बेरोजगारों के समर्थन में उतरी BJP,सरकार को हठधर्मिता छोड़कर युवाओं की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए- वसुंधरा राजे

बेरोजगार प्रियंका गांधी न्याय की आस लेकर लखनऊ पहुंच थे
बेरोजगारों के समर्थन में उतरी BJP,सरकार को हठधर्मिता छोड़कर युवाओं की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए- वसुंधरा राजे

डेस्क न्यूज. राजस्थान के युवा पिछले 45 दिनों से 22 सूत्री मांगों को लेकर जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना दे रहे बेरोजगार यूपी पहुंच गए हैं. बेरोजगारों के यूपी पहुंचने के बाद शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बेरोजगारों के साथ अभद्रता की. जिसके बाद बीजेपी नेताओं ने भी बेरोजगारों का समर्थन किया है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि राजस्थान के बेरोजगार लोग अपनी जायज मांगों को लेकर लखनऊ कांग्रेस कार्यालय के बाहर ठंड में धरना दे रहे हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश में धरना देने वाले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को अशोक गहलोत को समझाना चाहिए.

राजस्थान सरकार बेरोजगारों की बात नहीं सुन रही- पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि राजस्थान के बेरोजगार एक महीने से धरने पर बैठे हैं. इसके बाद भी राजस्थान सरकार ने उनकी एक नहीं सुनी। जिसके बाद परेशान होकर बेरोजगार प्रियंका गांधी न्याय की गुहार लगाने लखनऊ पहुंच गई हैं. ऐसे में अब राज्य सरकार को हठधर्मिता छोड़कर युवाओं की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए.

बेरोजगार प्रियंका गांधी न्याय की आस लेकर लखनऊ पहुंच थे

वहीं विधानसभा के उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि राजस्थान में बेरोजगार डेढ़ महीने से धरना दे रहे हैं. लेकिन तानाशाह गहलोत सरकार नहीं सुन रही है. जिसके बाद परेशान होकर बेरोजगार प्रियंका गांधी न्याय की आस लेकर लखनऊ पहुंच थे. लेकिन वहां भी कांग्रेस कार्यकर्ता बेरोजगारों से लड़ाई में जुट गए हैं. जो पूरी तरह गलत है। सरकार बेरोजगारों की लंबित मांगों को जल्द से जल्द पूरा करे।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बेरोजगारों के साथ मारपीट की

इधर, राजस्थान बेरोजगारी एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव ने कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने बेरोजगारों के साथ किए वादे को तोड़ा है. ऐसे में आमरण अनशन करने के लिए राजस्थान के बेरोजगार उत्तर प्रदेश पहुंच गए हैं. लेकिन यहां भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बेरोजगारों के साथ मारपीट की। लेकिन बेरोजगार अंतिम सांस तक अपनी लंबित मांगों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

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