शिव सीट पर 43 साल से एक बार भाजपा, एक बार कांग्रेस जीतती है, यहां 2003 में भाजपा, 2008 में कांग्रेस, 2013 में भाजपा व 2018 में कांग्रेस  जीती
शिव सीट पर 43 साल से एक बार भाजपा, एक बार कांग्रेस जीतती है, यहां 2003 में भाजपा, 2008 में कांग्रेस, 2013 में भाजपा व 2018 में कांग्रेस जीतीimage credit: sinceindependence

शिव सीट पर 43 साल से एक बार भाजपा, एक बार कांग्रेस जीतती है, यहां 2003 में भाजपा, 2008 में कांग्रेस, 2013 में भाजपा व 2018 में कांग्रेस जीती

Rajasthan Election 2023: पाकिस्तान सीमा से सटी बाड़मेर की शिव सीट प्रदेश की सबसे हॉट सीट बन चुकी है। जैसलमेर के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी विधानसभा। यहां 9 में 5 प्रत्याशी बराबरी की टक्कर के हैं।

Rajasthan Election 2023: पाकिस्तान सीमा से सटी बाड़मेर की शिव सीट प्रदेश की सबसे हॉट सीट बन चुकी है। जैसलमेर के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी विधानसभा।

यहां 9 में 5 प्रत्याशी बराबरी की टक्कर के हैं। मतलब अकेली पंचकोणीय मुकाबले वाली सीट। कांग्रेस से 5 बार जीते 84 वर्षीय अमीन खां फिर मैदान में हैं।

कांग्रेस के ही बागी पार्टी जिलाध्यक्ष फतेहखान निर्दलीय भारी भीड़ जुटा रहे हैं।

2 मुस्लिम व 3 राजपूतों में टक्कर

भाजपा ने भी पार्टी जिलाध्यक्ष स्वरूपसिंह खारा को टिकट दिया। उनके खिलाफ भी एक सप्ताह पूर्व भाजपा में आए जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र सिंह भाटी भी कम नहीं। पांचवें बड़े प्रत्याशी 2003 भाजपा विधायक जालम सिंह रावलोत अब आरएलपी से हैं।

यानी 2 मुस्लिम व 3 राजपूतों में टक्कर है। मुकाबला लूडो जैसा है। पांच में कोई भी जीत सकता है।

यह सीट 70 साल से मुस्लिम या राजपूत के कब्जे में ही रही है। दूसरी ओर, शिव क्षेत्र की 3.19 लाख जनता का मूड बदलाव का है।

यहां 1972 से एक बार भाजपा, एक बार कांग्रेस जीत रही है। हालांकि बाॅर्डर के गांवों जेसिंदर, गडरा रोड, मुनाबाव तक रविंद्र भाटी पोस्टर बॉय बने हुए हैं।

ये है तीन बड़ी समस्याएं

शिव क्षेत्र में 80% सड़कों के टूटे होने, 70% गांवों में पानी की किल्लत और कोयले की खदानें सबसे बड़ी समस्याएं हैं।

गिरल, आगोरिया व जालेला-आकली गांव के बीच की खदान ने 10 से ज्यादा गांव के सभी रास्ते रोक दिए।

बच्चे कोयला लदे ट्रकों के बीच से 10-10 किलोमीटर पैदल स्कूल जाते हैं। काला सोना (कोयला) निकालने और अरबपति बनाने का सपना दिखा 30 साल पहले लिग्नाइट की खानों के लिए गांव के गांव और जमीनें कौड़ियों के भाव ले ली गईं। लेकिन गांव वालों को मिला केवल दम घुटने का नासूर।

क्षेत्र के 140 से अधिक गांवों, कस्बों में हालात देखे तो शिव कस्बे, कोट़ड़ा, जालेला, गिरल, आकली, बालासर, मुंगेरिया, ताणू, हरसाणी, देताणी, गडरा रोड, जेसिंदर, मुनाबाव, भैंसड़ा, कानासर, बीसू कलां जैसे बड़े गांवों में हाल खराब हैं। देताणी विधायक का गांव हाेने से चमक रहा है।

दर्जनों गांवों में पानी नहीं, टैंकर के भरोसे

गांव गिरल के रूपसिंह चौहान व स्वरूपसिंह राठौड़ ने कहा कि हमें काले सोने का प्रलोभन देकर जमीनें ले ली। रास्ते बंद कर दिए, आईमाता की पूजा भी नहीं कर पा रहे। बदलाव चाहिए।

जेसिंदर स्टेशन के कपिल शर्मा ने बताया कि हमारे यहां अधिकांश रविंद्र सिंह भाटी को चाहते हैं। हमें जुझारू नेता चाहिए।

बालासर के नखतसिंह, मुंगेरिया के मौकमसिंह, आकली के सिरदारा राम बोले कि हम पानी की समस्या से परेशान हैं। ऐसा नेता चाहिए जो आधी रात को भी हर वर्ग की समस्या सुनें।

हरसाणी के जगदीश जैन, मोहब्बतसिंह, स्वरूपसिंह भाटी, भूरचंद जैन व बीसू कलां के छतरसिंह, पोकरसिंह, कानसिंह ने हमारे दर्जनों गांवों में पानी नहीं है। टैंकर के भरोसे हैं।

कांग्रेस-बीजेपी, इनके सिवाय किसी पर विश्वास मत करना

कांग्रेस के प्रत्याशी अमीन खां का कहा 2 ही पार्टी हैं। कांग्रेस-बीजेपी। इनके सिवाय किसी पर विश्वास मत करना। सरकार ने अच्छे काम किए। कांग्रेस को वोट देना। मुझसे नाराज हो तो भाजपा को दे देना, लेकिन अन्य किसी को नहीं। 

भाजपा प्रत्याशी स्वरूपसिंह खारा ने कहा कि शिव में मूल कांग्रेसी वोटर 3 धड़ों में बंट गए है। इस कारण सीट पर भाजपा के जीतने के आसार बढ़ गए हैं।

निर्दलीय प्रत्याशी रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि मैंने 1 साल शिव विस में गांव-गांव विकास जन यात्राएं निकालीं। जनता बदलाव के मूड में है। गांव रोड, पानी, अस्पताल जैसी सुविधा से वंचित हैं। जनता के भाव देख खड़े रहने का फैसला किया।

शिव सीट पर 43 साल से एक बार भाजपा, एक बार कांग्रेस जीतती है, यहां 2003 में भाजपा, 2008 में कांग्रेस, 2013 में भाजपा व 2018 में कांग्रेस  जीती
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