब प्रेम विवाह किया था तो किन कारण से वे अलग हुए। इसको लेकर भी महल से लेकर विदेश दौरे की ना-ना प्रकार की बातें सामने आती है। नरेंद्र सिंह का सम्पत्ति का मोह या दीया का उनके प्रति बेरुखापन इसकी वजह बन गया। तलाक के बाद दीया कुमारी का पूरा समय राजनीति के लिए हो गया।

तो क्या बन सकती हैं मुख्यमंत्री

अगले साल चुनाव है, भाजपा में मुख्यमंत्री पद के लिए नए चेहरे की तलाश की जा रही है। हालांकि वसुंधरा पूरी तरह इस कोशिश में लगी हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल जाए, लेकिन फिलहाल ऐसा लग नहीं रहा।

ऐसे में दीया कुमारी का नाम चलने लगा है, भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने यहां के वरिष्ठ नेताओं के साथ विधायकों की भी रायशुमारी की, कुछ नाम को छोड़ दें तो अधिकांश ने दीया के नाम पर सहमति जताई है।

उनका कहना भी है कि दीया कुमारी वसुंधरा के मुकाबले व्यावहारिक हैं। बार-बार राजे का चेहरा सामने आने से भी जनता खिलाफत में वोट दे सकती है। ऐसे में दीया को ही मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। ऐसे में अब इस पर मंथन शुरू हो चुका है। हो सकता है कि सांसदी छोडक़र दीया को सीएम का चेहरा बनाया जाए।

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