सचिन पायलट की उड़ान अब किस ओर? पढ़ें विश्लेषणात्मक रिपोर्ट...

एक बार फिर पायलट ने चुनाव में पार्टी की लुटिया डुबाने के लिए बगावती सुरों का आलाप लिया है। ये बगावती सुर कहीं तो सुने लगते हैं! जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट...
सचिन पायलट की उड़ान अब किस ओर? पढ़ें विश्लेषणात्मक रिपोर्ट...
Pic Credit- Lokendra Singh Sainger

कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व उप मुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट के बगावती सुर एक बार फिर सामने आये हैं। पायलट ने कल यानि 9 अप्रैल को प्रेस कॉफ्रेंस आयोजित कर कांग्रेस आलाकमान को सकते में ला दिया है। पायलट ने कॉफ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर बीजेपी के साथ गठजोड़ का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि पूर्व में रही वसुंधरा राजे की सरकार के समय हुए घोटालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई जबकि इससे पहले मैं मुख्यमंत्री को इस बारे में दो बार चिठ्ठी लिख चुका हूं। साथ ही उन्होंने 11 अप्रैल को एक दिन के लिए शहीद स्मारक पर धरने पर बैठने के लिए भी कहा है।

पायलट और केजरीवाल के आरोपों का मेल कैसे?

आपको बता दें कि पायलट के बगावती सुर कहीं न कहीं केजरीवाल की ओर से गहलोत व वसुंधरा पर लगाये जाने वाले आरोप से मेल खाते हैं। अब सवाल यही उठता है कि पायलट कहीं केजरीवाल की शरण में तो नहीं जायेंगे?

राजस्थान में अपने कदम पसारने की जद्दोजहद में लगी आप के संस्थापक अरविंद केजरीवाल ने भी भाजपा और कांग्रेस पर राजनीतिक गठजोड़ के आरोप लगाये थे। केजरीवाल ने कहा था कि कांग्रेस बीजेपी सत्ता में आते ही एक-दूसरे के घोटालों पर पर्दा ड़ाल देते हैं जबकि देखा जाए तो पायलट की प्रेस काफ्रेंस का सार भी यही था।

पायलट की कांफ्रेंस गहलोत को चुनौती!

हालांकि पायलट का कांफ्रेंस करना सीधा-सीधा गहलोत को चुनौती देना है क्योंकि पायलट ये जानते हैं कि उनकी दो बार चिठ्ठी लिखने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो धरना देने के बाद भी क्या ही हासिल होगा। लेकिन शायद पायलट तो कुछ और ही हासिल करना चाहते हैं!

पायलट यह भी जानते है कि आलाकमान उनसे नाराज हैं तो स्वाभाविक पार्टी स्वंय ही उनको निकाल देगी। जिससे लोगों की सहानभूति मिलेगी और जिनसे सुर मेल खाते है उनसे हाथ मिला सकेंगे या फिर राजस्थान में तीसरा मोर्चे की नींव रख सकेंगे।    

'मुद्दा सही लेकिन तरीका गलत'- प्रभारी रंधावा

सचिन पायलट की ओर से की गई प्रेंस काफ्रेंस के बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि पायलट का मुद्दा सही लेकिन तरीका गलत है। उन्हें एक बार बात तो करनी चाहिए थी। रंधावा आज यानि 10 अप्रैल को जयपुर आकर इस बारे में पायलट व गहलोत से बात करेंगे।

'जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय'- पायलट

कुछ दिनों पहले एनएसयूआई की ओर से राहुल गांधी के समर्थन में मशाल जुलूस निकाला गया था जिसमें सचिन पायलट भी शामिल हुए थे। इस दौरान मशाल में से अंगारा सचिन पायलट के ऊपर गिर गया था। पायलट समर्थकों की ओर से आरोप लगाया गया था कि अंगारा सुनियोजित रूप से पायलट पर डाला गया।

प्रेस कांफ्रेंस में जब एक पत्रकार ने पायलट से पूछा की ऐसा कहा जा रहा मशाल जुलूस के दौरान आप पर चलाकर अंगारा डाला गया तो उन्होंने इसके जबाव में कहा- जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय।

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